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कौन हैं अहमद वहीदी?: ईरान-अमेरिका वार्ता में उभरा नया ताकतवर चेहरा, ट्रंप के लिए क्यों बन सकते हैं परेशानी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Thu, 21 May 2026 02:49 PM IST
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सार

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईरान के जनरल अहमद वहीदी का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड प्रमुख वहीदी अब सैन्य रणनीति और अमेरिका के साथ वार्ता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन पर कई बड़े हमलों और 2022 के विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई से जुड़े आरोप लग चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सख्त नीति के पीछे अब वहीदी सबसे ताकतवर चेहरों में शामिल हैं।

Who is Ahmad Vahidi?: A powerful new figure emerges at Iran-US talks
जनरल अहमद वाहिदी से परेशान है अमेरिका - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

अमेरिका के साथ जारी युद्धविराम और परमाणु वार्ता के बीच ईरान में एक कट्टरपंथी सैन्य चेहरे का प्रभाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी अब अमेरिका के साथ संभावित समझौते और युद्ध खत्म करने को लेकर रणनीति तय करने वाले सबसे अहम नेताओं में शामिल माने जा रहे हैं।

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वहीदी की क्या है खासियत?

रिपोर्ट के मुताबिक, वहीदी उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जो ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सीधे संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि फरवरी में इस्राइली हमलों में घायल होने के बाद खामेनेई सार्वजनिक जीवन से दूर हैं। ऐसे में ईरान की सत्ता के भीतर प्रभाव और नियंत्रण को लेकर खींचतान तेज हो गई है।

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अहमद वहीदी लंबे समय से ईरान की सुरक्षा और सैन्य रणनीति का अहम चेहरा रहे हैं। युद्ध शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले तक वह सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए थे। हालांकि गुरुवार को ईरानी अखबारों में उनकी तस्वीरें सामने आईं, जिनमें वह तेहरान में पाकिस्तान के गृह मंत्री से मुलाकात करते दिखे। बताया गया कि पाकिस्तान की ओर से अमेरिका के साथ वार्ता को लेकर संदेश पहुंचाया गया था।

वहीदी पर है कई आतंकी हमलों का आरोप

वहीदी पर वर्षों से कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। उन पर 1994 में अर्जेंटीना के यहूदी सामुदायिक केंद्र पर हुए बम धमाके में भूमिका निभाने का आरोप है, जिसमें 85 लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके अलावा 1996 में सऊदी अरब के खोबर टावर्स पर हुए हमले में भी उनका नाम जोड़ा गया, जिसमें 19 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। हालांकि ईरान ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।

वहीदी को इस युद्ध में सौंपी गई रिवोल्यूशनरी गार्ड की कमान 

इस साल युद्ध के शुरुआती दौर में अपने पूर्ववर्ती की मौत के बाद वहीदी को रिवोल्यूशनरी गार्ड की कमान सौंपी गई थी। अब वह ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य ताकत का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसके पास बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा और फारस की खाड़ी में सक्रिय नौसैनिक क्षमता है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बनाने और वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित करने की रणनीति में वहीदी की अहम भूमिका है।

अमेरिका के साथ वार्ता में वहीदी की क्या भूमिका?

वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर का कहना है कि वहीदी और उनके करीबी लोगों ने न सिर्फ युद्ध से जुड़ी सैन्य रणनीति बल्कि अमेरिका के साथ वार्ता की नीति पर भी नियंत्रण मजबूत कर लिया है। ईरान अब भी अमेरिका की उस मांग को मानने से इनकार कर रहा है, जिसमें उससे उच्च स्तर के समृद्ध यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए कहा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वहीदी की सोच बेहद टकराव वाली मानी जाती है। न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक द सूफान ग्रुप के वरिष्ठ फेलो केनेथ कैट्जमैन ने कहा कि वहीदी अंतहीन प्रतिरोध की विचारधारा से आते हैं और उनका मानना है कि अमेरिका को हर मोर्चे पर चुनौती दी जानी चाहिए। जनवरी में वहीदी ने दावा किया था कि ईरान की सैन्य ताकत अब इतनी मजबूत हो चुकी है कि किसी भी दुश्मन के सैन्य हमले के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई थी। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए थे, लेकिन यह वार्ता किसी समझौते के बिना खत्म हो गई। इसके बाद ईरान के कट्टरपंथी गुटों ने आरोप लगाया कि बातचीत में बहुत ज्यादा रियायतें दी जा रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद वहीदी अमेरिका के साथ बातचीत में सबसे अहम संपर्क सूत्र बनकर उभरे। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को लेकर माना जा रहा है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड के बढ़ते प्रभाव के कारण उनकी भूमिका सीमित हो गई है।

कौन है वहीदी?

1958 में ईरान के शिराज शहर में जन्मे अहमद वहीदी का असली नाम अहमद शाहचेराघी था। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वह रिवोल्यूशनरी गार्ड में शामिल हुए और ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने गार्ड की खुफिया इकाई में काम किया और विदेशों में सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभाली।

वहीदी ने बाद में कुद्स फोर्स की कमान भी संभाली, जिसने पश्चिम एशिया में ईरान समर्थित कई उग्रवादी संगठनों और सहयोगी सरकारों का नेटवर्क तैयार किया। 2010 में अमेरिका ने उन पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कथित रूप से सामूहिक विनाश के हथियार विकसित करने में भूमिका के आरोप में प्रतिबंध लगाए थे।

हाल के वर्षों में वहीदी 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई को लेकर भी चर्चा में रहे। उस समय गृह मंत्री रहते हुए उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई की निगरानी की थी। बाद में एक ईरानी अखबार में प्रकाशित दस्तावेज में दावा किया गया कि उनके मंत्रालय ने बिना हिजाब वाली महिलाओं की निगरानी और तस्वीरें लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि वहीदी ने इन आरोपों से इनकार किया था।

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