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Stunts: टू-व्हीलर स्टंट्स पर लगाम लगाने की तैयारी, आ रहा है 3-लेयर सेफ्टी सिस्टम? जानें कैसे करेगा काम

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 18 May 2026 05:07 PM IST
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सार

भारत में बिना हैंडल पर हाथ रखे लापरवाही से टू-व्हीलर चलाने और स्टंट करने वाले युवाओं पर लगाम लगाने के लिए सरकार एक बेहद सख्त कदम उठाने जा रही है। सड़कों पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए अब दोपहिया वाहनों में एडवांस तकनीक पर आधारित एक नया 'थ्री-लेयर' सेफ्टी सिस्टम अनिवार्य किया जा सकता है।

Govt Plans 3-Layer Hands-Free Safety System for Two-Wheelers in India to Curb Stunts
Three Layer Safety System for Two Wheelers - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

भारत सरकार देश में दोपहिया वाहनों के लिए एक तीन-परत (थ्री-लेयर) वाले 'हैंड्स-फ्री' सुरक्षा सिस्टम को अनिवार्य करने की योजना बना रही है। इस नए नियम के तहत वाहन निर्माताओं को गाड़ियों में ऐसी तकनीक इंस्टॉल करनी होगी, जो यह पहचान सके कि राइडर के दोनों हाथ हैंडल पर हैं या नहीं। अगर राइडर के हाथ हैंडल पर नहीं होंगे, तो यह सिस्टम खुद-ब-खुद काम करना शुरू कर देगा। मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में यह जानकारी समाने आई है। यह कदम देश में हर साल होने वाले सड़क हादसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उठाया जा रहा है। जिनमें से ज्यादातर दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन शामिल होते हैं।

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भारत में युवाओं द्वारा तेज रफ्तार से बिना हैंडल पकड़े मोटरसाइकिल या स्कूटर चलाना और स्टंट करना एक आम नजारा बन चुका है। यह व्यवहार न केवल खुद राइडर्स के लिए बल्कि अन्य वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। सरकार इस नए सिस्टम के जरिए इसी खतरनाक ड्राइविंग व्यवहार पर रोक लगाना चाहती है। 

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सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर इतनी गंभीर क्यों है?

सड़क सुरक्षा को कड़ा करने के पीछे देश में दुर्घटनाओं के डराने वाले आंकड़े हैं:

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट: 'एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024' की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में पूरे भारत में लगभग 4,68,000 सड़क हादसे दर्ज किए गए।

  • हताहतों की संख्या: इन हादसों में 4,48,365 लोग घायल हुए और 1,75,142 लोगों की जान चली गई। इन दुर्घटनाओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा दोपहिया वाहनों से जुड़ा था।

यह नई सुरक्षा तकनीक कैसे काम करेगी?

मसौदा प्रस्ताव के मुताबिक, प्रस्तावित सुरक्षा मानकों के तहत इंस्टॉल की जाने वाली तकनीक तीन परतों (लेयर्स) में काम करेगी। ताकि चालक बिना हैंडल पकड़े गाड़ी न चला सके। इसके लिए वाहनों को तीन टेस्ट पास करने होंगे:

  • पहली परत (इग्निशन ब्लॉक): यह सिस्टम सुनिश्चित करेगा कि जब तक राइडर के दोनों हाथ हैंडल पर ठीक से नहीं होंगे, तब तक मोटरसाइकिल या स्कूटर स्टार्ट (इग्निशन) ही नहीं होगा। हैंडल पर लगे सेंसर हाथों की स्थिति को डिटेक्ट करेंगे।

  • दूसरी परत (ऑडियो-विजुअल अलर्ट): यदि चलती गाड़ी के दौरान राइडर हैंडल से हाथ हटाता है, तो हाथ हटने के ठीक 3 सेकंड बाद एक ऑडियो और विजुअल (देखने और सुनने वाला) अलर्ट शुरू हो जाएगा।

  • तीसरी परत (कोस्ट-डाउन मोड): यदि अलर्ट के बाद भी राइडर हैंडल पर हाथ नहीं रखता है, तो हाथ हटने के 8 सेकंड बाद 'कोस्ट-डाउन मोड' सक्रिय हो जाएगा। यह मोड सुरक्षा के लिहाज से दोपहिया वाहन की गति को धीरे-धीरे और लगातार कम कर देगा।

मंजूरी मिलने के बाद यह नियम सभी नए दोपहिया मॉडलों के लिए अनिवार्य होगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसे हर कैटेगरी पर समान रूप से लागू किया जाएगा या शुरुआती स्तर के टू-व्हीलर्स को इससे छूट दी जाएगी।

इस नई तकनीक का वाहनों की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

प्रस्तावित मानकों के कारण भारतीय बाजार में आने वाले दोपहिया वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी होना तय है:

  • सेंसर की लागत: उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, हैंडल पर लगाए जाने वाले सेंसर की प्रति यूनिट लागत 800 रुपये से 1,000 रुपये के बीच आएगी। इसका मतलब है कि इस पूरे सिस्टम के लिए उपभोक्ताओं को 1,600 रुपये से 2,000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करने होंगे।

  • मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट: विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन निर्माताओं के लिए ऐसा सिस्टम तैयार करना कोई तकनीकी चुनौती नहीं है। क्योंकि भारत के सभी टू-व्हीलर्स में पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) होता है, जिसमें इस नियम के तहत बदलाव किए जा सकते हैं। हालांकि, सेंसर जोड़ने और ईसीयू को उनके अनुकूल संरेखित करने से निर्माण लागत बढ़ जाएगी।

इस नए नियम पर ऑटोमोबाइल उद्योग की क्या प्रतिक्रिया है?

यह पहली बार नहीं है जब बिना हाथ रखे ड्राइविंग को रोकने वाली तकनीक पर चर्चा हो रही है:

  • इतिहास: यह खबर पहली बार जुलाई 2025 में सामने आई थी जब केंद्र सरकार इस पर योजना बना रही थी।

  • अन्य लटके हुए नियम: यह कदम दोपहिया वाहनों की सुरक्षा को कड़ा करने का एक नया प्रयास है। इससे पहले, इंजन क्षमता की परवाह किए बिना सभी कैटेगरी के टू-व्हीलर्स में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) अनिवार्य करने का सरकार का प्रयास उद्योग के विरोध और लागत संबंधी चिंताओं के कारण अटका हुआ है।

  • उद्योग की चिंता: ऑटोमोबाइल सेक्टर को डर है कि इस तकनीक के कारण बढ़ने वाली कीमतें गाड़ियों की मांग और बिक्री पर बुरा असर डाल सकती हैं। खासकर ऐसे समय में जब यह ईंधन की बढ़ती कीमतों के साथ जुड़ जाएगी।


सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सरकार का यह कदम बेहद कड़ा है। अगर यह कानून लागू होता है, तो वाहन थोड़े महंगे जरूर होंगे। लेकिन स्टंट करने वालों और लापरवाह चालकों पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सकेगी। 

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