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पंचायत चुनाव में क्यों बदली कांग्रेस की रणनीति?: जानिए, गांवों की सरकार के लिए क्या है नया प्लान

Fri, 02 Oct 2026 08:37 AM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 02 Oct 2026 08:37 AM IST
सार

राजस्थान के निकाय चुनाव में रणनीति को लेकर अपनों के सवालों से घिरी कांग्रेस अब पंचायत चुनाव में क्या नए पैंतरे आजमाएगी? प्रचार में क्या बड़ा बदलाव किया, जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Why Did Congress Change Its Strategy for Rajasthan Panchayat Polls? Here’s the New Plan
कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अंतर्कलह और बयानबाजी से जूझ रही कांग्रेस ने पंचायत चुनावों को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।  निकाय चुनाव के दौरान पार्टी के बड़े नेताओं की कम सक्रियता को लेकर सवाल उठे थे। इसलिए अब पंचायत चुनावों को लेकर कांग्रेस ने नया प्लान तैयार किया है। पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने दिग्गज नेताओं को सीधे मैदान में उतारने की तैयारी की है। रोड शो का जवाब रोड शो से और सभाओं का जवाब जनसभाओं से देने की तैयारी है।
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने शुक्रवार को नागौर के डेगाना से पंचायत चुनाव के प्रचार का आगाज किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने यहां कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। दोनों नेताओं ने कार्यकर्ताओं से पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की।
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निकाय चुनाव के बाद रणनीति पर हुई थी चर्चा

निकाय चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठे थे। खास तौर पर वरिष्ठ नेताओं के फील्ड में कम नजर आने और चुनाव प्रचार में उनकी सीमित भागीदारी को लेकर चर्चा हुई।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी निकाय चुनाव की रणनीति को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी के भीतर यह बात उठी कि बड़े नेता अगर ज्यादा संख्या में सभाएं और रोड शो करते और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहते तो चुनावी अभियान को मजबूती मिल सकती थी। अब पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता बढ़ाने का फैसला किया है।

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डेगाना से शुरू हुआ नया प्लान

कांग्रेस ने पंचायत चुनाव के लिए पहला बड़ा कार्यक्रम नागौर के डेगाना में रखा। यहां डोटासरा और जूली ने एक साथ कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। नागौर का चुनावी महत्व भी है। देश में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत नागौर से ही हुई थी।

अब लगातार मैदान में दिखेंगे बड़े नेता

कांग्रेस की नई रणनीति में सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ही नहीं, बल्कि दूसरे वरिष्ठ नेताओं को भी चुनाव प्रचार से जोड़ने की तैयारी है। प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी पंचायत चुनाव के दौरान सभाओं और दूसरे कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं।

डोटासरा और जूली के भी आने वाले दिनों में अलग-अलग जिलों में चुनावी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। पार्टी का जोर इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े नेताओं की सीधी मौजूदगी के साथ स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है।

शहरी जनादेश के बाद अब गांवों पर नजर
निकाय चुनाव में शहरी मतदाताओं का फैसला सामने आ चुका है। अब कांग्रेस के सामने पंचायत चुनाव में ग्रामीण इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है।
राजस्थान में इस बार पंचायत चुनाव भी खास हैं, क्योंकि राज्य के इतिहास में पहली बार इन्हें एक साथ कराने की तैयारी है। ऐसे में कांग्रेस ने निकाय चुनाव के अनुभव के बाद पंचायत चुनाव की शुरुआत से ही अपने बड़े नेताओं को प्रचार अभियान में उतारने की रणनीति अपनाई है।
 
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