जेएसएससी-सीजीएल: पेपर लीक मामले में दो आरोपियों को राहत नहीं, अदालत ने खारिज की जमानत याचिका
झारखंड के JSSC CGL पेपर लीक मामले में अदालत ने रामकृष्ण कुमार सिंह और रितेश कुमार सिंह की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। सीआईडी के अनुसार, सिंडिकेट अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलता था और बोकारो में प्रश्न-उत्तर रटवाए गए थे।
विस्तार
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में अदालत ने दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की ओर से अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर सफल अभ्यर्थी सह एजेंट रामकृष्ण कुमार सिंह और एजेंट रितेश कुमार सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया गया।
जमीन गिरवी रखकर दी थी रकम
सीआईडी ने अदालत को बताया कि गिरिडीह जिले के धनवार थाना क्षेत्र के कटरियाटांड़ निवासी रामकृष्ण कुमार सिंह ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पास कराने वाले सिंडिकेट को पैसे देने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद उसका नाम अंतिम मेधा सूची में शामिल नहीं हो सका, जबकि वह दस्तावेज सत्यापन में सफल रहा था। पुलिस ने उसे 26 सितंबर को गिरफ्तार किया था।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने साथ-साथ अन्य अभ्यर्थियों की भी सेटिंग कराई थी। इसके लिए उसने जमानत के तौर पर अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र बंधक के रूप में जमा करवाए थे। सीआईडी के अनुसार, 25 दिसंबर 2024 को दस्तावेज सत्यापन के दौरान प्रमाणपत्र सौंपने से लेकर सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक सिंडिकेट के साथी अभ्यर्थियों के साथ मौजूद रहे, ताकि कथित फर्जीवाड़े का खुलासा न हो सके।
बोकारो में अभ्यर्थियों को रटवाए प्रश्न और उत्तर
मामले का दूसरा आरोपी रितेश कुमार सिंह परीक्षा धांधली के सिंडिकेट के कथित मुख्य सूत्रधार मिथिलेश सिंह का करीबी रिश्तेदार है। सीआईडी की जांच में सामने आया कि रितेश खुद भी परीक्षा का अभ्यर्थी था और अन्य अभ्यर्थियों के लिए सेटर की भूमिका निभा रहा था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मुख्य सरगना मिथिलेश सिंह के निर्देश पर रितेश ने 20 सितंबर 2024 को बोकारो के दुग्धा केंद्र पर 20 से 22 अभ्यर्थियों को प्रश्न और उत्तर रटवाए थे। आरोप है कि परीक्षा पास कराने के इस कथित खेल में शामिल प्रत्येक अभ्यर्थी से सिंडिकेट ने मोटी रकम वसूलने का सौदा तय किया था।
रांची से पटना तक सक्रिय था बिचौलियों का नेटवर्क
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए रांची से पटना तक बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय था। परीक्षा पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले जा रहे थे।
सीआईडी ने अदालत को बताया कि सिंडिकेट से जुड़े बिचौलिए संजय कुमार को अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कराने के एवज में साढ़े पांच लाख रुपये का भुगतान किया था। एजेंसी इन साक्ष्यों के आधार पर पूरे सिंडिकेट के नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली का खुलासा करने में जुटी है।