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एक्सप्लेनर: ट्रंप की अल्टीमेट पावर यानी वीटो क्या है, कैसे राष्ट्रपति कांग्रेस के फैसलों पर लगा सकते हैं रोक?
Thu, 05 Nov 2026 05:25 AM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 05 Nov 2026 05:25 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एजेंडे को बचाने के लिए राष्ट्रपति की वीटो शक्ति का इस्तेमाल करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि डेमोक्रेट्स की ओर से पारित हर विधेयक को वीटो कर सकते हैं।
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ट्रंप ने शेयर किया पोस्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे अपने एजेंडे को बचाने के लिए राष्ट्रपति की वीटो शक्ति का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने इसे अपनी 'अल्टीमेट पावर' बताया है। ट्रंप ने कहा कि वह डेमोक्रेट्स द्वारा पारित हर विधेयक को खारिज (वीटो) कर देंगे। उन्होंने कुछ मीडिया इंटरव्यू में अपनी दबाव बनाने की रणनीति का भी खुलासा किया है। ट्रंप ने कहा, 'ऐतिहासिक रूप से, आप दो महीने तक वीटो करते हैं और फिर वे आकर कहते हैं कि 'हमें डील कर लेना चाहिए।'
अमेरिकी संविधान में कैसे काम करती है वीटो शक्ति?
अमेरिकी संविधान के तहत प्रतिनिधि सभा और सीनेट से पारित किसी भी विधेयक को कानून बनने से पहले राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति विधेयक पर हस्ताक्षर करके उसे कानून बना सकते हैं। इसके अलावा, वे वीटो का इस्तेमाल करके विधेयक को आपत्तियों के साथ कांग्रेस में वापस भेज सकते हैं। यदि राष्ट्रपति 10 दिनों के भीतर (रविवार को छोड़कर) विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करते और कांग्रेस का सत्र जारी रहता है, तो वह अपने आप कानून बन जाता है।
क्या कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है?
हां, अमेरिकी कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को ओवरराइड करके संबंधित विधेयक को कानून बना सकती है। हालांकि, इसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से विधेयक को दोबारा पारित करना जरूरी है।
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वीटो पलटने के लिए कितने वोट जरूरी?
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के वीटो को पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इसके तहत प्रतिनिधि सभा में 435 सदस्यों में से 290 और सीनेट में 100 सदस्यों में से 67 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। यह संख्या तब लागू होती है, जब सभी सीटें भरी हों और सभी सदस्य मतदान करें। अनुपस्थित सदस्यों की स्थिति में आवश्यक वोटों की संख्या बदल सकती है।
ये भी पढ़ें: 'ईरान युद्ध के कारण हारे मध्यावधि चुनाव': ट्रंप ने भी माना वजह, कहा- आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई; और क्या बोले?
विपक्षी कांग्रेस के बावजूद ट्रंप की कार्यशैली रह सकती है निरंकुश
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि बड़ी हार के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या राष्ट्रपति अपनी सरकार चलाने का तरीका बदलेंगे या टकराव और उथल-पुथल को ही अपनी कार्यशैली बनाए रखेंगे। विपक्ष के नियंत्रण वाली कांग्रेस के पास सरकारी खर्च पर नियंत्रण की ताकत होती है। अमेरिका में संघीय सरकार का खर्च कांग्रेस तय करती है। हालांकि, विदेश नीति और व्यापार के मामलों में राष्ट्रपति के पास कहीं अधिक एकतरफा अधिकार हैं। ऐसे में कांग्रेस के विरोध के बावजूद ट्रंप की मौजूदा कार्यशैली और उनके फैसलों का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
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अमेरिकी संविधान में कैसे काम करती है वीटो शक्ति?
अमेरिकी संविधान के तहत प्रतिनिधि सभा और सीनेट से पारित किसी भी विधेयक को कानून बनने से पहले राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति विधेयक पर हस्ताक्षर करके उसे कानून बना सकते हैं। इसके अलावा, वे वीटो का इस्तेमाल करके विधेयक को आपत्तियों के साथ कांग्रेस में वापस भेज सकते हैं। यदि राष्ट्रपति 10 दिनों के भीतर (रविवार को छोड़कर) विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं करते और कांग्रेस का सत्र जारी रहता है, तो वह अपने आप कानून बन जाता है।
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क्या कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है?
हां, अमेरिकी कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को ओवरराइड करके संबंधित विधेयक को कानून बना सकती है। हालांकि, इसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से विधेयक को दोबारा पारित करना जरूरी है।
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वीटो पलटने के लिए कितने वोट जरूरी?
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के वीटो को पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इसके तहत प्रतिनिधि सभा में 435 सदस्यों में से 290 और सीनेट में 100 सदस्यों में से 67 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। यह संख्या तब लागू होती है, जब सभी सीटें भरी हों और सभी सदस्य मतदान करें। अनुपस्थित सदस्यों की स्थिति में आवश्यक वोटों की संख्या बदल सकती है।
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विपक्षी कांग्रेस के बावजूद ट्रंप की कार्यशैली रह सकती है निरंकुश
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि बड़ी हार के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या राष्ट्रपति अपनी सरकार चलाने का तरीका बदलेंगे या टकराव और उथल-पुथल को ही अपनी कार्यशैली बनाए रखेंगे। विपक्ष के नियंत्रण वाली कांग्रेस के पास सरकारी खर्च पर नियंत्रण की ताकत होती है। अमेरिका में संघीय सरकार का खर्च कांग्रेस तय करती है। हालांकि, विदेश नीति और व्यापार के मामलों में राष्ट्रपति के पास कहीं अधिक एकतरफा अधिकार हैं। ऐसे में कांग्रेस के विरोध के बावजूद ट्रंप की मौजूदा कार्यशैली और उनके फैसलों का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।