सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   Fake or duplicate spare parts in your Car or bike may took costly for you, know how to find them

आपकी कार-बाइक में लगे नकली स्पेयर पार्ट्स ले सकते हैं जान, ऐसे करें इनकी पहचान

ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 17 Aug 2019 10:50 AM IST
विज्ञापन
Fake or duplicate spare parts in your Car or bike may took costly for you, know how to find them
Car Mechanic - फोटो : AmarUjala
विज्ञापन

भारत में फेक स्पेयर पार्ट्स की समस्या बेहद आम है। महंगी से महंगी गाड़ी के नकली स्पेयर पार्ट्स आसानी से बाजार में मिल जाते हैं। वहीं आए दिन ऐसे पार्ट्स बेचने वाली दुकानों पर छापेमारी की खबरें भी लगातार सामने आती रहती हैं। हाल ही में दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनी होंडा टूव्हीलर्स ने ऐसे नकली पार्ट्स बनाने वालों पर छापेमारी की थी, जिसमें होंडा के स्कूटर्स और बाइक्स में लगाए जा सकने वाले तीन करोड़ के नकली कलपुर्जे बरामद किए थे। आइए जानतें है फेक स्पेयर पार्ट्स से कैसे बचा जाए और इनकी रोकथाम को लेकर क्या हैं सरकार की तैयारियां...

Trending Videos

 

चल रहे हैं गैरकानूनी सर्विस सेंटर

नकली कलपुर्जों से परेशान होंडा ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स इंफोर्समेंट (आईपीआर) टीम बना कर 2017 में छापेमारी अभियान शुरू किया। होंडा जेनुइन पार्ट्स कैंपेन के तहत कंपनी को देशभर में कई जगहों पर होंडा के नाम से गैरकानूनी सर्विस सेंटर चलते मिले, इसके अलावा दिल्ली, बंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद, सिकंदराबाद, गांधीनगर, मुंबई, अहमदाबाद, गुड़गांव और कटक में कई जगहों पर छापेमारी की। दिल्ली के मशहूर बवाना इंडस्ट्रीयल एरिया और करोल बाग मार्केट में छापे के दौरान हजारों नकली स्पेयर पार्ट्स मिले। वहीं कंपनी ने तीन सालों में 94,000 नकली पार्ट्स बरामद किए, जिनकी कीमत करोड़ों में थी। यूपी, राजस्थान और हरियाणा में सबसे अधिक नकली पार्ट्स बेचे जा रहे थे।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

दैनिक जरूरतों के सामान में सबसे ज्यादा धांधली

ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाडर्स एसोसिएशन (ASPA) के आंकड़ों के मुताबिक देश में नकली प्रोडक्ट्स बनाने का कारोबार तकरीबन एक लाख करोड़ रुपये का है, जिसके चलते सरकार को हर साल 40 हजार करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान होता है। इनमें सबसे ज्यादा नकली उत्पाद फर्टीलाइजर, पेस्टीसाइड्स, रोजाना जरूरत वाला उपभोक्ता सामान, ऑटो पार्ट्स और फार्मा सेक्टर है।
 

नकली ऑटो पार्ट्स का बिजनेस 22 हजार करोड़ रुपये

वहीं ऑटो सेक्टर की बात करें, तो नकली ऑटो पार्ट्स का बिजनेस 22 हजार करोड़ रुपये का है, जो पिछले पांच सालों में बढ़ कर दोगुना हो गया है। जितनी रफ्तार से देश का ऑटो सेक्टर नहीं बढ़ा है, उससे कहीं ज्यादा तेजी से नकली पार्ट्स का व्यापार बढ़ा है। वहीं नकली पार्ट्स से ऑटो कंपनियों की भी नींद उड़ गई हैं, क्योंकि ऑटो कंपनियों की बिक्री में पार्ट्स का अहम योगदान होता है। नकली पार्ट्स बनाने वालों ने ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स सबसे ज्यादा परेशान है। एसी के फिल्टर, रिंग, पिस्टन, कमानी, पट्टे, क्लच प्लेट, स्टीयरिंग सस्पेंशन और ब्रेक वायर समेतत तमाम ऐसे ऑटो स्पेयर पार्ट्स, जिनकी मार्केट में खपत अधिक होती है, सबके नकली पार्ट्स बाजार में बेचे जा रहे हैं।
 

30 से 40 फीसदी हैं नकली पार्ट्स

ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नकुल पसरीचा का कहना है कि ऑफ्टर मार्केट सेगमेंट में नकली ऑटो पार्ट्स की भरमार है। 2018-19 में ऑटो ऑफ्टर मार्केट का बाजार 9.6 फीसदी के साथ बढ़ कर 67,491 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पहले 61,601 करोड़ रुपये था। वहीं रिटेल मार्केट में नकली कंपोनेंट्स की हिस्सेदारी 30 से 40 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
 

20 फीसदी सड़क हादसे नकली पार्ट्स की वजह से

पिछले साल आई Ficci-Cascade की रिपोर्ट के मुताबिक ऑटो कंपनियों की बिक्री में कमी आ रही है, साथ ही जानें भी जा रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि देश में होने वाले 20 फीसदी सड़क हादसों में इन नकली ऑटो पार्ट्स की भागीदारी होती है। ये कलपुर्जे बाजार में असली बताकर बेचे जाते हैं। इन्हें इस तरह से पेश किया जाता है कि 80 फीसदी लोग इन्हें असली समझ बैठते हैं। फिक्की ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जालसाजी और नकली उत्पाद जैसी समस्याएं  स्थायी हो गई हैं और इनके चलते सरकार को 2,200 करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान झेलना पड़ रहा है।  
 

पुरानी गाड़ियों में होते हैं सबसे ज्यादा इस्तेमाल

विशेषज्ञों के मुताबिक देश में ऐसे बहुत से ऑपरेटर्स हैं, जो रातों रात ये नकली पार्ट्स उपलब्ध करा देते हैं, वहीं चीन से आने वाले नकली पार्ट्स की तादात तेजी से बढ़ी है। वह बताते हैं कि अगर आप पुरानी कार, एसयूवी या टू-व्हीलर खरीद रहे हैं, तो मान कर चलिए कि उनमें ये नकली कलपुर्जे जरूर मिलेंगे। इसकी वजह है कि गाड़ी जैसे-जैसे पुरानी होती चली जाती है, तो लोग सस्ते पार्ट्स ढूंढते हैं और उनकी खोज इन नकली पार्ट्स पर आकर खत्म होती है। वहीं पुरानी कारों के डीलर भी पैसे बचाने के लिए ग्राहकों को गाड़ी बेचने से पहले नकली पार्ट्स लगवा देते हैं।  
 

सरकार ने निकाली खास तकनीक

वहीं सरकार भी नकली स्पेयर पार्ट्स की पहचान करने के लिए कई कड़े कदम उठा रही है। मोचर व्हीकल नियमों के तहत सरकार ने हाल ही में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के मुताबिक सरकार ने वाहन और उनके स्पेयर पार्ट्स और अन्य कलपुर्जों में दिखाई न देने वाले माइक्रोडोट्स लगाने का फैसला किया है। इनकी खासियत होगी कि इन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी या पराबैंगनी प्रकाश स्रोत की आवश्यकता होगी। इस तकनीक के तहत  गाड़ियों को चोरी से बचाने और नकली पार्ट्स के इस्तेमाल पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। माइक्रोडॉट्स तकनीक के तहत वाहन निर्माता या ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स पार्ट्स या किसी भी मशीन पर बेहद बारीक स्प्रे करेंगे, जिनमें डॉट्स होंगे। दुनियाभर में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
 

चोरी की कार भी ढूंढ सकेंगे

ये माइक्रोडॉट्स सूक्ष्म आकार के कण होंगे, जिनमें मार्किंग और खास संख्या दर्ज है। वहीं माइक्रोडॉट्स की यूनीक आईडी को कार के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ जोड़ा जाता है। इस तकनीक के जरिये गाड़ी का करीब-करीब हर हिस्सा रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ जुड़ जाता है। अगर गाड़ी के टुकड़े-टुकड़े भी कर दिए जाएं, तो भी इसके रजिस्ट्रेशन नंबर का पता चुटकियों में लगाया जा सकता है।
 

आप भी पैकिंग से कर सकते हैं पहचान

कंपनी के ओरिजनल प्रोडक्ट्स पर यूनिक पार्ट्स आइडेंटिफिकेशन कोड लिखा होता है। वहीं हीरो मोटोकॉर्प के किसी पार्ट के एमआरपी स्टीकर पर लिखे यूपीआई कोड को 9266171171 पर SMS भेज कर उसकी असली होने की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा पार्ट्स की पैकेजिंग में अदृश्य इंक प्रिंटेड का भी इस्तेमाल होता है। हीरो कंपनी का GENUINE PARTS लोगो अल्ट्रा वायलेट (यूवी) लाइट में भी दिखाई देता है। इसमें थर्मोक्रोमिक इंक (ब्लैक कलर) से ‘GENUINE’ शब्द लिखा रहता है। रगड़ने पर वह गर्मी के चलते गायब हो जाएगा लेकिन कुछ सेकेंड बाद ही दोबारा से दिखने लगेगा।   
 

अगर मिले ज्यादा डिस्काउंट

अगर आप स्पेयर पार्ट्स खरीदने किसी दुकान पर जाते हैं, और दुकानदार उस पार्ट्स पर ज्यादा डिस्काउंट दे रहा है, तो समझ जाएं कि वह पार्ट नकली है। कंपनी के शोरूम पर भी जाकर या फोन से संपर्क करके पार्ट की कीमत का जरूर पता करें। वहीं जीएसटी बिल जरूर लें, इससे आपको नकली पार्ट्स का पता लगाने में आसानी होगी।  
 

कंपनी में ही कराएं सर्विस

नकली पार्ट्स से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि ग्राहकों को चाहिए कि वह हमेशा अपनी गाड़ी को संबंधित कंपनी के ऑथराइज्ड डीलर से ही ठीक कराए, यहां तक कि उसकी सर्विस भी कंपनी से ही कराएं। इसका फायदा यह होगा कि कंपनी आपको पार्ट पर वारंटी भी देगी, साथ ही कंपनी के पास प्रशिक्षित मैकेनिक भी होते हैं, जो उसे लगाने में पूरी सावधानी बरतते हैं।   
 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed