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नेपाल आपदा: सात दिन से अपनों का इंतजार, जिंदा होने की आस टूटी; त्रिशूली मठ में परिजन कर रहे अंतिम प्रार्थना

Thu, 03 Sep 2026 01:06 PM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 03 Sep 2026 01:06 PM IST
सार

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सात दिन से लापता अपनों की तलाश के बीच त्रिशूली मठ में परिजन भावुक होकर प्रार्थना और अंतिम अनुष्ठान कर रहे हैं। अब तक 1,252 शव मिले और करीब 4800 लोग लापता हैं। आखिर इन परिवारों पर क्या बीत रही है? आइए, विस्तार से जानते हैं...

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Nepal Flash Floods: Families Perform Last Rites for Missing Loved Ones at Trishuli Monastery
सात दिन से अपनों का इंतजार - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद त्रिशूली मठ में गुरुवार को भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। सात दिन से लापता अपनों की कोई खबर नहीं मिलने पर परिवार और स्थानीय लोग उनकी सलामती की उम्मीद के साथ प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं, कुछ परिवारों ने अपने लापता परिजनों की आत्मा की शांति के लिए अंतिम धार्मिक अनुष्ठान भी शुरू कर दिए हैं। मठ में बड़ी संख्या में लोग उन लोगों के लिए प्रार्थना करने पहुंच रहे हैं, जिन्हें बाढ़ अपने साथ बहा ले गई। परिजनों के पास यह पुष्टि नहीं है कि उनके प्रियजन जीवित हैं या नहीं, लेकिन सात दिन से कोई संपर्क नहीं होने के कारण वे अब उनकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।

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सात दिन से नहीं मिला कोई सुराग

रसुवा के रहने वाले तिशुंग घाले ने बताया कि उनके इलाके में कई लोग घरों समेत बाढ़ में बह गए और एक सप्ताह बीतने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल सका है। उनके परिवार के कई सदस्य भी लापता हैं। घाले ने बताया कि वह अपने लापता रिश्तेदारों के लिए मठ में प्रार्थना कर रहे हैं। उनके मुताबिक, लगातार सात दिनों से संपर्क नहीं होने के कारण उन्हें आशंका है कि शायद वे अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके प्रियजनों की मौत हो चुकी है तो उनके नाम पर की गई प्रार्थना से उनकी आत्मा को शांति मिल सकती है।

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एक परिवार के नहीं, कई परिवारों के लोग लापता

घाले ने बताया कि उनका अपना परिवार सुरक्षित है, लेकिन कई रिश्तेदार बाढ़ की चपेट में आ गए। उन्होंने कहा कि जिस इलाके में वे ठहरे हुए थे, वहां से करीब 42 लोगों के बह जाने की जानकारी है। उनके मुताबिक, उनके क्षेत्र में 400 से अधिक लोग लापता या प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन, छोटी बहन और उसका पूरा परिवार बाढ़ में बह गया। बड़ी बहन की एक बेटी, अन्य रिश्तेदार और उनकी बुजुर्ग मौसी भी लापता हैं। घाले ने कहा कि परिवार दर परिवार लोगों के गायब होने का सिलसिला सामने आया और उनके जानने वाले करीब 42 लोग इस आपदा में बिछड़ गए।

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बौद्ध परंपरा के अनुसार मठ में हो रही प्रार्थना

स्थानीय निवासी बोम बहादुर तामांग ने बताया कि चीन की ओर से अचानक आए पानी ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए स्थानीय लोग मठ में प्रार्थना कर रहे हैं। तामांग के मुताबिक, मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना बौद्ध धर्म की परंपरा का हिस्सा है। इसी परंपरा के तहत लोग मठ में एकत्र होकर अपने लापता और मृत माने जा रहे परिजनों के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।

मृतकों की संख्या 1,252 पहुंची, 4,875 लोग अब भी लापता

नेपाल में प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद होने के साथ ही बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है। वहीं, हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 355 शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 218 और नवलपरासी वेस्ट से 208 शव मिले हैं। नवलपरासी वेस्ट के आंकड़े में भारत से बरामद कर सौंपे गए 18 शव भी शामिल हैं। इसके अलावा नुवाकोट से 177, रासुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनाहुन से 38 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल गुरुवार को हादसे के नौवें दिन भी प्रभावित इलाकों में तलाशी और राहत अभियान चला रहे हैं। पुलिस के अनुसार, अभी 4,875 लोगों के लापता होने का अनुमान है।

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