Union Budget: केंद्रीय बजट 2026-27, ऑटो सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर को कितनी उम्मीदें?
Union Budget 2026: बजट 2026-27 भारत के लिए एक निर्णायक अवसर बनकर उभर सकता है, जहां सरकार के फैसले अगले दशक की आर्थिक दिशा तय करेंगे। लेख में बताया गया है कि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में 15-18% की बढ़ोतरी से न सिर्फ बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा हो सकते हैं, बल्कि ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में मांग को भी मजबूती मिलेगी।
विस्तार
जैसे-जैसे बजट 2026-27 करीब आ रहा है, उम्मीद की जा रही है कि सरकार देश की तरक्की के लिए कुछ बड़े और ठोस फैसले लेगी। पिछले दस वर्षों में हमने देखा है कि सही विजन और मेहनत से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। आज जब दुनिया भर के हालात काफी चुनौतीपूर्ण हैं, तब यह बजट पुरानी सफलताओं को दोहराने और नई समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने का एक बेहतरीन मौका है।
पूंजीगत व्यय और रोजगार सृजन
भारत की तरक्की में सरकारी खर्च, जिसे हम 'कैपेक्स' कहते हैं, एक मजबूत पिलर की तरह रहा है। अभी हम अपनी जीडीपी का 3.1% हिस्सा इस पर खर्च कर रहे हैं जो एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन विकास की रफ्तार को और तेज करने के लिए हमें और ज्यादा निवेश करने की जरूरत है। अगर सरकार इस खर्च में 15-18% की बढ़ोतरी करती है, तो इससे न केवल बड़े पैमाने पर नौकरियां मिलेंगी बल्कि बाजार में सामान की मांग भी बढ़ेगी। इस निवेश का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखेगा और ऑटोमोबाइल जैसे बड़े सेक्टरों में भी जबरदस्त उछाल आएगा।
सड़क बुनियादी ढांचे का महत्व
भारत में सड़कों के जाल को बिछाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि 2014 के बाद से हमारा नेशनल हाईवे नेटवर्क करीब 60% बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा हो चुका है। शहरों के बीच बढ़ी इस कनेक्टिविटी ने न केवल लोगों के सफर करने का अंदाज बदला है, बल्कि गाड़ियों की डिमांड को भी काफी बढ़ा दिया है। अब लक्ष्य यह होना चाहिए कि सड़क निर्माण के बजट में पिछले साल के मुकाबले 10-12% की बढ़ोतरी की जाए, ताकि रुकी हुई परियोजनाओं में तेजी आए, माल ढुलाई का खर्च कम हो और सप्लाई चैन पहले से ज्यादा मजबूत बन सके।
व्यापक आर्थिक स्थिरता और व्यापार नीति
रुपये की गिरती कीमत और महंगाई की वजह से कच्चा तेल और बिजली जैसी जरूरी चीजों को बाहर से मंगाना अब महंगा हो गया है, जिससे सामान बनाने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ गया है। ऐसे में हमें एक ऐसे बजट की ज़रूरत है जो देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखे, ताकि कंपनियां बिना डरे निवेश कर सकें और आगे बढ़ सकें। व्यापार के मामले में भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (FTA) एक बहुत बड़ा कदम है, जो दिखाता है कि भारत दुनिया के साथ मिलकर व्यापार करने के लिए तैयार है। इससे ऑटो सेक्टर को लंबे समय के लिए निवेश करने का भरोसा मिलेगा। साथ ही, अगर सरकार टैक्स (सीमा शुल्क) के नियमों को आसान और साफ-सुथरा बनाती है, तो न केवल व्यापार आसान होगा, बल्कि भारतीय ग्राहकों को भी दुनिया की नई टेक्नोलॉजी और गाड़ियां जल्दी मिल सकेंगी। जब हमारा व्यापार करने का तरीका आसान होता है तो 'मेक-इन-इंडिया' को और भी ज्यादा मजबूती मिलती है।
पूंजी बाजार और स्टार्टअप इकोसिस्टम
आज के दौर में स्टार्टअप चलाने वाले उद्यमी भारत की तरक्की की रीढ़ हैं, जो अपने बिजनेस को बड़ा बनाने के लिए शेयर बाजार (पूंजी बाजार) का सहारा लेना चाहते हैं। ऐसे में अगर सरकार 'कैपिटल गेन्स टैक्स' (खासकर लंबे समय के निवेश पर लगने वाले टैक्स) को कम और आसान बनाती है, तो इससे देश और विदेश के निवेशक भारत की ओर और भी ज्यादा आकर्षित होंगे। जब निवेशकों के लिए नियम आसान होंगे, तो बाजार में पैसे की आवाजाही (तरलता) बढ़ेगी, जिससे भारतीय कंपनियों को अपने विस्तार के लिए आसानी से और कम लागत पर पैसा मिल सकेगा।
अगले दस वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था कितनी ऊंचाई पर होगी, यह काफी हद तक आज लिए गए सरकारी फैसलों पर निर्भर करेगा। ऐसे में बजट 2026-27 के पास एक बड़ा मौका है कि वह देश में ऐसी तरक्की की शुरुआत करे जिसमें सबका साथ और सबका विकास शामिल हो। यह बजट सिर्फ सड़कें या बुनियादी ढांचा बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के सपनों को सच करने और उन्हें बेहतर जिंदगी देने का एक मजबूत जरिया है।
