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फास्टैग बैलेंस होने के बावजूद कटा ₹100 का गलत जुर्माना: उपभोक्ता आयोग ने NHAI और पेमेंट बैंक पर ठोका जुर्माना
Sat, 31 Oct 2026 11:05 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 31 Oct 2026 11:05 PM IST
सार
- यह फैसला फास्टैग जारी करने वाले बैंकों और टोल अथॉरिटी के मनमाने रवैये पर एक बड़ी नजीर पेश करता है।
- उपभोक्ता आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि फरवरी 2021 के NHAI सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी वाहन को टोल प्लाजा से तब तक गुजरने दिया जाना चाहिए, जब तक कि उसके फास्टैग खाते या वॉलेट का बैलेंस नेगेटिव न हो।
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Consumer Commission Fines NHAI
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एक प्रमुख ऑनलाइन पेमेंट बैंक के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने फास्टैग (FASTag) वॉलेट में पॉजिटिव बैलेंस (पर्याप्त राशि) होने के बावजूद उपभोक्ता से 100 रुपये का गलत जुर्माना वसूलने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस कार्रवाई को सेवा में कमी मानते हुए पीड़ित व्यक्ति को 100 रुपये का रिफंड देने और 4,000 रुपये का मुआवजा भुगतान करने का आदेश दिया है।
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फास्टैग से पेनल्टी वसूलने का यह पूरा मामला क्या था?
यह मामला 17 जून 2022 का है, जब पीड़ित व्यक्ति चंडीगढ़ से जालंधर की यात्रा कर रहा था:
- गलत पेनल्टी वसूली: बहराम टोल प्लाजा (Behram Toll Plaza) पर सिस्टम ने पीड़ित के फास्टैग में अपर्याप्त बैलेंस दिखाकर उससे टोल फीस के साथ 100 रुपये का जुर्माना वसूल लिया और कुल 200 रुपये की राशि काट ली।
- वॉलेट में पॉजिटिव बैलेंस: पीड़ित का दावा था कि उस समय उसके फास्टैग वॉलेट में 210 रुपये का पॉजिटिव बैलेंस मौजूद था।
- उपभोक्ता शिकायत: NHAI के नियमों का उल्लंघन होने पर पीड़ित ने मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक नुकसान का हवाला देते हुए कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया।
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उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में NHAI के किस नियम का हवाला दिया?
22 अक्तूबर 2026 को आयोग के अध्यक्ष पवनजीत सिंह और सदस्य मोहन शर्मा की पीठ ने उपभोक्ता के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया:- 11 फरवरी 2021 का सर्कुलर: आयोग ने NHAI के 11 फरवरी 2021 के आधिकारिक सर्कुलर का हवाला दिया। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि जब तक फास्टैग अकाउंट या वॉलेट बैलेंस 'नॉन-नेगेटिव' (शून्य से ऊपर) है, तब तक वाहन को टोल प्लाजा से गुजरने की अनुमति दी जानी चाहिए।
- NHAI की अनुपस्थिति: आयोग ने कहा कि इस सर्कुलर के आधार पर NHAI पेनल्टी वसूलने का कोई संतोषजनक कारण पेश नहीं कर सका। सुनवाई के दौरान NHAI की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। जिसके चलते उनके खिलाफ एकतरफा आदेश पारित किया गया।
ऑनलाइन पेमेंट बैंक ने बचाव में क्या दलीलें दीं और आयोग ने उन्हें क्यों खारिज किया?
पेमेंट बैंक ने उपभोक्ता की शिकायत का विरोध करते हुए कई दलीलें दीं, जिन्हें आयोग ने पूरी तरह से खारिज कर दिया:- मिनिमम सिक्योरिटी बैलेंस का तर्क: बैंक ने दलील दी कि FASTag में 150 रुपये का मिनिमम सिक्योरिटी बैलेंस होना अनिवार्य है। और इसका इस्तेमाल टोल भुगतान के लिए नहीं किया जा सकता। इस पर आयोग ने कहा कि FASTag जारी करने वाले बैंक का यह कर्तव्य है कि वह अपने संचालन को NHAI के नियमों के अनुरूप रखे। केवल मिनिमम बैलेंस की शर्त का हवाला देकर बैंक गलत पेनल्टी वसूली को सही नहीं ठहरा सकता।
- चार्जबैक टाइम-लिमिट की दलील: बैंक ने तर्क दिया कि निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के कारण वे रिफंड प्रोसेस नहीं कर सकते। आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि चार्जबैक की समय सीमा खत्म होने से उपभोक्ता सुरक्षा अधिकारों के तहत बैंक अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
कंज्यूमर फोरम ने क्या-क्या राहत और मुआवजा देने का निर्देश दिया?
चंडीगढ़ कंज्यूमर फोरम ने माना कि फास्टैग में बैलेंस होने के बावजूद पेनल्टी वसूलना पूरी तरह से गैर-कानूनी था। आयोग ने निर्देश दिया कि:- रिफंड: पीड़ित से गलत तरीके से काटी गई 100 रुपये की पेनल्टी राशि तुरंत लौटाई जाए।
- मुआवजा व कानूनी खर्च: मानसिक उत्पीड़न, परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के एवज में 4,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए।
गलत फास्टैग कटौती होने पर आम वाहन चालकों को क्या करना चाहिए?
यह फैसला फास्टैग जारी करने वाले बैंकों और टोल अथॉरिटी के मनमाने रवैये पर एक बड़ी नजीर पेश करता है:- उपभोक्ता अधिकार: अगर आपके फास्टैग में बैलेंस शून्य से ऊपर है, तो टोल प्लाजा पर आपसे अतिरिक्त जुर्माना नहीं वसूला जा सकता।
- जरूरी दस्तावेज रखें संभालकर: गलत कटौती की स्थिति में अपने बैंक स्टेटमेंट, फास्टैग मैसेज और टोल रसीद को सुरक्षित रखें।
- हेल्पलाइन पर करें शिकायत: इसी तरह की समस्या का सामना करने वाले उपभोक्ता अपने राज्य की कंज्यूमर हेल्पलाइन या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1915 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।