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ओपनएआई के दफ्तर में जासूसी का भंडाफोड़: मीटिंग रूम में मिला खुफिया माइक, एफबीआई ने इंजीनियर को दबोचा
Wed, 14 Oct 2026 12:29 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 14 Oct 2026 12:29 PM IST
सार
ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के सैन फ्रांसिस्को स्थित हेडक्वार्टर में जासूसी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। FBI ने कंपनी के ही एक सऊदी इंजीनियर को अरेस्ट किया है, जिसने अधिकारियों की खुफिया बातें सुनने के लिए कॉन्फ्रेंस रूम में रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपाया था। इस मामले में डेटा लीक होने की कोई खबर नहीं आई है। आइए पूरी खबर विस्तार से जानते हैं।
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जासूसी के आरोप में एक कर्मचारी गिरफ्तार।
- फोटो : अमेरिकी न्याय विभाग
विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में क्रांति लाने वाली अमेरिकी कंपनी ओपनएआई (OpenAI) हाल ही में एक बड़ी कॉर्पोरेट जासूसी का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) ने कंपनी की जासूसी करने के मामले में ओपनएआई के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। यह कर्मचारी सऊदी अरब का नागरिक है, जिस पर कंपनी के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में खुफिया ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाने का गंभीर आरोप है।
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, आरोपी की पहचान अब्दुलरहमान अलफोजान के रूप में हुई है। अलफोजान जुलाई 2025 से सैन फ्रांसिस्को स्थित ओपनएआई के हेडक्वार्टर में बतौर इंजीनियर काम कर रहा था। उसे 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और 13 अक्टूबर को फेडरल कोर्ट में पेश किया गया।
टीवी के पीछे टॉयलेट पेपर में छिपाया था जासूसी माइक
कंपनी के मुताबिक, 28 सितंबर को यह खूफिया डिवाइस लगाया गया था। 2 दिन बाद, 30 सितंबर को ओपनएआई के कर्मचारियों को एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में एक छिपा हुआ रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। इस डिवाइस को बड़ी चालाकी से टॉयलेट पेपर में लपेटकर रूम में लगे टेलीविजन के पिछले हिस्से में मौजूद यूएसबी पोर्ट में लगाया गया था। इस डिवाइस में माइक्रोफोन, कैमरा और डेटा स्टोर करने के लिए एसडी कार्ड लगाया गया था। एन्क्रिप्टेड होने के कारण रिकॉर्डिंग को सुना नहीं जा सका है।
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कैसे पकड़ा गया जासूस?
डिवाइस मिलने के बाद अलफोजान शक के घेरे में आ गया था क्योंकि उसने ऑफिस की लोकेशंस, मीटिंग रूम के कैलेंडर और कंपनी के बड़े अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर कई अजीबोगरीब पूछताछ की थी। जब सुरक्षाकर्मियों ने उसके बैग की तलाशी ली, तो उसमें उसकी आईडी और वॉलेट के साथ एक और वैसा ही रिकॉर्डिंग डिवाइस बरामद हुआ।
एफबीआई के मुताबिक, अलफोजान ने डिवाइस लगाने की साजिश पहले से कर रखी थी। उसने डिवाइस बनाने के लिए एआई चैटबॉट से कई बार सवाल पूछे थे। इनमें डिवाइस कैसे बनाना है, उसे कैसे छिपाना है, रिकॉर्डिंग कैसे करनी है, जैसे सावाल पूछे गए थे। जिस मीटिंग रूम में यह डिवाइस लगाया गया था, वहां कंपनी के अधिकारी कई अहम मुद्दों पर चर्चा करते थे।
एफबीआई ने क्या कहा?
एफबीआई के डायरेक्टर काश पटेल ने अपने बयान में कहा, "अलफोजान ने कंपनी के सीक्रेट कम्युनिकेशंस को रिकॉर्ड करने के लिए जानबूझकर कॉन्फ्रेंस रूम में डिवाइस छिपाया था।" उनका मानना है कि इस जासूसी का मकसद कंपनी के आने वाले एआई प्रोडक्ट्स की खुफिया जानकारी चुराना था। एफबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि अलफोजान ने यह डिवाइस छिपाने और सेंसिटिव लोकेशंस ढूंढने के लिए एक प्रोडक्टिविटी टूल और चैटबॉट की मदद ली थी।
डेटा सुरक्षित, आरोपी को किया गया फायर
जासूसी के इस प्रयास के बावजूद ओपनएआई ने स्पष्ट किया है कि कंपनी का कोई भी कॉन्फिडेंशियल कोड, मॉडल कॉन्फिगरेशन या ग्राहकों का डेटा चोरी नहीं हुआ है। फिलहाल कंपनी ने अलफोजान को नौकरी से निकाल दिया है।
35 साल का अलफोजान अमेरिका में स्थायी रूप से रह रहा है। वह जुलाई 2025 में ओपनएआई से जुड़ा था। अगर आरोप साबित होते हैं, तो उसे 5 साल तक की जेल, 250,000 डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रहने की सजा हो सकती है।
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अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, आरोपी की पहचान अब्दुलरहमान अलफोजान के रूप में हुई है। अलफोजान जुलाई 2025 से सैन फ्रांसिस्को स्थित ओपनएआई के हेडक्वार्टर में बतौर इंजीनियर काम कर रहा था। उसे 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और 13 अक्टूबर को फेडरल कोर्ट में पेश किया गया।
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टीवी के पीछे टॉयलेट पेपर में छिपाया था जासूसी माइक
कंपनी के मुताबिक, 28 सितंबर को यह खूफिया डिवाइस लगाया गया था। 2 दिन बाद, 30 सितंबर को ओपनएआई के कर्मचारियों को एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में एक छिपा हुआ रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। इस डिवाइस को बड़ी चालाकी से टॉयलेट पेपर में लपेटकर रूम में लगे टेलीविजन के पिछले हिस्से में मौजूद यूएसबी पोर्ट में लगाया गया था। इस डिवाइस में माइक्रोफोन, कैमरा और डेटा स्टोर करने के लिए एसडी कार्ड लगाया गया था। एन्क्रिप्टेड होने के कारण रिकॉर्डिंग को सुना नहीं जा सका है।
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कैसे पकड़ा गया जासूस?
डिवाइस मिलने के बाद अलफोजान शक के घेरे में आ गया था क्योंकि उसने ऑफिस की लोकेशंस, मीटिंग रूम के कैलेंडर और कंपनी के बड़े अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर कई अजीबोगरीब पूछताछ की थी। जब सुरक्षाकर्मियों ने उसके बैग की तलाशी ली, तो उसमें उसकी आईडी और वॉलेट के साथ एक और वैसा ही रिकॉर्डिंग डिवाइस बरामद हुआ।
एफबीआई के मुताबिक, अलफोजान ने डिवाइस लगाने की साजिश पहले से कर रखी थी। उसने डिवाइस बनाने के लिए एआई चैटबॉट से कई बार सवाल पूछे थे। इनमें डिवाइस कैसे बनाना है, उसे कैसे छिपाना है, रिकॉर्डिंग कैसे करनी है, जैसे सावाल पूछे गए थे। जिस मीटिंग रूम में यह डिवाइस लगाया गया था, वहां कंपनी के अधिकारी कई अहम मुद्दों पर चर्चा करते थे।
एफबीआई ने क्या कहा?
एफबीआई के डायरेक्टर काश पटेल ने अपने बयान में कहा, "अलफोजान ने कंपनी के सीक्रेट कम्युनिकेशंस को रिकॉर्ड करने के लिए जानबूझकर कॉन्फ्रेंस रूम में डिवाइस छिपाया था।" उनका मानना है कि इस जासूसी का मकसद कंपनी के आने वाले एआई प्रोडक्ट्स की खुफिया जानकारी चुराना था। एफबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि अलफोजान ने यह डिवाइस छिपाने और सेंसिटिव लोकेशंस ढूंढने के लिए एक प्रोडक्टिविटी टूल और चैटबॉट की मदद ली थी।
डेटा सुरक्षित, आरोपी को किया गया फायर
जासूसी के इस प्रयास के बावजूद ओपनएआई ने स्पष्ट किया है कि कंपनी का कोई भी कॉन्फिडेंशियल कोड, मॉडल कॉन्फिगरेशन या ग्राहकों का डेटा चोरी नहीं हुआ है। फिलहाल कंपनी ने अलफोजान को नौकरी से निकाल दिया है।
35 साल का अलफोजान अमेरिका में स्थायी रूप से रह रहा है। वह जुलाई 2025 में ओपनएआई से जुड़ा था। अगर आरोप साबित होते हैं, तो उसे 5 साल तक की जेल, 250,000 डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रहने की सजा हो सकती है।