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नए टायरों पर क्यों होते हैं रबर के छोटे 'बाल': कोई सजावट नहीं, इसके पीछे छिपी है दिलचस्प टेक्नोलॉजी

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 13 Apr 2026 03:37 PM IST
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सार

New Tyre Rubber Hairs: नई गाड़ियों के टायरों पर अक्सर रबर के बारीक कांटे या बाल नजर आते हैं। देखने में ये भले ही कोई खास डिजाइन लगें, लेकिन असल में यह टायर की मजबूती और क्वालिटी का सबसे बड़ा सबूत होते हैं। जानिए आखिर फैक्ट्री में टायर बनते समय ऐसा क्या होता है कि टायरों पर ये 'बाल' बन जाते हैं और ड्राइविंग में इनका क्या असर होता है।

Why do new tyres have rubber 'hairs'? the real reason explained
vent spews - फोटो : X
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विस्तार

अगर आपने कभी कोई नई गाड़ी खरीदी है या नए टायर लगवाए हैं तो नए टायर पर कांटे जैसे रबर के बाल जरूर देखे होंगे। इन्हें देख कर लोगों को लगता है कि ये टायर की ग्रिप को मजबूत करने, सड़क पर आवाज कम करने या फिर माइलेज बढ़ाने के लिए होते हैं। लेकिन असलियत कुछ और ही है। आखिर क्या है इसके पीछे की असली वजह आइए जानते हैं।

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तकनीकी भाषा में इन्हें क्या कहते हैं?

इंजीनियरिंग और टायर मैन्युफैक्चरिंग की भाषा में इन छोटे-छोटे बालों को 'वेंट स्प्यूज़' या 'टायर निब्स' कहा जाता है। ये सिर्फ बिल्कुल नए टायरों पर ही नजर आते हैं और जैसे-जैसे आप गाड़ी चलाते हैं, कुछ सौ किलोमीटर के बाद ये अपने आप सड़क पर घिसकर खत्म हो जाते हैं।

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आखिर ये बनते कैसे हैं?

इनके बनने के पीछे टायर निर्माण की एक बेहद जरूरी प्रक्रिया छिपी है, जिसे वल्केनाइजेशन कहा जाता है। जब फैक्ट्री में टायर को एक खास सांचे में तैयार किया जाता है तो कच्चे रबर पर बहुत तेज गर्मी और हवा का भारी दबाव डाला जाता है ताकि टायर को उसका सही आकार और मजबूती मिल सके। इस सांचे में हवा बाहर निकलने के लिए बहुत बारीक छेद बनाए जाते हैं। 


जैसे ही दबाव के कारण रबर पूरे सांचे में फैलती है, अंदर फंसी हुई हवा इन बारीक छेदों से तेजी से बाहर निकलती है और अपने साथ थोड़ा सा पिघला हुआ रबर भी बाहर ले आती है। यही रबर जब सूखकर सख्त हो जाता है तो वह टायर की सतह पर छोटे-छोटे बालों या 'वेंट स्प्यूज' के रूप में नजर आने लगता है।

क्या ड्राइविंग में इनका कोई फायदा है?

सीधे शब्दों में कहा जाए तो बिल्कुल नहीं। एक बार जब फैक्ट्री से टायर बनकर तैयार हो जाता है तो इन बालों का कोई व्यावहारिक काम नहीं बचता। आपके ड्राइविंग अनुभव पर इनका रत्ती भर भी असर नहीं पड़ता। चाहे वह गाड़ी की परफॉर्मेंस हो, तेज रफ्तार, सड़क पर पकड़ या फिर सुरक्षा, इन रबर के बालों का किसी भी तकनीकी पहलू से कोई लेना-देना नहीं है। ये सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग के दौरान पीछे छूटी हुई निशानियां बन कर रह जाती हैं जो कुछ मील चलने के बाद खुद ही सड़क पर घिसकर साफ हो जाती हैं।

तो फिर इनका होना जरूरी क्यों है?

भले ही ड्राइविंग के दौरान इनका कोई प्रत्यक्ष रोल न हो, लेकिन ये टायर की क्वालिटी और मजबूती की पुख्ता गारंटी देते हैं। असल में, ये बाल इस बात का सबसे बड़ा सबूत हैं कि टायर को बनाते समय 'क्वालिटी कंट्रोल' का पूरा ध्यान रखा गया है। इनका होना यह दर्शाता है कि सांचे के अंदर की सारी हवा सही तरीके से बाहर निकल गई थी और रबर के बीच कोई हवा का बुलबुला नहीं फंसा है। अगर वह हवा अंदर रह जाती तो टायर की संरचना कमजोर हो सकती थी और वह चलते-चलते फट सकता था।

इसके अलावा, ये 'वेंट स्प्यूज' एक बेहतरीन विजुअल मार्कर के रूप में भी काम करते हैं, जिससे आप तुरंत पहचान सकते हैं कि टायर पूरी तरह से नया है और पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, इनका मौजूद होना यह सुनिश्चित करता है कि मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया 100% सही थी और सांचे के छेद ब्लॉक नहीं थे। इससे आपको एक सुरक्षित और पूरी तरह से ठोस टायर मिला है।


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तकनीकी भाषा में इन्हें क्या कहते हैं?

इंजीनियरिंग और टायर मैन्युफैक्चरिंग की भाषा में इन छोटे-छोटे बालों को 'वेंट स्प्यूज़' या 'टायर निब्स' कहा जाता है। ये सिर्फ बिल्कुल नए टायरों पर ही नजर आते हैं और जैसे-जैसे आप गाड़ी चलाते हैं, कुछ सौ किलोमीटर के बाद ये अपने आप सड़क पर घिसकर खत्म हो जाते हैं।

आखिर ये बनते कैसे हैं?

इनके बनने के पीछे टायर निर्माण की एक बेहद जरूरी प्रक्रिया छिपी है, जिसे वल्केनाइजेशन कहा जाता है। जब फैक्ट्री में टायर को एक खास सांचे में तैयार किया जाता है तो कच्चे रबर पर बहुत तेज गर्मी और हवा का भारी दबाव डाला जाता है ताकि टायर को उसका सही आकार और मजबूती मिल सके। इस सांचे में हवा बाहर निकलने के लिए बहुत बारीक छेद बनाए जाते हैं। 

जैसे ही दबाव के कारण रबर पूरे सांचे में फैलती है, अंदर फंसी हुई हवा इन बारीक छेदों से तेजी से बाहर निकलती है और अपने साथ थोड़ा सा पिघला हुआ रबर भी बाहर ले आती है। यही रबर जब सूखकर सख्त हो जाता है तो वह टायर की सतह पर छोटे-छोटे बालों या 'वेंट स्प्यूज' के रूप में नजर आने लगता है।

क्या ड्राइविंग में इनका कोई फायदा है?

सीधे शब्दों में कहा जाए तो बिल्कुल नहीं। एक बार जब फैक्ट्री से टायर बनकर तैयार हो जाता है तो इन बालों का कोई व्यावहारिक काम नहीं बचता। आपके ड्राइविंग अनुभव पर इनका रत्ती भर भी असर नहीं पड़ता। चाहे वह गाड़ी की परफॉर्मेंस हो, तेज रफ्तार, सड़क पर पकड़ या फिर सुरक्षा, इन रबर के बालों का किसी भी तकनीकी पहलू से कोई लेना-देना नहीं है। ये सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग के दौरान पीछे छूटी हुई निशानियां बन कर रह जाती हैं जो कुछ मील चलने के बाद खुद ही सड़क पर घिसकर साफ हो जाती हैं।

तो फिर इनका होना जरूरी क्यों है?

भले ही ड्राइविंग के दौरान इनका कोई प्रत्यक्ष रोल न हो, लेकिन ये टायर की क्वालिटी और मजबूती की पुख्ता गारंटी देते हैं। असल में, ये बाल इस बात का सबसे बड़ा सबूत हैं कि टायर को बनाते समय 'क्वालिटी कंट्रोल' का पूरा ध्यान रखा गया है। इनका होना यह दर्शाता है कि सांचे के अंदर की सारी हवा सही तरीके से बाहर निकल गई थी और रबर के बीच कोई हवा का बुलबुला नहीं फंसा है। अगर वह हवा अंदर रह जाती तो टायर की संरचना कमजोर हो सकती थी और वह चलते-चलते फट सकता था।

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