आपकी कार कितनी सुरक्षित?: इंटरनेट-फोन एप्स से लीक हो सकता है पर्सनल डाटा, नई स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
- कनेक्टेड कारों में साइबर खतरे बढ़े।
- बाहरी सेवाओं की खामियां करीब 40 प्रतिशत।
- शोधकर्ताओं ने 413 सुरक्षा खामियों का विश्लेषण किया।
- घर का पता और सफर उजागर हो सकता।
- फॉक्सवैगन डेटा लीक में आठ लाख ग्राहक प्रभावित
विस्तार
आपकी कार लॉक है, चाबी आपके पास है और आप निश्चिंत हैं कि आपकी निजी जानकारी सुरक्षित है, लेकिन इंटरनेट से जुड़ी आधुनिक कारों के मामले में यह भरोसा गलत साबित हो सकता है। कार के मोबाइल एप, ऑनलाइन सेवाओं और क्लाउड सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियां आपके घर का पता, यात्रा के रास्ते और रोजमर्रा की गतिविधियों का ब्योरा उजागर कर सकती हैं। एक नए अध्ययन में इस गंभीर खतरे की ओर ध्यान दिलाया है। यह अध्ययन सॉफ्टवेयर क्वालिटी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
क्या हुआ अध्ययन और क्या सच्चाई आई सामने?
- स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय और चाल्मर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े शोधकर्ताओं ने पाया कि कारों की साइबर सुरक्षा अब केवल उनके भीतर लगे कंप्यूटरों तक सीमित नहीं है। उनसे जुड़ी बाहरी डिजिटल सेवाएं भी हमले का रास्ता बन सकती हैं।
- शोधकर्ताओं ने वर्ष 2022 से सितंबर 2024 के बीच दर्ज 413 सुरक्षा खामियों का विश्लेषण किया और इसकी तुलना वर्ष 2010 से 2019 के अध्ययन से की। पुराने अध्ययन में बाहरी एप और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी खामियां कुल मामलों का करीब सातवां हिस्सा थीं। नए अध्ययन में यह हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गई। यानी इनकी हिस्सेदारी करीब तीन गुना बढ़ी और यह कार के भीतर की कंप्यूटर प्रणालियों में मिली खामियों के लगभग बराबर पहुंच गई।
आठ लाख ग्राहकों का डेटा हुआ लीक
- अध्ययन से जुड़ी शोधकर्ता सृजिता बसु के अनुसार, इन प्रणालियों में व्यक्ति के रहने की जगह, यात्रा के स्थान और समय की जानकारी हो सकती है। खतरा केवल कार के नियंत्रण में हस्तक्षेप का नहीं, बल्कि निजी जिंदगी का ब्योरा हासिल करने का भी है। रिपोर्ट में वर्ष 2024 में सामने आए फॉक्सवैगन के डेटा लीक का उल्लेख है।
- इसमें करीब आठ लाख ग्राहकों की लोकेशन और संपर्क संबंधी जानकारी उजागर हुई थी। एक बाहरी सेवा प्रदाता के असुरक्षित क्लाउड लॉगिन विवरण के कारण डेटा तक पहुंच संभव हुई। यह घटना बताती है कि कार निर्माता से जुड़ी किसी तीसरी कंपनी की सुरक्षा चूक भी ग्राहकों की निजता को खतरे में डाल सकती है।
इंफोटेनमेंट सिस्टम भी जोखिम भरा
- खास बात यह है कि कार का इंफोटेनमेंट सिस्टम भी जोखिम से अछूता नहीं है। वर्ष 2015 में साइबर सुरक्षा शोधकर्ता चार्ली मिलर और क्रिस वैलासेक ने जीप चेरोकी के इंफोटेनमेंट सिस्टम के जरिए दूर से स्टीयरिंग और ब्रेक पर नियंत्रण हासिल करने की संभावना प्रदर्शित की थी।
- अध्ययन में वर्ष 2022 की स्कोडा सुपर्ब के इंफोटेनमेंट सिस्टम की ऐसी खामी भी मिली, जिससे कुछ परिस्थितियों में वाई-फाई के जरिये सिस्टम ठप हो सकता था।