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नेपाल में बाढ़ से तबाही: ये इलाका तीर्थयात्रियों और ट्रेकर्स का था ठिकाना, पर्यटकों के लिए यही मौसम क्यों खास?
Thu, 27 Aug 2026 09:10 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Thu, 27 Aug 2026 09:10 PM IST
सार
नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने उस हिमालयी इलाके में भारी तबाही मचाई है, जहां इस समय हजारों तीर्थयात्री, ट्रेकर और व्यापारी पहुंचते हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा ने भी यात्रियों की संख्या बढ़ाई। लेकिन सवाल है कि अगस्त में नेपाल का यह इलाका इतना खास क्यों होता है। कौन से धार्मिक स्थल और ट्रेकिंग रूट लोगों को यहां खींचते हैं और लापता लोगों का आंकड़ा जुटाना इतना मुश्किल क्यों है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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नेपाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
नेपाल-तिब्बत की पहाड़ी सीमा करीब 1400 किलोमीटर लंबी है। इसका करीब 100 किलोमीटर हिस्सा इस मौसम में खास तौर पर व्यस्त रहता है। यहां कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए जाने वाले तीर्थयात्री, ट्रेकिंग करने वाले पर्यटक और कारोबारी पहुंचते हैं। बुधवार सुबह आई बाढ़ ने इसी क्षेत्र में सबसे ज्यादा तबाही मचाई। इसके कारण करीब 40 किलोमीटर लंबी सीमा सड़क, एक सीमा चौकी और कई बस्तियां बह गईं तथा करीब 100 किलोमीटर तक नीचे के इलाकों में भी असर पड़ा।
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इस मौसम में नेपाल के इस इलाके में इतनी भीड़ क्यों जुटती?
इस समय कैलाश मानसरोवर यात्रा के अलावा रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा जैसे त्योहार भी हैं। इन मौकों पर श्रद्धालु ऊंचाई वाले धार्मिक स्थलों और झीलों में स्नान के लिए जाते हैं। नेपाल के पूर्व वन एवं पर्यावरण मंत्री माधव प्रसाद चौलागाईं के अनुसार, इन त्योहारों के कारण इस इलाके में यात्रियों की संख्या सामान्य से ज्यादा हो सकती है। उन्होंने बताया कि कई लोग भारतीय सीमा से होकर भी इन धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं।
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