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Explainer: कहां होगा 2030 का फुटबॉल विश्वकप, टीमें बढ़ाने की फीफा की कैसी तैयारी, क्या भारत करेगा क्वालिफाई?
Tue, 21 Jul 2026 12:09 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
इवेंट्स डेस्क, अमर उजाला
इवेंट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 21 Jul 2026 12:09 PM IST
सार
फुटबॉल विश्व कप 2026 का अंत हो चुका है। बीते वर्षों की तरह इस बार भी भारत दुनिया के सबसे बड़े स्पोर्टिंग टूर्नामेंट्स में से एक कहे जाने वाले इस आयोजन से बाहर ही रहा। हालांकि, अब फीफा 2030 में विश्व कप में हिस्सा लेने वाली टीमों की संख्या 48 से बढ़ाकर 64 करने पर विचार कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए अगले विश्व कप में क्वालिफाई करने का क्या मौका है? आइये जानते हैं...
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फीफा विश्व कप 2030।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 का अंत हो चुका है। स्पेन ने फाइनल में अर्जेंटीना को हराकर यह विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। 2026 का यह टूर्नामेंट अपने आप में काफी खास रहा। दरअसल, पहली बार विश्व कप के फॉर्मेट को बदलकर 48 टीमों के लिए बढ़ाया गया। इससे जहां एक तरफ केप वर्दे, कुराकाओ जैसी बेहतरीन टीमों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया तो वहीं कॉन्गो जैसी टीम, जो कि महज दूसरे विश्व कप में उतरी, ने भी अपने खेल से विशेषज्ञों को प्रभावित किया।
अब दुनिया की नजर 2030 के विश्व कप पर है, जो कि पहले फुटबॉल वर्ल्ड कप के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित होगा। फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने अगले विश्व कप में एक बार फिर टूर्नामेंट का प्रारूप बदलने और इसमें टीमों की संख्या बढ़ाकर 64 करने में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, अंतिम फैसला फीफा की बैठक के बाद ही लिए जाएंगे।
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अब दुनिया की नजर 2030 के विश्व कप पर है, जो कि पहले फुटबॉल वर्ल्ड कप के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित होगा। फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने अगले विश्व कप में एक बार फिर टूर्नामेंट का प्रारूप बदलने और इसमें टीमों की संख्या बढ़ाकर 64 करने में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, अंतिम फैसला फीफा की बैठक के बाद ही लिए जाएंगे।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अगला विश्व कप कहां-कहां खेला जाना है? यह कब से कब तक आयोजित होगा? इसमें कितनी टीमें खेल सकती हैं और इसे लेकर क्या प्रस्ताव हैं? 2030 के विश्व कप के लिए कौन सी टीमें पहले से ही क्वालिफाई कर चुकी हैं और बाकी टीमों के क्वालिफिकेशन का क्या रास्ता है? क्या भारत चार साल में इस टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर सकता है और इसके लिए राह क्या होगी? आइये जानते हैं...
2030 का फीफा विश्व कप इतिहास में पहली बार तीन महाद्वीपों और छह देशों में खेला जाएगा। इस विश्व कप की मेजबानी को दो मुख्य भागों में बांटा गया है।
पहले जानें- कहां-कहां खेला जाना है 2030 का फीफा विश्व कप?
2030 का फीफा विश्व कप इतिहास में पहली बार तीन महाद्वीपों और छह देशों में खेला जाएगा। इस विश्व कप की मेजबानी को दो मुख्य भागों में बांटा गया है।
1. शताब्दी समारोह मैच (दक्षिण अमेरिका)
चूंकि पहला विश्व कप 1930 में दक्षिण अमेरिका में खेला गया था, इसलिए इसके 100 साल पूरे होने के मौके में टूर्नामेंट के शुरुआती तीन मैच दक्षिण अमेरिका में खेले जाएंगे।
उरुग्वे: 1930 में पहला विश्व कप उरुग्वे ने ही होस्ट किया था और जीता भी था। इसी की याद में एक विशेष मैच मोंटेवीडियो के ऐतिहासिक एस्तादियो सेंटेनारियो में खेला जाएगा, जिसे 1930 के विश्व कप के लिए ही बनाया गया था।
अर्जेंटीना: 1930 के उद्घाटन विश्व कप में अर्जेंटीना उपविजेता रहा था, इसलिए ब्यूनस आयर्स के एस्तादियो मोनूमेंटल में एक मैच का आयोजन होगा।
पराग्वे: चूंकि 1930 में दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल महासंघ (CONMEBOL) दुनिया का एकमात्र सक्रिय फुटबॉल महासंघ था और उसका मुख्यालय पराग्वे में है, इसलिए असुनसियन के एस्तादियो ओसवाल्डो डोमिंग्वेज डिब्ब में भी एक मैच खेला जाएगा।
शेड्यूल के अनुसार, दक्षिण अमेरिका में ये तीन शुरुआती मैच खेलने के बाद टीमें और पूरा टूर्नामेंट स्थायी रूप से स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को में स्थानांतरित हो जाएगा। यात्रा की थकान को कम करने के लिए टीमों को अतिरिक्त आराम के दिन भी दिए जाएंगे।
अर्जेंटीना: 1930 के उद्घाटन विश्व कप में अर्जेंटीना उपविजेता रहा था, इसलिए ब्यूनस आयर्स के एस्तादियो मोनूमेंटल में एक मैच का आयोजन होगा।
पराग्वे: चूंकि 1930 में दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल महासंघ (CONMEBOL) दुनिया का एकमात्र सक्रिय फुटबॉल महासंघ था और उसका मुख्यालय पराग्वे में है, इसलिए असुनसियन के एस्तादियो ओसवाल्डो डोमिंग्वेज डिब्ब में भी एक मैच खेला जाएगा।
शेड्यूल के अनुसार, दक्षिण अमेरिका में ये तीन शुरुआती मैच खेलने के बाद टीमें और पूरा टूर्नामेंट स्थायी रूप से स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को में स्थानांतरित हो जाएगा। यात्रा की थकान को कम करने के लिए टीमों को अतिरिक्त आराम के दिन भी दिए जाएंगे।
फीफा विश्व कप 2030 का शेड्यूल।
- फोटो : अमर उजाला
2. मुख्य मेजबान देश (यूरोप और अफ्रीका)
टूर्नामेंट के अधिकांश मैच इन तीन देशों में खेले जाएंगे। जहां स्पेन के आठ शहरों में 10 स्टेडियम में विश्व कप के मैच प्रस्तावित हैं, तो वहीं विश्व कप का फाइनल मैच भी स्पेन में ही खेले जाने की उम्मीद है। इसके अलावा पुर्तगाल को दो शहरों के तीन स्टेडियम में और मोरक्को के छह शहरों के छह स्टेडियम को मेजबानी का मौका मिलेगा।
फीफा विश्व कप 2030।
- फोटो : अमर उजाला
2030 के विश्व कप की प्रस्तावित तारीखें क्या हैं?
2030 फीफा विश्व कप 8 जून 2030 से 21 जुलाई 2030 के बीच खेला जाना प्रस्तावित है। यह टूर्नामेंट 44 दिनों तक चलेगा, जो इसे इतिहास का सबसे लंबा विश्व कप बना सकता है।शताब्दी समारोह और शुरुआती मैच: टूर्नामेंट की शुरुआत 8 और 9 जून 2030 को होगी, जब उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे में शताब्दी समारोह और उनके शुरुआती मैच खेले जाएंगे।
आधिकारिक उद्घाटन: मुख्य मेजबान देशों (स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को) में आधिकारिक उद्घाटन समारोह और उनके शुरुआती मैच 13 और 14 जून 2030 को आयोजित किए जाएंगे।
ग्रुप के अन्य मैच: दक्षिण अमेरिका में खेलने वाली टीमों के ग्रुप के अन्य मुकाबले 15 और 16 जून 2030 को होंगे।
फाइनल मैच: विश्व कप का खिताबी मुकाबला 21 जुलाई 2030 को खेला जाएगा।
हालांकि, टीमों को यात्रा और आराम के लिए पर्याप्त समय देने के लिए मैचों के इस विस्तृत कार्यक्रम का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन फीफा की ओर से अंतिम शेड्यूल की पुष्टि बाद में की जाएगी।
2030 में कितनी टीमें खेल सकती हैं, इसे लेकर क्या प्रस्ताव हैं?
1. 48 टीमों की मौजूदा योजना बरकरारशुरुआती योजना के अनुसार, यह उम्मीद है कि 2030 का टूर्नामेंट उसी 48-टीमों वाले प्रारूप का पालन करेगा जिसे 2026 के विश्व कप में पेश किया गया था।
2. या 64 टीमों के नए प्रस्ताव पर विचार
दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल महासंघ ने अप्रैल 2025 में विश्व कप के आकार को 48 से बढ़ाकर 64 टीमों तक करने का एक औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने जुलाई 2026 में कहा था कि 2026 विश्व कप के खत्म होने के बाद इस 64 टीमों वाले प्रस्ताव पर विस्तार से विचार और चर्चा की जाएगी, ताकि दुनिया भर के अधिक देशों को भाग लेने का मौका मिल सके।
ये भी पढ़ें: FIFA: 2030 विश्व कप की विश्वसनीयता पर क्यों मंडरा रहा संकट? यूरोपीय मानवाधिकार संस्था ने फीफा से मांगा जवाब
क्या 64 टीमों वाला फॉर्मेट चुनौतीपूर्ण है?
नया ग्रुप और नॉकआउट फॉर्मेट: 64 टीमें होने पर टूर्नामेंट में चार-चार टीमों के 16 ग्रुप बनाए जाएंगे, और केवल हर ग्रुप की शीर्ष दो टीमें ही नॉकआउट राउंड (राउंड ऑफ 32) में प्रवेश करेंगी। इसका मतलब है कि तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों के क्वालिफाई करने का नियम खत्म हो जाएगा।मैचों की संख्या और टूर्नामेंट की अवधि: टीमों की संख्या बढ़ने से ग्रुप स्टेज के मैच 72 से बढ़कर 96 हो जाएंगे। नतीजतन टूर्नामेंट को पूरा होने में लगभग छह सप्ताह का समय लग सकता है, जिससे लॉजिस्टिक्स और खिलाड़ियों के आराम से जुड़ी चुनौतियां पैदा होंगी।
प्रस्ताव का विरोध: इस प्रस्ताव को कड़ी आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है। आलोचकों और बाईचुंग भूटिया का मानना है कि इतनी ज्यादा टीमों को शामिल करने से टूर्नामेंट की समग्र गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा यूरोपीय फुटबॉल संघ (यूईएफए), एशिया के फुटबॉल संगठन (एएफसी) और अफ्रीकी फुटबॉल संघ (कॉनकाकैफ) के अध्यक्षों ने इस विचार का कड़ा विरोध करते हुए इसे एक बुरा विचार बताया है।
2030 के विश्व कप के लिए कौन सी टीमें पहले ही क्वालिफाई?
2030 फीफा विश्व कप के लिए कुल छह टीमें पहले ही क्वालिफाई कर चुकी हैं। इन सभी टीमों को टूर्नामेंट की मुख्य मेजबानी और शताब्दी समारोह का हिस्सा होने की वजह से सीधे क्वालिफिकेशन मिला है।
फीफा विश्व कप 2030।
- फोटो : अमर उजाला
बाकी टीमों के क्वालिफिकेशन का क्या रास्ता है?
बाकी बची 42 टीमों का फैसला आने वाले वर्षों में फीफा के महाद्वीपीय क्वालिफाइंग टूर्नामेंट के जरिए किया जाएगा। 2030 विश्व कप के लिए मैचों को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के मकसद से यूईएफए और कॉनकाकैफ ने क्वालिफिकेशन के लिए नए प्रारूप पेश किए हैं।1. यूरोप में यूईएफए का नया टू-टियर सिस्टम
टॉप डिवीजन: 2028-29 नेशंस लीग रैंकिंग के आधार पर शीर्ष 36 यूरोपीय देशों को इस डिवीजन में रखा जाएगा और उन्हें समूहों में बांटा जाएगा, जहां वे हर टीम के बजाय केवल चुनिंदा विरोधियों का सामना करेंगे। इनमें से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीमें सीधे क्वालिफाई करेंगी, जबकि बाकी बचे स्थानों का फैसला प्लेऑफ के जरिए होगा।सेकेंड डिवीजन: यूरोप के निचली रैंक वाले देश इस दूसरे डिवीजन में खेलेंगे। यहां से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीमों को उन टीमों के साथ प्लेऑफ खेलने का मौका मिलेगा जो सीधे क्वालिफिकेशन से चूक गई थीं।
2. कॉनकाकैफ का तीन-राउंड वाला फॉर्मेट
- उत्तरी, मध्य अमेरिका और कैरिबियन देशों के महासंघ के इस नए सिस्टम में एक शुरुआती प्लेऑफ चरण होगा, जिसके बाद टीमें इस क्षेत्र के शीर्ष रैंक वाले देशों के साथ ग्रुप स्टेज में प्रवेश करेंगी।
- क्वालिफिकेशन के अंतिम चरण में 12 टीमें विश्व कप में जगह बनाने के लिए भिड़ेंगी। इस चरण में ग्रुप विजेताओं को सीधे क्वालिफिकेशन मिलेगा और बाकी बचे स्थानों के लिए अन्य टीमें प्लेऑफ खेलेंगी।
क्या भारत के लिए 2030 विश्व कप में खेलने का मौका?
विश्लेषकों और पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि 2030 विश्व कप में भारत के खेलने की संभावना मुख्य रूप से टूर्नामेंट के संभावित विस्तार और भारतीय फुटबॉल के बुनियादी ढांचे में सुधार पर निर्भर करती है। भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाईचुंग भूटिया के अनुसार, अगर फीफा इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो भारत के लिए विश्व कप में क्वालिफाई करने की संभावनाएं काफी बेहतर हो सकती हैं।हालांकि, भूटिया का मानना है कि सिर्फ टीमों की संख्या बढ़ने से भारत की जगह पक्की नहीं हो जाती। वर्तमान में भारत के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं...
- 2026 में भारत की फीफा रैंकिंग गिरकर 139 हो गई है। 2026 विश्व कप के लिए भारत एएफसी क्वालिफायर्स के दूसरे दौर में ही हारकर बाहर हो गया था।
- अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को कई प्रशासनिक विवादों का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, भारतीय पेशेवर खिलाड़ी एक सीजन में विदेशी खिलाड़ियों, जो लगभग 50 मैच खेलते हैं की तुलना में बहुत कम, लगभग 30 प्रतिस्पर्धी मैच ही खेलते हैं।
- राष्ट्रीय टीम के कोच खालिद जमील ने एक मीडिया समूह को बताया है कि क्लब्स की ओर से खिलाड़ियों को समय पर राष्ट्रीय ड्यूटी के लिए न छोड़ना एक बड़ी समस्या है, जिससे एक स्थिर टीम बनाने और प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है।
फीफा विश्व कप 2030।
- फोटो : अमर उजाला
क्या हो सकता है आगे का रास्ता?
बाईचुंग भूटिया का सुझाव है कि भारत को सीधे सीनियर विश्व कप का सपना देखने के बजाय पहले अंडर-17 और अंडर-20 विश्व कप के लिए नियमित रूप से क्वालिफाई करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जैसा कि मोरक्को और उज्बेकिस्तान जैसे देश कर रहे हैं।पूर्व एआईएफएफ अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा था कि उनका लक्ष्य 2030 तक विश्व कप के लिए क्वालिफाई करना था। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युवा विकास, साल भर चलने वाली स्काउटिंग, खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने और एक स्थिर घरेलू प्रतियोगिता कैलेंडर जैसी बुनियादी कमियों को जड़ से दूर नहीं किया जाता, तब तक भारत के लिए यह ऐतिहासिक मौका हासिल करना बेहद मुश्किल होगा।