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इंसानी व्यवहार पर नया खुलासा: बॉस की नजरों से नजर मिलाकर बात करने वाले ज्यादा भरोसेमंद, रिपोर्ट में और क्या?
Mon, 28 Sep 2026 05:41 AM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Mon, 28 Sep 2026 05:41 AM IST
सार
नए शोध में बताया गया है कि ऑफिस में बॉस या सीनियर्स से बातचीत के दौरान आंखों का संपर्क कर्मचारी की छवि को प्रभावित कर सकता है। शोध के मुताबिक, जिम्मेदार और काम के प्रति समर्पित लोग अधिक सीधे आई-कॉन्टैक्ट करते हैं, जबकि रचनात्मक सोच वाले लोग बातचीत के दौरान अपेक्षाकृत कम आई-कॉन्टैक्ट करते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
आप जब अपने बॉस या सीनियर्स से बात करते हैं, तो सीधे उनकी आंखों में देखते हैं? या फिर बात करते वक्त आपकी नजरें इधर-उधर भटकने लगती हैं? अगर आप अपने बॉस से सीधे आंखें मिलाकर बात करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप न केवल आत्मविश्वासी हैं, बल्कि अपने काम के प्रति बेहद गंभीर, ईमानदार और जिम्मेदार भी हैं। यह बात हाल ही में मनोविज्ञान व इंसानी व्यवहार पर एक नए शोध में सामने आई है।
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बॉस से नजरें मिलाकर कर्मचारी भी दिखाते हैं अपनी छवि
शोधकर्ताओं के मुताबिक, दफ्तर में जब बॉस या लीडर किसी से बात करते हैं तो अपनी नजरों से दबदबा और लीडरशिप क्वालिटी दिखाते हैं। लेकिन यह नया शोध इस पर केंद्रित था कि टीम के बाकी सदस्य या कर्मचारी ऐसे में क्या करते हैं। अध्ययन के मुख्य लेखक साइमन लीगल और उनकी टीम का मानना था कि जो लोग स्वभाव से जिम्मेदार होते हैं, वो अपनी बात में वजन डालने के लिए सीधे अपने बॉस की आंखों में देखते हैं। जर्नल ऑफ एप्लाइड सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में आंखों की गतिविधियों को ट्रैक करने वाली तकनीक का इस्तेमाल करके यह समझने की कोशिश की गई कि दफ्तरों में लोग नजरों के जरिये अपनी छवि कैसे बनाते हैं। शोध बताता है कि हमारी आंखें बिना कुछ बोले अपनी बात कहने का सबसे बड़ा और ताकतवर जरिया होती हैं।
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रचनात्मक लोगों की बातचीत का अलग होता है अंदाज
शोध के दौरान एक दिलचस्प बात सामने आई कि जिन लोगों में नई चीजें सोचने-समझने का गुण अधिक होता है, वो बोलते समय थोड़ा कम आई-कॉन्टैक्ट बना रहे थे। यानी रचनात्मक सोच वाले अक्सर थोड़ा इधर-उधर देखकर बोलते हैं।
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जिम्मेदार लोगों ने नजरों को बनाया एक टूल
स्वभाव से अधिक जिम्मेदार लोगों ने अपनी नजरों को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया ताकि बॉस उनकी बात को गंभीरता से ले।
आंखों ने बनाई ईमानदार और भरोसेमंद छवि
विश्लेषकों ने पाया कि मेहनती, भरोसेमंद और काम के प्रति समर्पित लोगों ने भले ही जुबान से कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आंखों ने सामने वाले के दिमाग में ईमानदार की छवि बना दी।
स्मार्ट आई-ट्रैकिंग चश्मे से रिकॉर्ड की गई नजरों की हर गतिविधि
वैज्ञानिकों ने प्रतिभागी यूनिवर्सिटी छात्रों को स्मार्ट आई-ट्रैकिंग चश्मा पहनाया, जो यह रिकॉर्ड कर सकता था कि किस व्यक्ति ने किस सेकंड में किसे और कहां देखा। फिर प्रतिभागियों को एक मीटिंग रूम में भेजा गया, जहां नकली ऑफिस मीटिंग का माहौल बनाया गया।
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नकली ऑफिस मीटिंग में हुई काम और वेतन पर बातचीत
इसमें तीन लोग पहले से बैठे थे, जो असल में रिसर्च टीम के सदस्य थे। इनमें एक को लीडर और बाकी दो को कर्मचारी बताया गया। कमरे में पहुंचे प्रतिभागियों को इन सदस्यों के साथ कंपनी के काम, छुट्टी, वेतन आदि को लेकर मोलभाव करना था। इस पूरी चर्चा का रिकॉर्ड किया गया।