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Bhumihar-Brahmin Name Dispute: Battle Erupts in Bihar Assembly Over 'Bhumihar-Brahmin' Identity
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Bhumihar Brahmin Name Dispute: बिहार विधानसभा में 'भूमिहार-ब्राह्मण' के नाम पर छिड़ी जंग
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Sat, 25 Jul 2026 03:20 AM IST
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बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को अगड़ी जातियों की सूची में 'भूमिहार' और 'भूमिहार-ब्राह्मण' नाम को लेकर ऐसा मुद्दा उठा, जिसने सदन में राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया। भाजपा विधायक जीवेश कुमार ने सरकार से सवाल किया कि जब पुराने सरकारी अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और खतियान में कई स्थानों पर 'भूमिहार-ब्राह्मण' का उल्लेख मिलता है, तो वर्तमान जाति सूची, जाति प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों में केवल 'भूमिहार' ही क्यों लिखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस विसंगति को स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि लोगों के बीच इस विषय को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। विधायक के सवाल के बाद सदन में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच भी इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की वर्तमान आधिकारिक जाति सूची में 'भूमिहार' जाति का ही उल्लेख है। उन्होंने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में 'भूमिहार-ब्राह्मण' लिखने से अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसलिए सरकार निर्धारित सूची के अनुसार ही काम कर रही है। उनके इस जवाब के बाद सदन में राजनीतिक तकरार बढ़ गई और विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी व्याख्या रखी। इस मुद्दे ने देखते ही देखते राजनीतिक रंग ले लिया और जातीय पहचान से जुड़े सवालों पर बहस शुरू हो गई।
इस बीच बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी पूरे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जमीन के पुराने दस्तावेजों और खतियान में जो नाम दर्ज है, उसे बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी खतियान या राजस्व रिकॉर्ड में 'भूमिहार-ब्राह्मण' लिखा हुआ है, तो वह उसी रूप में रहेगा और उसे बदलने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति या समुदाय की जाति में बदलाव संभव नहीं है और इस विषय पर अनावश्यक भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी चर्चा हुई है और सरकार के स्तर पर किसी तरह का भ्रम नहीं है। उनके अनुसार, अलग-अलग समय और दस्तावेजों में भाषा या शब्दों के प्रयोग में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन इससे जातीय पहचान नहीं बदल जाती। उन्होंने कहा कि यदि खतियान में 'भूमिहार-ब्राह्मण' दर्ज है तो वह ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हिस्सा है, जबकि वर्तमान सरकारी जाति सूची अपने निर्धारित प्रारूप के अनुसार संचालित होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस विषय को लेकर किसी तरह की गलतफहमी न पालें, क्योंकि सरकार की ओर से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है। विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर और बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
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