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महाराष्ट्र क्रेन हादसा: मौत का जिम्मेदार खुद कर्मचारी, ठाणे MACT ने खारिज किया 50 लाख का मुआवजा

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 13 Apr 2026 02:37 PM IST
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सार

MACT Thane Crane Accident Verdict: महाराष्ट्र के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने 2019 के एक क्रेन हादसे में 50 लाख रुपये के मुआवजे का दावा खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस दुर्घटना में क्रेन ऑपरेटर की कोई लापरवाही नहीं थी, बल्कि मृतक कर्मचारी बिना 'सेफ्टी गियर' के प्रतिबंधित क्षेत्र में चला गया था।

Maharashtra crane accident: Employee himself held responsible for death
मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार

महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने एक अहम फैसला सुनाते हुए 50 लाख रुपये के मुआवजे का दावा खारिज कर दिया है। यह दावा 2019 में क्रेन से कुचलकर जान गंवाने वाले एक 32 वर्षीय डॉक कर्मचारी के परिवार ने किया था। कोर्ट ने पाया कि गलती क्रेन ऑपरेटर की नहीं, बल्कि बिना सुरक्षा उपकरणों के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने वाले कर्मचारी की थी।

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क्या है पूरा मामला?

यह दर्दनाक हादसा 3 मई 2019 को उरण के द्रोणागिरी स्थित सीबर्ड मरीन सर्विसेज के कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) में हुआ था। यहां एक लॉजिस्टिक्स कंपनी में काम करने वाले किरण लहानु कोराडे की एक क्रेन से कुचलकर मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी और परिवार का आरोप था कि क्रेन ऑपरेटर की लापरवाही और तेज रफ्तार ड्राइविंग के कारण यह हादसा हुआ। इसलिए उन्होंने वाहन मालिक और इंश्योरेंस कंपनी से 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की थी।

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ट्रिब्यूनल ने क्यों खारिज किया दावा?

MACT के सदस्य केपी श्रीखंडे ने 8 अप्रैल को अपना आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि यह हादसा मुख्य रूप से मृतक की अपनी लापरवाही के कारण हुआ था। कोर्ट ने पाया कि दुर्घटना एक 'नो मैन्स लैंड' (प्रतिबंधित क्षेत्र) में हुई, जहां मृतक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के प्रवेश कर गया था। इसके अलावा, मृतक ने क्रेन पर लिखी उस स्पष्ट चेतावनी को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया, जिसमें लाल अक्षरों में मशीन से 10 मीटर की दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए थे। 


कोर्ट ने ऑपरेटर का पक्ष लेते हुए माना कि भारी कंटेनरों को ऊंचाई पर सेट करते समय ऑपरेटर का ध्यान स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर होता है, ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्र में मौजूद किसी अनधिकृत व्यक्ति को देख पाना उसके लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। इन तथ्यों के आधार पर, ऑपरेटर की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही या तेज गति से वाहन चलाने की बात साबित नहीं हो सकी और मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया गया।

ऑटोमोबाइल और इंश्योरेंस के लिहाज से अहम बात

इस मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने भी मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी के हक में फैसला सुनाया क्योंकि क्रेन ड्राइवर के ड्राइविंग लाइसेंस (DL) पर उस विशेष भारी वाहन को चलाने का आवश्यक अनुमति नहीं था। यह सीधे तौर पर इंश्योरेंस पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन माना गया।

पहले ही मिल चुके हैं 31 लाख रुपये

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि परिसर के मालिक, सीबर्ड मरीन सर्विसेज ने मानवीय आधार पर मृतक की पत्नी को पहले ही 31 लाख रुपये का भुगतान कर 'फुल एंड फाइनल सेटलमेंट' कर दिया था। हालांकि, जज ने यह साफ किया कि प्रॉपर्टी मालिक से ऐसा कोई समझौता होने मात्र से पीड़ित का कानूनी अधिकार खत्म नहीं होता और वह वाहन मालिक से मुआवजे की मांग कर सकता है। लेकिन, इस मामले में चूंकि ड्राइवर की कोई लापरवाही साबित नहीं हो सकी, इसलिए कोर्ट ने कानूनी तौर पर इस याचिका को कायम रखने योग्य नहीं माना और इसे रद्द कर दिया।

लेख से जुड़ी महत्वपूर्ण सीख

यह घटना सुरक्षा और कानूनी नियमों के महत्व को रेखांकित करती है। औद्योगिक क्षेत्रों में कमर्शियल वाहनों के आसपास चलते समय सुरक्षा चेतावनी और साइन बोर्ड्स को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि आपकी एक छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। साथ ही, वाहन मालिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि भारी मशीनरी चलाने वाले ड्राइवरों के पास न केवल ड्राइविंग लाइसेंस, बल्कि उस श्रेणी का सही 'ऑथराइजेशन' भी होना चाहिए, ताकि कानूनी पेचीदगियों या इंश्योरेंस क्लेम के समय कोई रुकावट न आए।

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