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Paush Purnima 2026: पौष पूर्णिमा आज, गंगा स्नान और दान से खुलते हैं पुण्य और सौभाग्य के द्वार

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 03 Jan 2026 11:43 AM IST
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सार

Paush Purnima 2026: आज 3 जनवरी को साल 2026 की पहली पूर्णिमा है। पौष महीने में पड़ने के कारण इसे पौष पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन दान और स्नान का विशेष महत्व होता है। 

Paush Purnima Upay 2025 Snan Puja Astro Remedies For Good luck and  Prosperity
Paush Purnima 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Paush Purnima 2026: हिंदू धर्म में पौष मास की पूर्णिमा तिथि अत्यंत पवित्र मानी गई है। यह दिन तप, दान, स्नान और पुण्य कर्मों के लिए विशेष फलदायी होता है। धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन किए गए दान-पुण्य से न केवल वर्तमान जीवन के कष्ट दूर होते हैं, बल्कि पूर्व जन्मों के पापों का भी क्षय होता है।
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पौष पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, स्वास्थ्य एवं सौभाग्य का वास होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट से होगा, जबकि इसका समापन 3 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा । उदयातिथि के आधार पर पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा।  इस दिन चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगा।
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पौष पूर्णिमा पर स्नान का धार्मिक महत्व
पौष पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया स्नान शरीर के साथ-साथ मन को भी शुद्ध करता है। स्नान के बाद भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्य, तेज और यश की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि पौष पूर्णिमा से कल्पवास का प्रारंभ भी होता है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।

वस्त्र दान का विशेष फल
स्नान के बाद वस्त्र दान का विशेष विधान बताया गया है। पौष मास में ठंड अधिक होती है, इसलिए इस समय वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वस्त्र दान करने से दरिद्रता का नाश होता है और जीवन में सम्मान व स्थिरता आती है। यह दान विशेष रूप से ब्राह्मणों, साधुओं और जरूरतमंदों को करना श्रेष्ठ माना गया है।

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तेल दान का महत्व
पौष पूर्णिमा पर तेल का दान करने से रोग, कष्ट और शारीरिक पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। पौराणिक मान्यता है कि तेल दान करने से शनि दोष और दरिद्रता के प्रभाव कम होते हैं। यह दान विशेष रूप से वृद्ध, रोगी और निर्धन लोगों को करना शुभ फलदायी माना गया है।

गुड़ दान से मधुरता और समृद्धि
गुड़ दान का संबंध जीवन में मिठास और सौहार्द से जोड़ा गया है। पौष पूर्णिमा पर गुड़ दान करने से वाणी में मधुरता आती है और पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह दान आर्थिक संकट को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

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कंबल दान से अक्षय पुण्य
ठंड के मौसम में कंबल दान को सर्वोत्तम दान माना गया है। पौष पूर्णिमा पर कंबल दान करने से सौ यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह दान जीवन में आने वाली विपत्तियों से रक्षा करता है और पुण्यलोक की प्राप्ति का कारण बनता है।

घी दान का आध्यात्मिक महत्व
घी दान को सात्त्विक और श्रेष्ठ दान माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पर घी का दान करने से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है। यह दान मानसिक शुद्धता और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

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