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ACMA Report 2026: भारतीय ऑटो सेक्टर की रफ्तार तेज, 6 महीने में 3.56 लाख करोड़ का कारोबार; अब ऐसे लगेगी छलांग

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Wed, 14 Jan 2026 06:35 PM IST
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सार

Automobile Sector Growth: भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग ने वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में शानदार ग्रोथ दर्ज की। एक ओर जहां घरेलू मांग और एक्सपोर्ट में इजाफा हुआ है, वहीं आगामी त्यौहारी सीजन और जीएसटी में संभावित कटौती से दूसरी छमाही (H2) में और भी बड़े धमाके की उम्मीद बढ़ गई है।
 

ACMA Report 2026 Indian auto sector accelerates registers business worth 3.56 lakh crore in 6 months now poise
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार

ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीय ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री के लिए साल 2026 की शुरुआत बेहतरीन रही है। वित्त वर्ष की पहली छमाही में इस सेक्टर का कुल टर्नओवर 3.56 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 6.8 प्रतिशत ज्यादा है। यह दिखाता है कि भारतीय सड़कों पर गाड़ियों की डिमांड लगातार बनी हुई है।

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OEM और आफ्टरमार्केट दोनों में बढ़त

आंकड़े बताते हैं कि गाड़ी बनाने वाली कंपनियों (OEMs) को पुर्जों की बिक्री 7.3 प्रतिशत बढ़कर 3.04 लाख करोड़ रुपये हो गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कुल सप्लाई में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की हिस्सेदारी अब 4.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो भविष्य के ग्रीन इंडिया की ओर इशारा करती है। वहीं, पुराने पुर्जों को बदलने वाला आफ्टरमार्केट भी 9 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ 53,160 करोड़ पर जा पहुंचा है।

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निर्यात बढ़ा, लेकिन व्यापार घाटे ने बढ़ाई चिंता

भारत से ऑटो पार्ट्स का एक्सपोर्ट (निर्यात) 9.3 प्रतिशत बढ़कर 12.1 बिलियन डॉलर हो गया है। अमेरिका और जर्मनी हमारे सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं। हालांकि, इसी दौरान आयात (इम्पोर्ट) में 12.5 प्रतिशत की तेज बढ़त देखी गई, जिससे भारत को 180 मिलियन डॉलर का व्यापार घाटा सहना पड़ा है। चीन और जापान से पुर्जों का आयात बढ़ना इसकी मुख्य वजह रही।

H2 FY26 के लिए बड़ी उम्मीदें 

ACMA के अध्यक्ष विक्रमपति सिंहानिया और अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरी छमाही और भी बेहतर होगी। इसके पीछे ये तीन मुख्य कारण हैं:

GST में कमी: सितंबर के बाद कुछ वाहन श्रेणियों पर जीएसटी घटने की उम्मीद है, जिससे पैसेंजर और टू-व्हीलर की मांग बढ़ेगी।

सरकारी नीतियां: बुनियादी ढांचे के काम और सरकार के नीतिगत फैसलों से डिमांड को सपोर्ट मिलेगा।

त्यौहारी सीजन: शादी और त्यौहारों का मौसम ऑटो सेक्टर के लिए 'बूस्टर डोज' का काम करेगा।

ग्रोथ के बावजूद, उद्योग जगत भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों को लेकर सतर्क है। विशेष रूप से दुर्लभ-पृथ्वी मैग्नेट जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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