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Delhi EV Policy: सब्सिडी 'चोरों' पर दिल्ली सरकार की पैनी नजर, नई ईवी पॉलिसी में हैं ये प्रावधान

Thu, 02 Jul 2026 09:20 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 02 Jul 2026 09:20 PM IST
सार

दिल्ली सरकार की नई नई ईवी पॉलिसी 2026 इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सब्सिडी के दुरुपयोग पर भी रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। नई नीति में ऐसा प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे दिल्ली की ईवी सब्सिडी लेकर वाहन को दूसरे राज्य में ट्रांसफर कराने की व्यवस्था पर अंकुश लगेगा।

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Delhi EV Policy 2026: Three-Year NOC Rule, EV Subsidy Changes and New Registration Mandates Explained
EV Subsidy - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति के जरिए एक ऐसी बड़ी खामी को हमेशा के लिए बंद कर दिया है, जिसका फायदा उठाकर लोग दिल्ली में मिलने वाली भारी सब्सिडी का लाभ उठाते थे और फिर अपनी गाड़ियों को दूसरे राज्यों में ट्रांसफर कर लेते थे। 1 जुलाई को नोटिफाई की गई 'दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026' में इस चालाकी को रोकने के लिए एक बेहद सख्त नियम जोड़ा गया है, जो इसके शुरुआती ड्राफ्ट में नहीं था।

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सरकार का साफ मकसद है कि अगर दिल्ली के टैक्सपेयर्स के पैसे से ईवी पर सब्सिडी दी जा रही है। तो वे गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर ही चलें ताकि यहाँ की हवा साफ हो सके और प्रदूषण से राहत मिले। इसके साथ ही, अगले दो वर्षों में कई श्रेणियों में नई पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह बंद करने का मेगा प्लान भी बरकरार रखा गया है।

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सब्सिडी का फायदा उठाकर दूसरे राज्य भागने वालों को कैसे रोका जाएगा?

  • 3 साल तक नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) पर रोक: नई नीति के तहत, जो भी इलेक्ट्रिक वाहन दिल्ली सरकार की खरीद प्रोत्साहन योजना के तहत सब्सिडी का लाभ उठाएगा, उसे अगले तीन साल तक दिल्ली से बाहर ट्रांसफर या री-रस्ट्रेशन करने के लिए एनओसी (NOC) नहीं दी जाएगी।

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  • पॉलिसी का बदलता रूप: साल 2020 में जब पहली ईवी पॉलिसी आई थी, तब पूरा ध्यान सिर्फ खरीद इंसेंटिव देने, रोड टैक्स माफ करने और चार्जिंग स्टेशन बनाने पर था। लेकिन 2026 की इस नई नीति ने नियमों को कड़ा कर दिया है। अब इंसेंटिव के साथ सख्त शर्तें, सीमित पात्रता और रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य आवश्यकताओं को जोड़कर बदलाव को प्रभावित किया जा रहा है।

Delhi EV Policy 2026: Three-Year NOC Rule, EV Subsidy Changes and New Registration Mandates Explained
Delhi Traffic - फोटो : PTI

दिल्ली में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर कब से लगेगा ब्रेक?

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर आखिरी प्रहार करने के लिए नई पेट्रोल-डीजल और सीएनजी गाड़ियों की एंट्री बैन करने की सटीक टाइमलाइन तय कर दी है:

  • थ्री-व्हीलर्स और लाइट गुड्स व्हीकल्स (N1): 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में इन श्रेणियों के तहत केवल इलेक्ट्रिक वेरिएंट्स का ही नया रजिस्ट्रेशन हो सकेगा। पेट्रोल, डीजल या सीएनजी वाले नए कमर्शियल थ्री-व्हीलर और छोटे मालवाहक वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद हो जाएगा।

  • टू-व्हीलर्स (दोपहिया वाहन): 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में सभी नए दोपहिया वाहनों के लिए भी यही नियम लागू होगा। यानी इस तारीख के बाद केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ही रजिस्टर हो सकेंगे।

  • मौजूदा गाड़ियों पर क्या असर होगा: सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से दिल्ली में वर्तमान में चल रही और पहले से रजिस्टर्ड गाड़ियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह नियम सिर्फ नए खरीदे जाने वाले वाहनों पर लागू होगा।
     

प्राइवेट कारों को अभी इस सख्त नियम से बाहर क्यों रखा गया है?

इस नीति को लागू करने का क्रम बहुत सोच-समझकर तय किया गया है:

  • ज्यादा चलने वाले वाहनों पर पहला फोकस: शुरुआती चरण में उन गाड़ियों को निशाना बनाया गया है जो सड़क पर सबसे ज्यादा चलती हैं।

  • क्या कहते हैं प्रदूषण के आंकड़े: 'कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' के ताजा आकलन के मुताबिक, दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण का 23 फीसदी हिस्सा गाड़ियों के धुएं से आता है, जो सबसे बड़ा एकल योगदानकर्ता है। दिल्ली के कुल वाहनों में 67 फीसदी आबादी दोपहिया वाहनों की है, जबकि थ्री-व्हीलर्स और N1 मालवाहक वाहन रोजाना बहुत ज्यादा चलते हैं और शहरी प्रदूषण में असमान रूप से बड़ा योगदान देते हैं।

  • निजी कारों के लिए भविष्य का प्लान: प्राइवेट कारों को फिलहाल इस अनिवार्य समयसीमा से बाहर रखा गया है। हालांकि, नोटिफिकेशन में कहा गया है कि सरकार का इरादा भविष्य में फोर-व्हीलर्स (चार पहिया वाहनों) के लिए भी इलेक्ट्रिफिकेशन अनिवार्य करने का है। साथ ही कम माइलेज वाले और प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन से चलने वाले वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए एक ढांचा तैयार किया जाएगा, लेकिन इसकी कोई समयसीमा अभी तय नहीं की गई है।

Delhi EV Policy 2026: Three-Year NOC Rule, EV Subsidy Changes and New Registration Mandates Explained
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से कैसे जुड़ी है यह नीति?

इस नीति की तुलना दो दशक पहले दिल्ली में हुए सीएनजी (CNG) ट्रांजिशन से की जा रही है, जो पूरी तरह सटीक तो नहीं है लेकिन काफी कुछ सिखाती है:

  • ऐतिहासिक संदर्भ: दो दशक पहले का सीएनजी बदलाव सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'एम.सी. मेहता एयर पॉल्यूशन केस' में दिए गए आदेशों के बाद सरकारों द्वारा लागू किया गया था।

  • कानूनी शक्ति: दिल्ली सरकार ने इस नई ईवी नीति को 'मोटर व्हीकल एक्ट, 1988' के तहत मिली शक्तियों के आधार पर नोटिफाई किया है। खास बात यह है कि इस नोटिफिकेशन में खुद सुप्रीम कोर्ट के 'एम.सी. मेहता केस' की टिप्पणियों का हवाला देते हुए ईवी नीति की समीक्षा और बदलाव की जरूरत को समझाया गया है।
     

नई नीति में कितनी मिलेगी सब्सिडी और किस टेक्नोलॉजी को लगा झटका?

वित्तीय प्रोत्साहन जारी रहेंगे, लेकिन समय के साथ इनमें कटौती की जाएगी। इसके अलावा पात्रता के दायरे को भी छोटा किया गया है:

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए इंसेंटिव:

    • पहले साल: बैटरी क्षमता के आधार पर ₹10,000 प्रति kWh (अधिकतम ₹30,000 तक)।

    • दूसरे साल: यह घटकर ₹6,600 प्रति kWh रह जाएगी।

    • तीसरे साल: यह और घटकर ₹3,300 प्रति kWh हो जाएगी।

  • थ्री-व्हीलर और छोटे मालवाहक (N1): इनके लिए भी मिलने वाली सब्सिडी हर साल कम होती जाएगी।

  • स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (Strong Hybrids) को झटका: ड्राफ्ट पॉलिसी में प्रस्ताव था कि ₹30 लाख तक की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों को रोड टैक्स में छूट दी जाएगी। लेकिन अंतिम नोटिफिकेशन में इस प्रावधान को पूरी तरह हटा दिया गया है। अब यह छूट सिर्फ पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों तक ही सीमित रहेगी। इससे साफ है कि दिल्ली सरकार स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को ट्रांजिशन टेक्नोलॉजी के रूप में स्वीकार नहीं कर रही है।

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Vehicle Scrapping - फोटो : Freepik

पुरानी गाड़ी कबाड़ (स्क्रैप) करने पर कितना फायदा मिलेगा?

नई ईवी खरीदने के साथ अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करने पर मिलने वाले इंसेंटिव की लिस्ट कुछ इस तरह है:

वाहन की श्रेणी स्क्रैपेज इंसेंटिव राशि शर्तें
प्राइवेट इलेक्ट्रिक कार ₹1,00,000 एक्स-शोरूम कीमत ₹30 लाख तक हो और वह BS-IV या उससे पुरानी गाड़ी को रिप्लेस कर रही हो
N1 कमर्शियल मालवाहक ₹50,000 नीति के नियमों के तहत पात्र होने पर
इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा ₹25,000 नीति के नियमों के तहत पात्र होने पर
ग्रामीण सेवा वाहन ₹15,000 नीति में निर्धारित शर्तों के अधीन
टू-व्हीलर (दोपहिया) ₹10,000 नीति में निर्धारित शर्तों के अधीन

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Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock

अप्रैल के ड्राफ्ट से कितनी अलग और विस्तृत है यह अंतिम नोटिफिकेशन?

अप्रैल में जारी किया गया मसौदा सिर्फ 11 पन्नों का था, लेकिन अंतिम नोटिफिकेशन को बढ़ाकर 18 पन्ने का कर दिया गया है। इसमें काम को सही ढंग से लागू करने के लिए कई नए कड़े नियम और प्रशासनिक ढांचे जोड़े गए हैं:

  • नए नियम और टाइमलाइन: इसमें यह तय करने के लिए एक 'मॉडल अप्रूवल कमेटी' बनाई गई है कि कौन से ईवी मॉडल सब्सिडी के हकदार होंगे। साथ ही सब्सिडी आवेदन के लिए 30 दिनों का विंडो और वेरिफिकेशन के बाद पैसे ट्रांसफर करने के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई है। इसके अलावा 3 साल की एनओसी पाबंदी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइंस शामिल की गई हैं।

  • जनता और इंडस्ट्री से ली गई राय: ड्राफ्ट नीति पर नागरिकों, वाहन निर्माताओं, फ्लीट ऑपरेटर्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे गए थे। इंडस्ट्री ने मुख्य रूप से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी रीसाइक्लिंग, फाइनेंसिंग और टाइमलाइन पर बात की थी। लेकिन सरकार ने मुख्य रजिस्ट्रेशन बैन की समयसीमा को बिना बदले बरकरार रखा है।

  • मजबूत प्रशासनिक ढांचा: नीति को जमीन पर उतारने के लिए परिवहन विभाग में एक 'ईवी सेल', एक 'मॉडल अप्रूवल कमेटी', मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक 'हाई-पावर्ड कमेटी' और एक 'दिल्ली ईवी अपैक्स कमेटी' का गठन किया गया है। इसके अलावा सार्वजनिक चार्जिंग और बैटरी-स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग और विस्तार के लिए 'दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड' (DTL) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

प्राइवेट खरीदारों से आगे: सरकारी फ्लीट और स्कूलों के लिए कड़े निर्देश

यह नई नीति सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) और परिवहन विभाग द्वारा शामिल की जाने वाली सभी नई बसें अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक होंगी। स्कूलों के लिए भी निर्देश है कि वे अपने बेड़े में धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी बढ़ाएं। सभी सरकारी विभागों और सार्वजनिक निकायों को तय श्रेणियों में केवल ईवी खरीदने होंगे। इसके साथ ही फ्लीट एग्रीगेटर्स (कैब कंपनियों) और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी कुछ फ्लीट सेगमेंट्स में नई पेट्रोल-डीजल गाड़ियां शामिल करने पर पाबंदी लगा दी गई है।

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