Auto Parts: ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री में आएगा बंपर उछाल! सेमीकंडक्टर, रक्षा और ईवी के दम पर कारोबार बढ़ने का दावा
वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs की एक रिपोर्ट के अनुसार, FY26 से FY30 के बीच भारतीय ऑटो पार्ट्स उद्योग की राजस्व वृद्धि औसतन 10% सालाना (CAGR) रहने का अनुमान है।
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वैश्विक वित्तीय सेवा देने वाली कंपनी गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की एक हालिया रिपोर्ट में भारतीय ऑटोमोबाइल्स और ऑटो पार्ट्स सेक्टर को लेकर एक बेहद ही आशाजनक तस्वीर पेश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्रिसिजन मशीनिंग और ऑटो पार्ट्स उद्योग वित्तीय वर्ष 2026 से 2030 (FY26-FY30) के बीच 10 प्रतिशत की वार्षिक राजस्व वृद्धि दर्ज करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पारंपरिक ऑटो पार्ट्स से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, रक्षा, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और डेटा सेंटर्स जैसे उभरते और हाई-टेक क्षेत्रों में हो रहा विविधीकरण इस ग्रोथ का मुख्य इंजन बन रहा है।
गोल्डमैन सैक्स रिपोर्ट के अनुसार भारतीय ऑटो पार्ट्स उद्योग के विकास के क्या आंकड़े हैं?
रिपोर्ट में अगले कुछ वर्षों के दौरान उद्योग के राजस्व और ईबिटडा (EBITDA) में मजबूत और स्थिर वृद्धि का अनुमान लगाया गया है:
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10% वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR):
प्रिसिजन मशीनिंग में बदलाव के दम पर भारतीय ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री FY26E से FY30E के बीच +10% की CAGR से राजस्व बढ़ाएगी। -
वर्ष-दर-वर्ष राजस्व अनुमान:
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FY27E: +7 प्रतिशत की वृद्धि
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FY28E: +12 प्रतिशत की वृद्धि
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FY29E: +10 प्रतिशत की वृद्धि
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EBITDA में 15% की चक्रवृद्धि वृद्धि:
रिपोर्ट का अनुमान है कि इसी समान अवधि (FY26 से FY30) के दौरान उद्योग का ईबिटडा (EBITDA - ब्याज, कर, मूल्यह्रास और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से बढ़ेगा।
वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन के बदलाव से भारतीय निर्माताओं को कैसे मिल रहा है फायदा?
दुनिया भर की कंपनियां अब सिंगल-सोर्स सप्लाई चेन पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं, जिससे भारतीय विनिर्माताओं के लिए नए और बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं:
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सप्लाई चेन का विविधीकरण:
औद्योगिक, ऑटोमोटिव और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों के वैश्विक निर्माता अपनी सप्लाई चेन को विविधता प्रदान कर रहे हैं, जिससे भारत के लिए नए दरवाजे खुल रहे हैं। -
साइक्लिकल छवि से बाहर निकलना:
अब तक शेयर बाजार और निवेशक इन कंपनियों को मुख्य रूप से चक्रवाती ऑटो कंपोनेंट मेकर्स के रूप में देखते थे। -
मजबूत और बड़े प्रॉफिट पूल्स तक पहुंच:
कई भारतीय ऑटो पार्ट्स निर्माता अब अपने प्रोडक्ट मिक्स में विविधता ला रहे हैं ताकि वे बड़े, अधिक स्थिर और लचीले प्रॉफिट पूल्स तक अपनी पहुंच बना सकें।
भारतीय ऑटो पार्ट्स उद्योग की लंबी अवधि की वृद्धि को क्या रफ्तार दे रहा है?
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट ने उद्योग के दीर्घकालिक विकास को समर्थन देने वाले प्रमुख चालकों और रणनीतिक फायदों की पहचान की है:
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नए उभरते क्षेत्र: रक्षा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और डेटा सेंटर्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ता विस्तार।
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इलेक्ट्रिफिकेशन: इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की प्रक्रिया।
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निर्यात: वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपोनेंट्स की बढ़ती मांग।
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आठवां वेतन आयोग: आने वाले आठवें वेतन आयोग से घरेलू स्तर पर मांग को बड़ा समर्थन मिलेगा।
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ग्लोबल आईसीई मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट: वैश्विक स्तर पर इंटरनल कंबशन इंजन (ICE - पेट्रोल/डीजल) के निर्माण में हो रहे बदलाव से भारतीय कंपनियों को ऑर्डर मिल रहे हैं।
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प्रतिस्पर्धी लागत और संरक्षित बाजार: भारत की अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी निर्माण लागत और एक सुरक्षित/संरक्षित घरेलू बाजार भारतीय कंपोनेंट निर्माताओं को अतिरिक्त बढ़त और सुरक्षा प्रदान करते हैं।