राजस्थान: रणथंभौर से कूनो और माधव तक बनेगा वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट, एक सफर में दिखेंगे चीते और बाघ
रणथंभौर, कूनो और माधव टाइगर रिजर्व को जोड़कर वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट बनाने का प्रस्ताव है। इससे पर्यटक एक ही सफर में बाघ, चीते और ऐतिहासिक स्थलों का अनुभव कर सकेंगे। योजना से वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व घूमने आने वाले पर्यटक जल्द ही मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क और माधव टाइगर रिजर्व तक भी वन्यजीव पर्यटन का सफर कर सकेंगे। तीनों संरक्षित क्षेत्रों को जोड़कर एक वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका मकसद राजस्थान और मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ पर्यटकों को सफारी और प्रकृति से जुड़ी गतिविधियों के ज्यादा विकल्प देना है।
मध्य प्रदेश के वन विभाग ने रणथंभौर को कूनो नेशनल पार्क और शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस सर्किट से घरेलू और विदेशी पर्यटकों को एक ही यात्रा में अलग-अलग वन्यजीवों और प्राकृतिक स्थलों को देखने का मौका मिल सकेगा। फिलहाल कूनो में करीब 55 चीते, माधव टाइगर रिजर्व में चार बाघ और रणथंभौर में 75 से अधिक बाघ होने की जानकारी दी गई है।
रणथंभौर-कूनो-माधव के बीच वन्यजीव कॉरिडोर पर भी जोर
तीनों क्षेत्रों को जोड़ने की पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) भी रणथंभौर, कूनो और माधव के बीच वन्यजीव कॉरिडोर की पहचान करने में रुचि दिखा चुका है। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देशभर में ऐतिहासिक रिकॉर्ड, वन्यजीवों की आवाजाही और उनके प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क के आधार पर कॉरिडोर चिह्नित किए जा रहे हैं। इन्हें विकसित करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी।
अधिकारी ने कहा कि पर्यटन के लिहाज से चीते और बाघ बड़े आकर्षण हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के बीच सड़क और वन क्षेत्र की बेहतर कनेक्टिविटी जरूरी है।
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राजस्थान में चीतों की आवाजाही से बढ़ी संरक्षण की मांग
मध्य प्रदेश के कूनो से चीतों के बार-बार राजस्थान की सीमा में आने के कारण राज्य को प्रोजेक्ट चीता से औपचारिक रूप से जोड़ने की मांग भी तेज हुई है। हाड़ौती क्षेत्र के वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बारां, चित्तौड़गढ़ और राजस्थान के अन्य हिस्सों में चीतों की आवाजाही को चुनौती के बजाय संरक्षण के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
हाल ही में मादा चीता वीरा ने बारां में काफी समय बिताया था। बाद में उसे बेहोश कर वापस कूनो ले जाया गया। भारत में जन्मे चीते केपी-2 और केपी-3 भी राजस्थान के इलाकों में पहुंच चुके हैं। इन घटनाओं के बाद दोनों राज्यों के बीच समन्वित संरक्षण रणनीति की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने 17,000 वर्ग किलोमीटर के कूनो-गांधी सागर लैंडस्केप को अंतरराज्यीय संरक्षण कॉरिडोर के रूप में चिह्नित किया है। इसमें राजस्थान का करीब 6,500 वर्ग किलो