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कार्बन पर बदले बोल: अब गोयल ने कहा- पर्यावरण बचाने में यूरोप आगे, बिगाड़ने में सब जिम्मेदार नहीं
सार
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पर्यावरण के मुद्दे पर यूरोपीय देशों का जिक्र किया। उन्होंने विकसित देशों पर तंज कसते हुए पेरिस समझौते का जिक्र किया और कहा, 11 साल बाद भी एक पाई नहीं दिखी है। बकौल गोयल, भारत ने अपने लक्ष्य समय से पहले पार किए हैं और यूरोप इसकी कद्र करता है।
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कार्बन और पर्यावरण के मुद्दे पर क्या बोले पीयूष गोयल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
जलवायु बिगाड़ने का जिम्मेदार कौन है, ओजोन परत को किसने नुकसान पहुंचाया और आसमान में इतना कार्बन किसने भेजा? बर्लिन ग्लोबल डायलॉग के मंच से बृहस्पतिवार को यह तीखा सवाल उछालने वाले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल शुक्रवार को यूरोप का शुक्रिया अदा करते दिखे।
दौरे के समापन पर उन्होंने कहा कि कल जो कहा वह तथ्य था, पर यह भी सच है कि पर्यावरण के मामले में यूरोप बहुत से देशों से आगे है और भारत के साथ उसकी साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। सवाल की धार और शुक्रिया की मिठास, बर्लिन में भारत की कूटनीति के दोनों रंग एक साथ दिखे।
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दौरे के समापन पर उन्होंने कहा कि कल जो कहा वह तथ्य था, पर यह भी सच है कि पर्यावरण के मामले में यूरोप बहुत से देशों से आगे है और भारत के साथ उसकी साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। सवाल की धार और शुक्रिया की मिठास, बर्लिन में भारत की कूटनीति के दोनों रंग एक साथ दिखे।
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माफ कीजिए...सब जिम्मेदार नहीं
बृहस्पतिवार की चर्चा में जब गोयल ने पूछा कि कार्बन किसने भेजा, तो साथ बैठे एक वक्ता ने कहा, हम सभी ने। गोयल ने तुरंत टोका, नहीं, माफ कीजिए। उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया की 17 फीसदी आबादी वाला भारत वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में तीन फीसदी से भी कम हिस्सेदार है। उन्होंने कहा कि 2015 के पेरिस समझौते में तय हुआ था कि दशकों तक जलवायु बिगाड़कर फल चखने वाले विकसित देश ज्यादा कीमत चुकाएंगे और विकासशील देशों की मदद करेंगे, पर 11 साल बाद भी एक पाई नहीं दिखी, सब वादे ही वादे हैं। गोयल ने कहा कि यूरोप ने सस्ती ऊर्जा के लिए दिन-रात कोयला जलाया, अपने विकास के लिए यह उनकी मजबूरी रही होगी, पर समस्या वहीं से शुरू हुई। शुक्रवार को सुर संतुलित था। गोयल ने कहा कि पेरिस समझौते के बाद भारत ने अपने लक्ष्य समय से पहले पार किए हैं और यूरोप इसकी कद्र करता है।
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