Kitchen Vastu Tips: रसोई के भाव तय करते हैं भोजन की ऊर्जा, इसलिए पकाते समय रखें मन शांत
वास्तु के अनुसार भोजन बनाते समय साफ-सफाई, मधुर वाणी और सकारात्मक सोच का विशेष महत्व है। रसोई में अनावश्यक विवाद, ऊंची आवाज में झगड़ा या कटु शब्दों का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वास्तु शास्त्र में रसोई को केवल भोजन बनाने का स्थान नहीं, बल्कि पूरे परिवार के स्वास्थ्य और मानसिक ऊर्जा का केंद्र माना गया है। मान्यता है कि जिस भाव और मानसिक स्थिति के साथ भोजन तैयार किया जाता है, उसका प्रभाव उस भोजन को ग्रहण करने वाले सभी लोगों पर पड़ता है। इसलिए भारतीय परंपरा में भोजन बनाते समय क्रोध, तनाव और कटु वाणी से बचने तथा ईश्वर का स्मरण करने की सलाह दी गई है। आधुनिक जीवन में पूरी तरह तनावमुक्त रहना संभव नहीं है, लेकिन कुछ छोटे-छोटे उपाय भोजन की सकारात्मकता को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
भोजन में समाहित हो जाते हैं हमारे भाव
वास्तु और भारतीय परंपरा के अनुसार भोजन केवल शरीर का पोषण नहीं करता, बल्कि मन और विचारों को भी प्रभावित करता है। यदि भोजन बनाते समय व्यक्ति अत्यधिक क्रोधित, दुखी या तनावग्रस्त है, तो उसकी मानसिक अवस्था का सूक्ष्म प्रभाव भोजन पर पड़ता है। यही कारण है कि पहले के समय में रसोई में प्रवेश से पहले हाथ-पैर धोना, मन को शांत करना और ईश्वर का स्मरण करना एक आवश्यक नियम माना जाता था। प्रेम, संतोष और कृतज्ञता के साथ तैयार किया गया भोजन परिवार में अपनापन और सकारात्मकता बढ़ाने वाला माना गया है।
रसोई का पानी सबसे पहले ग्रहण करता है ऊर्जा
वास्तु शास्त्र में रसोईघर में रखे पानी को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि जल अपने आसपास की ऊर्जा और वातावरण को बहुत शीघ्र ग्रहण करता है। यही जल जब भोजन बनाने में उपयोग होता है, तो उसकी ऊर्जा भी भोजन का हिस्सा बन जाती है। इसलिए रसोई में पानी का स्थान हमेशा साफ-सुथरा, व्यवस्थित और शांत वातावरण में होना चाहिए। जल के पात्र को गंदगी, अव्यवस्था या अनावश्यक शोर-शराबे से दूर रखना भी शुभ माना गया है।
तनाव हो तो मंत्र और भजन बन सकते हैं सहारा
आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में हर समय शांत और प्रसन्न रहना आसान नहीं है। ऐसे में यदि भोजन बनाते समय मन अशांत हो, तो कुछ क्षण ईश्वर का स्मरण करें। गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, राम नाम, विष्णु सहस्रनाम या अपने धर्म और आस्था के अनुसार किसी भी मंत्र, प्रार्थना या मधुर भजन को धीमी आवाज में सुनना वातावरण को सकारात्मक बनाने का सरल उपाय माना जाता है। इससे मन धीरे-धीरे शांत होता है और रसोई का वातावरण भी सौम्य बना रहता है।
भोजन के साथ परोसें सकारात्मक ऊर्जा भी
वास्तु के अनुसार भोजन बनाते समय साफ-सफाई, मधुर वाणी और सकारात्मक सोच का विशेष महत्व है। रसोई में अनावश्यक विवाद, ऊंची आवाज में झगड़ा या कटु शब्दों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। भोजन परोसते समय भी मुस्कुराकर और स्नेहपूर्वक परोसने की परंपरा इसी सोच का हिस्सा है। जब भोजन में प्रेम, सम्मान और शुभ भाव जुड़ते हैं, तो वह केवल पेट ही नहीं भरता, बल्कि परिवार के रिश्तों में भी मधुरता और आत्मीयता का संचार करता है।
राहु की अशुभता से हैं परेशान फिर जरूर करें ये मोर पंख से जुड़ा ये उपाय, दूर होंगी परेशानियां
Tulsi Vastu Tips: तुलसी के पौधे के पास भूलकर भी ना रखें ये 5 चीजें, नहीं मिलता पूजा का पूरा फल
Vastu Tips: घर के किस हिस्से में मनी प्लांट लगाना सबसे अच्छा, जानिए वास्तु नियम
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।