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ट्रंप को झटका: हश मनी केस की सजा खत्म कराने की कोशिश नाकाम, याचिका खारिज कर जज ने क्या कहा?

Fri, 28 Aug 2026 11:41 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 28 Aug 2026 11:41 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। हश मनी मामले में मिली सजा को खत्म कराने की उनकी कोशिश नाकाम हो गई है। जज ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है। अब क्या ट्रंप फिर इस फैसले को संघीय अदालत में चुनौती देंगे? पढ़िए रिपोर्ट

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President Donald Trump loses again in bid to erase his hush money conviction
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर झटका लगा है। वह अपनी हश मनी यानी चुप रहने के लिए पैसे देने से जुड़े मामले में मिली सजा खत्म कराना चाहते थे। लेकिन उनकी कोशिश नाकाम हो गई। शुक्रवार को एक संघीय जज ने ट्रंप की याचिका खारिज कर दी। ट्रंप चाहते थे कि न्यूयॉर्क की राज्य अदालत में चले इस मामले को संघीय अदालत में भेज दिया जाए। इसके बाद मामले को राष्ट्रपति की कानूनी छूट के आधार पर खत्म कर दिया जाए।
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जज ने क्या कहा?
  • जज एल्विन के. हेलरस्टीन ने ट्रंप की याचिका खारिज करने का अपना पहले का फैसला बरकरार रखा।
  • उन्होंने कहा कि ट्रंप ने मामला संघीय अदालत में भेजने के लिए जो नए कारण बताए हैं, वे न तो नए हैं और न ही कानून के हिसाब से पर्याप्त हैं।
  • उन्होंने कहा कि ट्रंप यह भी नहीं बता पाए कि उन्होंने मामला संघीय अदालत में भेजने में इतनी देर क्यों की। वह यह भी साबित नहीं कर पाए कि उन्होंने इस मामले में समय पर और पूरी गंभीरता से कार्रवाई की।
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तीसरी बार कोशिश नाकाम
यह तीसरी बार है, जब हेलरस्टीन ने ट्रंप की कोशिश रोकी है। ट्रंप चाहते थे कि मैनहट्टन की अमेरिकी जिला अदालत इस मामले को न्यूयॉर्क की अदालत से अपने हाथ में ले ले। इसी न्यूयॉर्क अदालत में ट्रंप पर मुकदमा चला था। वहीं उन्हें दोषी भी ठहराया गया था।
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ट्रंप को मई 2024 में दोषी ठहराया गया था। उस समय वह राष्ट्रपति पद पर नहीं थे। वह अपने पहले और दूसरे कार्यकाल के बीच थे। इस फैसले के साथ ट्रंप ऐसे पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए, जिन्हें किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। अब ट्रंप फिर से राष्ट्रपति हैं। वह अपनी दोषसिद्धि को राज्य की अपीलीय अदालत में भी चुनौती दे रहे हैं। उनकी यह अपील अभी लंबित है।

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अपीलीय अदालत के आदेश के बाद फैसला
हेलरस्टीन का यह फैसला एक संघीय अपीलीय अदालत के आदेश के बाद आया है। पिछले साल उस अदालत ने हेलरस्टीन से कहा था कि वह ट्रंप की याचिका को खारिज करने वाले अपने पहले फैसले पर पुनर्विचार करें।

फरवरी में हुई अदालत की सुनवाई के दौरान ही जज ने अपने फैसले का संकेत दे दिया था। उन्होंने ट्रंप के वकीलों के कानूनी प्रयासों की आलोचना की थी। जज ने कहा था कि उनकी इन कोशिशों का मतलब ऐसा था जैसे एक ही मामले में दो बार फायदा लेने की कोशिश करना। दोनों पक्षों के वकीलों ने टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
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