भारत-UK ट्रेड डील का बड़ा असर: विदेशी कारों पर 110% की जगह लगेगा सिर्फ 10% टैक्स, बदल जाएगा देश का कार बाजार
India-UK CETA: भारत और ब्रिटेन के बीच हुए नए व्यापार समझौते (CETA) के तहत अगले 15 वर्षों में ब्रिटेन से आने वाली पेट्रोल-डीजल कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर मात्र 10% रह जाएगी। कैसे इस 'कोटा सिस्टम' से विदेशी प्रीमियम कारें सस्ती होंगी।
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भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुआ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) हुआ है, जो 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। कार प्रेमियों के लिए यह एक शानदार खबर है। इस डील के तहत, अगले 15 वर्षों में ब्रिटेन से भारत आने वाली पेट्रोल-डीजल कारों पर लगने वाला इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) 110% से घटकर मात्र 10% रह जाएगा। आइए समझते हैं कि यह डील भारतीय ऑटो बाजार को कैसे प्रभावित करेगी।
कितनी कारों को मिलेगी यह छूट?
इस करार के मुताबिक, भारत अगले 15 वर्षों में ब्रिटेन से लगभग 3.78 लाख कन्वेंशनल इंजन (पेट्रोल-डीजल) कारों को रियायती टैक्स पर भारत में आयात करने की मंजूरी देगा।
कैसे घटेगा टैक्स और क्या है कोटा सिस्टम?
टैक्स में छूट एक झटके में नहीं, बल्कि साल-दर-साल मिलेगी। दोनों देशों ने इसके लिए एक कोटा सिस्टम तय किया है।
पहले साल का गणित
- प्रीमियम/पावरफुल कारें (>3000cc पेट्रोल और >2500cc डीजल): इस कैटेगरी में 10,000 कारों का कोटा तय किया गया है। इन पर ड्यूटी 110% से भारी कटौती के साथ 30% कर दी जाएगी।
- मिड-रेंज कारें (1500cc से 3000cc): 5,000 कारों का कोटा मिलेगा। इन पर टैक्स 66% से घटकर 50% हो जाएगा।
- आम/मास-मार्केट कारें (1500cc तक): इसमें भी 5,000 कारों का कोटा रहेगा और टैक्स 66% से घटकर 50% लगेगा।
आगे कैसे बढ़ेगा कोटा?
5वें साल तक: इन तीनों कैटेगरी का कोटा बढ़कर क्रमशः 19,000, 9,000 और 10,000 यूनिट्स हो जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस समय तक सभी पर ड्यूटी अपने सबसे निचले स्तर यानी 10% पर आ जाएगी।
15वें साल और उसके बाद: 15वें साल से हर साल तीनों कैटेगरी को मिलाकर कुल 15,000 कारों का एक फिक्स कोटा रहेगा, जिन पर सिर्फ 10% टैक्स लगेगा।
देसी इलेक्ट्रिक (ईवी) कंपनियों को घबराने की जरूरत नहीं
सरकार ने इस डील में भारतीय कार कंपनियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा है, जो भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार में दबदबा बना रही हैं:
सस्ती कारों की नो-एंट्री: 40,000 पाउंड (लगभग 42 लाख रुपये) से कम कीमत वाली विदेशी कारों के लिए भारत ने अपना बाजार पूरी तरह बंद रखा है। इससे मास-मार्केट में स्वदेशी कंपनियों को विदेशी चुनौती नहीं मिलेगी।
शुरुआती 5 साल ईवी पर कोई छूट नहीं: पहले 5 वर्षों तक ब्रिटेन से आने वाली इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड या हाइड्रोजन कारों पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी।
छठे साल से मिलेगी सीमित छूट
- 40,000 से 80,000 पाउंड वाली कारों (400 यूनिट्स का कोटा) पर टैक्स 50% होगा।
- 80,000 पाउंड से महंगी कारों (4,000 यूनिट्स का कोटा) पर टैक्स 40% होगा।
- 10वें साल में इन दोनों सेगमेंट का टैक्स भी घटकर 10% पर आ जाएगा।
इस डील में भारत को क्या फायदा मिला?
इसके बदले में, भारत को ब्रिटेन के बाजार में बड़ा मौका मिला है। छठे साल से भारतीय कार निर्माता कंपनियां अपनी इलेक्ट्रिक कारों को बिना किसी ड्यूटी (टैक्स फ्री) के ब्रिटेन में बेच सकेंगी। 15वें साल तक यह कोटा बढ़कर 88,000 यूनिट्स हो जाएगा। इससे ब्रिटेन को गाड़ियां निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों को बहुत बड़ा फायदा होगा।