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Car Tips: आपकी सेकेंड हैंड कार पर बैंक का लोन तो नहीं? खरीदने से पहले ऐसे करें चेक हाइपोथिकेशन, लाखों का होगा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:31 AM IST
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सार
Second Hand Car Buying Tips: क्या आप भी सेकेंड हैंड कार खरीदने की तैयारी में हैं, तो सिर्फ कीमत और कंडीशन देखकर डील फाइनल न करें। कई पुरानी कारों पर बैंक का लोन बाकी होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे पता करें कि गाड़ी कर्ज मुक्त है या नहीं? जानिए वो जरूरी जांच, जो आपको लाखों के नुकसान से बचा सकती है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Hypothecation Status Check: नई कार खरीदना हर किसी के बजट में नहीं होता। यही वजह है कि आजकल बड़ी संख्या में लोग सेकेंड हैंड कारों की तरफ रुख कर रहे हैं। पुरानी कार खरीदना पैसे बचाने का अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन अगर दस्तावेजों की सही जांच न की जाए तो यही सौदा बाद में बड़ी परेशानी बन सकता है।
अक्सर खरीदार कार की हालत, माइलेज और कीमत देखकर तुरंत फैसला कर लेते हैं, जबकि सबसे जरूरी चीज उसके कानूनी रिकॉर्ड और लोन स्टेटस की जांच होती है। कई मामलों में गाड़ी पर बैंक का लोन बाकी होता है और नए मालिक को इसकी जानकारी तक नहीं होती।
सिर्फ कार नहीं, उसका लोन स्टेटस भी जांचें
Hypothecation क्या होता है?
हाइपोथिकेशन स्टेशन मिनटों में ऐसे चेक करें ?
ओरिजिनल आरसी की जांच करना न भूलें
बैंक की एनओसी और फॉर्म 35 जरूर मांगें
इंश्योरेंस रिकॉर्ड भी चेक करें
पीयूसी सर्टिफिकेट की वैधता जांचें
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) हर वाहन के लिए अनिवार्य दस्तावेज है। इसकी वैधता समाप्त होने पर वाहन मालिक को जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसलिए डील फाइनल करने से पहले PUC की तारीख जरूर जांच लें।
Ownership Transfer के समय बरतें सावधानी
अक्सर खरीदार कार की हालत, माइलेज और कीमत देखकर तुरंत फैसला कर लेते हैं, जबकि सबसे जरूरी चीज उसके कानूनी रिकॉर्ड और लोन स्टेटस की जांच होती है। कई मामलों में गाड़ी पर बैंक का लोन बाकी होता है और नए मालिक को इसकी जानकारी तक नहीं होती।
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सिर्फ कार नहीं, उसका लोन स्टेटस भी जांचें
- सेकेंड हैंड कार खरीदते समय सबसे बड़ा जोखिम हाइपोथिकेशन का होता है। इसका मतलब है कि वाहन अभी भी बैंक या फाइनेंस कंपनी के लोन के तहत दर्ज है।
- अगर कार पर लोन बाकी है और आपने बिना जांच किए वाहन खरीद लिया, तो बाद में बैंक उस वाहन पर अपना अधिकार जता सकता है। कुछ मामलों में वाहन जब्त होने या पुराने कर्ज से जुड़ी कानूनी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं।
Hypothecation क्या होता है?
- जब कोई व्यक्ति कार लोन लेकर वाहन खरीदता है, तो बैंक का नाम वाहन की आरसी यानी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में दर्ज किया जाता है। इसे ही हाइपोथिकेशन कहा जाता है।
- लोन पूरा चुकाने के बाद बैंक एनओसी (No Objection Certificate) जारी करता है, जिसके आधार पर आरसी से बैंक का नाम हटाया जाता है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक रिकॉर्ड में वाहन फाइनेंस्ड माना जा सकता है।
हाइपोथिकेशन स्टेशन मिनटों में ऐसे चेक करें ?
- किसी भी पुरानी कार की खरीदारी से पहले उसकी आरसी की जांच करें। अगर उस पर हाइपोथिकेशन टू के साथ किसी बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम लिखा है, तो सावधान हो जाएं।
- इसके अलावा आप सरकारी परिवहन सेवा की वाहन सेवा पर जाकर भी वाहन का RC Status चेक कर सकते हैं।
- गाड़ी का नंबर दर्ज करने पर यह जानकारी मिल जाती है कि वाहन पर हाइपोथिकेशन सक्रिय है या नहीं। अगर रिकॉर्ड में बैंक का नाम दिखाई देता है, तो इसका मतलब है कि कागजों में लोन प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
ओरिजिनल आरसी की जांच करना न भूलें
- पुरानी कार खरीदते समय हमेशा वाहन की ओरिजिनल आरसी देखने की मांग करें।
- इसमें मालिक का नाम, इंजन नंबर, चेसिस नंबर और वाहन की अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है।
- स्मार्ट कार्ड आरसी में आमतौर पर लोन या हाइपोथिकेशन की स्थिति भी स्पष्ट रूप से लिखी होती है।
बैंक की एनओसी और फॉर्म 35 जरूर मांगें
- अगर सेलर दावा करता है कि वाहन का लोन पूरी तरह चुकाया जा चुका है, तो केवल उसकी बात पर भरोसा न करें।
- बैंक की ओर जारी मूल NOC और Form 35 की कॉपी जरूर देखें। यही दस्तावेज साबित करते हैं कि बैंक ने वाहन पर अपना दावा समाप्त कर दिया है। इन दस्तावेजों के बिना आरसी से बैंक का नाम हटाना संभव नहीं होता।
इंश्योरेंस रिकॉर्ड भी चेक करें
- कार खरीदने से पहले उसका बीमा रिकॉर्ड देखना भी बेहद जरूरी है।
- यह जांच लें कि इंश्योरेंस पॉलिसी वैध है या नहीं। साथ ही पिछले वर्षों में कोई बड़ा दुर्घटना क्लेम दर्ज हुआ है या नहीं, इसकी भी जानकारी लें।
- कई बार दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को मरम्मत के बाद बेचा जाता है, जिसकी जानकारी खरीदार को नहीं दी जाती।
पीयूसी सर्टिफिकेट की वैधता जांचें
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) हर वाहन के लिए अनिवार्य दस्तावेज है। इसकी वैधता समाप्त होने पर वाहन मालिक को जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसलिए डील फाइनल करने से पहले PUC की तारीख जरूर जांच लें।
Ownership Transfer के समय बरतें सावधानी
- दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद भी काम खत्म नहीं होता।
- वाहन अपने नाम ट्रांसफर करवाते समय सुनिश्चित करें कि बैंक की एनओसी और संबंधित दस्तावेज आरटीओ में जमा किए गए हों।
- इससे वाहन के रिकॉर्ड से हाइपोथिकेशन पूरी तरह हट जाएगा और भविष्य में किसी तरह की कानूनी समस्या नहीं आएगी।