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Shiprocket: D2C ब्रांड्स बन रहे राष्ट्रीय खिलाड़ी, जानिए कैसे शिपरॉकेट से छोटे उद्योगों को मिल रही पहचान

Anil Vaishya Anil Vaishya
Updated Sat, 11 Apr 2026 02:23 AM IST
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सार

शिपरॉकेट जैसे मंचों से छोटे शहरों के MSMEs को डिजिटल और लॉजिस्टिक्स का मजबूत आधार मिल रहा है। जिससे ये एमएसएमई कंपनियां डायरेक्ट टू कंज्यूमर मॉडल को तेजी से अपना रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर सफल हो रही हैं। 

Shiprocket changing india e commerce sector local d2c brands became national
छोटे शहरों के MSMEs को मिल रहा डिजिटल और लॉजिस्टिक्स का मजबूत आधार - फोटो : एएनआई
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विस्तार

भारत में ई-कॉमर्स का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल महानगरों और बड़े मार्केटप्लेस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सूरत, लखनऊ, कोच्चि और रायपुर जैसे शहरों के छोटे और मझोले ब्रांड्स भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। ये ब्रांड्स अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंच बनाते हुए डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल को तेजी से अपना रहे हैं।
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क्या है शिपरॉकेट?
इस बदलाव के केंद्र में Shiprocket (शिपरॉकेट) एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। यह प्लेटफॉर्म एमएसएमई कंपनियों (छोटे और मझोले उद्योग) के लिए एंड-टू-एंड ई-कॉमर्स समाधान उपलब्ध कराता है, जिसमें शिपिंग, फुलफिलमेंट, चेकआउट और पोस्ट-ऑर्डर मैनेजमेंट जैसी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलती हैं।
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उद्योग से जुड़े हालिया अध्ययनों के अनुसार, छोटे और लघु उद्योग पहले से ही देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहे हैं और आने वाले समय में ऑनलाइन रिटेल ग्रोथ में उनकी हिस्सेदारी और बढ़ने की संभावना है। खासकर D2C वर्ग पारंपरिक मार्केटप्लेस की तुलना में अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें गैर-मेट्रो शहरों का योगदान उल्लेखनीय है।

एमएसएमई कंपनियों के सामने कई चुनौतियां
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। वहीं, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए सोशल और चैट कॉमर्स एक नए बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां लोकल बुटीक, क्षेत्रीय फूड ब्रांड्स और किराना स्टोर्स सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, MSMEs को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। उच्च शिपिंग लागत, विभिन्न सेवा प्रदाताओं के बीच समन्वय की कमी, मल्टीपल कूरियर पार्टनर्स और पेमेंट गेटवे का प्रबंधन, रिटर्न और रिकॉन्सिलिएशन की जटिलताएं छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी बाधाएं हैं। साथ ही, अधिकांश छोटे व्यवसायों के पास तकनीकी टीम रखने की क्षमता भी सीमित होती है।

शिपरॉकेट ऐसे कर रहा एमएसएमई कंपनियों की मदद
इन समस्याओं के समाधान के रूप में Shiprocket ने एक सरल और प्रभावी प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह कई कूरियर पार्टनर्स को एक ही इंटरफेस में जोड़ता है, जिससे व्यापारी हर ऑर्डर के लिए कीमत, डिलीवरी समय और रेटिंग की तुलना कर सकते हैं। इसके फुलफिलमेंट सेंटर और यूनिफाइड कॉमर्स सिस्टम ऑनलाइन और ऑफलाइन चैनलों को जोड़ते हैं, जिससे लोकल स्टोर का स्टॉक भी ऑनलाइन ऑर्डर पूरा कर सकता है।

इसके अलावा, शिपरॉकेट का क्रॉस-बॉर्डर समाधान भारतीय व्यापारियों को 100 से अधिक देशों में अपने उत्पाद भेजने की सुविधा देता है। इस तरह, सेलम के साड़ी ब्रांड से लेकर भोपाल के स्नैक निर्माता तक, शिपरॉकेट अब केवल एक सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरकर सामने आया है, जो क्षेत्रीय D2C ब्रांड्स को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचने में सक्षम बना रहा है।
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