यूपी का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे शुरू: टॉप स्पीड, रूट और दोपहिया की अनुमति है या नहीं ; जानें हर जरूरी बात
Ganga Expressway India: गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ उत्तर प्रदेश को 594 किमी लंबा देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में से एक मिला है। आपको बता दें कि ये यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है और इसके बनने के बाद देश के कुल एक्सप्रेसवे में राज्य का हिस्सा बढ़कर 60% हो गया है। मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला यह हाई-स्पीड कॉरिडोर सफर का समय 10-12 घंटे से घटाकर 6-8 घंटे कर देगा। इस एक्सप्रेसवे में हाई स्पीड लिमिट, अत्याधुनिक टोल सिस्टम और एयरस्ट्रिप जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
विस्तार
बीते 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में नए 'गंगा एक्सप्रेसवे' का उद्घाटन कर दिया है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे है। इसे बनाने में करीब 36,320 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला यह 6-लेन का एक्सप्रेसवे भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड रोड प्रोजेक्ट्स में से एक है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बाद शुरू हुए इस नए प्रोजेक्ट के बारे में एक ऑटोमोबाइल और सफर के नजरिए से आपको जो कुछ भी जानने की जरूरत है, वो सब इस लेख में बताया गया है:
1. क्या है स्पीड लिमिट?
यह एक हाई-टेक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है। इसे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए फिलहाल 6-लेन का बनाया गया है, पर इसे 8-लेन तक विस्तार देने की भी सुविधा है। रफ्तार के शौकीनों के लिए यह एक्सप्रेसवे बेहद खास है क्योंकि यहां कारों के लिए अधिकतम स्पीड लिमिट 120 किमी/घंटा तय की गई है, जो वर्तमान में भारत में सबसे ज्यादा स्पीड है। हालांकि, इस तेज रफ्तार के साथ सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा गया है। ओवरस्पीडिंग पर लगाम कसने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरे रूट पर हाई-डेफिनेशन सीसीटीवी कैमरे तैनात किए गए हैं। ऐसे में मुसाफिरों को सलाह दी जाती है कि वे एक सुरक्षित और सुगम सफर के लिए हमेशा तय सीमा के भीतर ही अपनी गाड़ी चलाएं।
2. क्या इस एक्सप्रेसवे पर बाइक ले जा सकते हैं?
इस नए एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों की एंट्री पूरी तरह से बैन है। चूंकि यह एक हाई-स्पीड कॉरिडोर है, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे अधिकारियों की निगरानी रहेगी।
3. रूट, शहर और सफर का समय
यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी के औद्योगिक केंद्रों को पूर्वी यूपी के कृषि प्रधान क्षेत्रों के साथ एक धागे में पिरोने का काम करेगा। यह शानदार रूट मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक कुल 12 जिलों- हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ से होकर गुजरता है। इस नए कॉरिडोर की सबसे बड़ी खूबी समय की भारी बचत है। जो सफर पहले खराब सड़कों या ट्रैफिक के कारण 10 से 12 घंटे ले लेता था, वह अब इस आधुनिक एक्सप्रेसवे की बदौलत महज 6 से 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। यह न केवल सफर को आरामदायक बनाएगा, बल्कि दोनों छोरों के बीच की दूरियों को भी काफी कम कर देगा।
4. कहां-कहां कटेंगे टोल?
सफर के दौरान टोल भुगतान के लिए इस 6-लेन एक्सप्रेसवे पर दो मुख्य टोल प्लाजा तैयार किए गए हैं। आपके सफर की शुरुआत और अंत में पड़ने वाले ये टोल पॉइंट्स बेहद आधुनिक हैं। इनमें पहला मेरठ के बिजौली गांव के पास स्थित है, जबकि दूसरा और अंतिम टोल प्रयागराज की सोरांव तहसील के जुदापुर दांदू गांव में बनाया गया है। यात्रियों को टोल पर लंबी लाइनों से बचाने और ट्रैफिक को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रयागराज वाले इस आखिरी टोल प्लाजा को खास तौर पर 16-लेन का बनाया गया है, ताकि वाहन बिना किसी देरी के अपनी मंजिल की ओर बढ़ सकें।
5. एक्सप्रेसवे की खास बातें
इस एक्सप्रेसवे की खूबियां इसे सिर्फ एक साधारण सड़क से कहीं ऊपर ले जाती हैं। सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से इसमें शाहजहांपुर के पास 3.5 किलोमीटर लंबी एक विशेष हवाई पट्टी तैयार की गई है, ताकि आपातकालीन स्थिति में वायुसेना के लड़ाकू विमान यहां सुरक्षित लैंड कर सकें। कनेक्टिविटी के मामले में भी यह बेजोड़ है, यह रूट आगे चलकर यमुना और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ जेवर एयरपोर्ट और प्रस्तावित हरिद्वार एक्सटेंशन से भी जुड़ जाएगा। दरअसल, इसे एक 'मल्टी-पर्पज कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया गया है, जहां सड़क के साथ-साथ बड़े मैन्युफैक्चरिंग जोन और लॉजिस्टिक्स पार्क भी होंगे, जो क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगे।
6. रोजगार और आर्थिक फायदा
यह प्रोजेक्ट पश्चिमी और पूर्वी यूपी के बीच एक बड़े पुल का काम करेगा। यूपी सरकार ने इस रूट के किनारे 6,507 एकड़ में 12 मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए 47 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव भी मिल चुके हैं। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण मेरठ, प्रयागराज और गाजियाबाद जैसे आसपास के इलाकों में जमीन की कीमतें 20% से 50% तक बढ़ने की उम्मीद है।
