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Missing Link Project: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का 'मिसिंग लिंक' क्या है? भारी जाम के बाद फिर आया चर्चा में

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 06 Feb 2026 05:59 PM IST
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सार

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लगे अब तक के सबसे लंबे ट्रैफिक जाम में से एक के बाद, एक बार फिर सबकी नजरें लंबे समय से अटके मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट पर टिक गई हैं। जानें क्या है यह मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट?

Mumbai–Pune Expressway Missing Link: Route, Benefits and Timeline
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लगा 25 किमी लंबा जाम - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हाल ही में लगे भीषण जाम के बाद एक बार फिर 'मिसिंग लिंक' परियोजना चर्चा के केंद्र में आ गई है। 13.3 किमी लंबा यह प्रोजेक्ट इसी मकसद से तैयार किया जा रहा है कि खोपोली-खंडाला घाट सेक्शन में बार-बार होने वाली भीड़, दुर्घटनाओं और घंटों लंबे जाम से राहत मिल सके।

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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हालात क्यों बिगड़े?
इस हफ्ते खंडाला घाट में एक गैस टैंकर पलटने से हालात बेकाबू हो गए।
करीब 32 घंटे तक चला जाम इतना लंबा था कि कई यात्रियों को गाड़ियों में ही रात बितानी पड़ी। एंबुलेंस, ट्रक और निजी वाहन- हजारों गाड़ियां किलोमीटरों तक फंसी रहीं।जाम खुलने के बाद यह सवाल तेज हो गया कि क्या बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर मिसिंग लिंक, इस संकट की तीव्रता को कम कर सकता था। 

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राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या रही?
महाराष्ट्र में कई नेताओं ने इस घटना पर सरकार की तैयारी और आपात प्रबंधन पर सवाल उठाए।
राज ठाकरे ने जाम को लेकर तीखी आलोचना की, वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को इमरजेंसी ट्रैफिक रिस्पॉन्स प्लान तैयार करने और मिसिंग लिंक को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट क्या है?
मिसिंग लिंक एक 6,600 करोड़ रुपये से अधिक की मेगा परियोजना है। जिसका उद्देश्य खोपोली-खंडाला घाट के संकरे हिस्से को बायपास करना है। जो कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के सबसे भीड़भाड़ वाले और दुर्घटना संभावित हिस्सों में से एक है।
फिलहाल इस सेक्शन में तीखे मोड़, चढ़ाई-उतराई और मर्जिंग ट्रैफिक के कारण जाम आम बात है, खासतौर पर वीकेंड और छुट्टियों में।

इस प्रोजेक्ट में क्या-क्या बनाया जा रहा है?

  • दो ट्विन टनल: लगभग 1.6 किमी और 8.9 किमी लंबी, जो पहाड़ियों के भीतर से गुजरेंगी
  • दो केबल-स्टे ब्रिज: गहरी घाटियों पर, जिनमें एक टाइगर वैली के ऊपर होगा
  • नया अलाइनमेंट: खोपोली एग्जिट से कुसगांव तक दूरी 19.8 किमी से घटकर 13.3 किमी

इसके पूरा होने पर यात्रा समय में 25–30 मिनट की बचत होने का अनुमान है, और संभावित स्पीड लिमिट 120 किमी/घंटा तक हो सकती है।

चालू होने के बाद यात्रियों को क्या फायदा होगा?

  • मुंबई–पुणे सफर में लगभग 30 मिनट कम समय
  • दूरी में करीब 6 किमी की कमी
  • खतरनाक ढलानों और हेयरपिन मोड़ों से मुक्ति
  • भारी वाहनों के लिए ज्यादा सुरक्षित और आसान रूट


प्रोजेक्ट में देरी क्यों हुई और अब स्थिति क्या है?
इस परियोजना का टेंडर 2019 में हुआ था और लक्ष्य 2022 तक पूरा करने का था।
हालांकि, कठिन भू-भाग, तकनीकी चुनौतियां, मौसम और महामारी के कारण समय-सीमा बार-बार खिसकती रही।MSRDC के एक अधिकारी के अनुसार, "अब सिर्फ फिनिशिंग वर्क बाकी है और मई 2026 तक प्रोजेक्ट के खुलने की उम्मीद है।" 

क्या सिर्फ मिसिंग लिंक ही काफी है?
इंजीनियरों और यात्रियों का मानना है कि केवल नया रूट बनाना पर्याप्त नहीं होगा।
पूरे एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, हेजर्ड रिस्पॉन्स और इमरजेंसी कोऑर्डिनेशन की भी सख्त जरूरत है।

यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?
नियमित यात्री किरण शेनॉय कहते हैं कि समस्या सिर्फ सड़क की नहीं, बल्कि तैयारी की भी है।
उनके मुताबिक, "टैंकर हादसे ने दिखा दिया कि खतरनाक सामान से जुड़ी दुर्घटनाओं के लिए हमारी तैयारियां कमजोर हैं। बेहतर समन्वय से जाम की अवधि काफी कम की जा सकती थी।" 

फिलहाल यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
जब तक मिसिंग लिंक पूरी तरह चालू नहीं हो जाता,

  • वीकेंड और छुट्टियों में यात्रा से पहले अतिरिक्त समय लेकर चलें
  • संभावित देरी को ध्यान में रखकर प्लान बनाएं

निष्कर्ष
मिसिंग लिंक परियोजना मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। लेकिन हालिया जाम ने यह भी साफ कर दिया है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ बेहतर आपात प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। 

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