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SPMEPCI: विदेशी ईवी निवेश के लिए सरकार का नया मेगा प्लान, SPMEPCI योजना के नियमों में फेरबदल की तैयारी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Tue, 13 Jan 2026 11:01 AM IST
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सार

EV Manufacturing: भारत में इलेक्ट्रिक कार मैन्युफैक्चरिंग को रफ्तार देने के लिए सरकार SPMEPCI योजना में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। इस बदलाव के बाद विशेष रूप से भारत-EU FTA की बातचीत और वैश्विक कंपनियों की सुस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए नियमों को लचीला बनाया जा सकता है।जानिए क्या है ये स्कीम और सरकार इसे बदलने के बारे में योजना क्यों बना रही है?
 

Government to ease Spmepci rules to boost foreign ev investment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Ministry of Heavy Industries
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विस्तार
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भारत सरकार की स्कीम टू प्रमोट मैन्यूफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार्स इन इंडिया (SPMEPCI) का उद्देश्य वैश्विक इलेक्ट्रिक कार निर्माताओं को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए आकर्षित करना था। योजना मुख्य रूप से आयात शुल्क में छूट पर होने की वजह से कंपनियों को निवेश के लिए पर्याप्त आकर्षित नहीं कर पाई। न ही अब तक किसी भी वैश्विक ऑटो कंपनी ने इस योजना में आवेदन किया है, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है।

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सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पूरी तरह या आंशिक रूप से निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ घटा सकता है। ऐसे में सिर्फ ये योजना के तहत शुल्क छूट देने से योजना का महत्व कम हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,  भारत और यूरोपीय संघ (EU) FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) के बाद SPMEPCI में बदलाव जरूरी हो जाएगा। 
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क्यों नहीं आए कोई आवेदन?

इस योजना की मंजूरी मार्च 2024 में मिली थी और इसके बाद जून 2025 में इसकी गाइडलाइंस जारी हुई। इसके बावजूद एक भी वैश्विक ईवी कंपनी ने आवेदन नहीं किया। आवेदन विंडो अक्तूबर 2025 तक खुली रही। सरकार ने जर्मनी, अमेरिका, यूके, वियतनाम और चेक गणराज्य जैसे देशों को भी आमंत्रित किया, लेकिन फिर भी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। 


वैश्विक ऑटोमेकर्स का कहना है कि योजना में तय की गई न्यूनतम निवेश सीमा बहुत अधिक है। निर्धारित समयसीमा में निवेश और स्थानीय वैल्यू एडिशन लक्ष्य पूरे करना व्यावहारिक नहीं है। इसके अलावा, भारत-EU FTA के लागू होने की स्थिति में बिना किसी बड़े निवेश के भी टैक्स छूट मिलने की संभावना है, जिससे इस योजना के तहत निवेश का आकर्षण कम हो जाता है। वहीं, चीन की ओर से रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध भी ईवी सप्लाई चेन और लागत को प्रभावित कर रहे हैं।

अब योजना में क्या बदलाव हो सकता है?

इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार अब SPMEPCI में बदलाव पर विचार कर रही है। इस बदलाव में केवल आयात शुल्क में छूट देने के बजाय प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन जोड़ने पर चर्चा हो रही है। इससे प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता भारत में दीर्घकालिक और स्थायी मैन्युफैक्चरिंग बेस स्थापित करने के लिए प्रेरित हों। 

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SPMEPCI योजना का मौजूदा प्रावधान क्या है?

वर्तमान प्रावधानों के तहत न्यूनतम 35 हजार डॉलर मूल्य की पूरी तरह निर्मित (CBU) इलेक्ट्रिक कारों के आयात की अनुमति है। पात्र कंपनियों को 5 वर्षों तक 15 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी पर सीमित संख्या में ईवी आयात करने की छूट मिलती है, जो तय निवेश और विनिर्माण शर्तों से जुड़ी हुई है।

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