सफर पर निकलने से पहले यात्रा बीमा है जरूरी: केवल पांच मिनट की जांच, सस्ती नहीं सही पॉलिसी चुनें
विदेश ही नहीं, घरेलू सफर में भी छोटी-सी पॉलिसी बड़ी आर्थिक परेशानी से बचा सकती है।सफर पर निकलने से पहले यात्रा बीमा से जुड़ी पांच मिनट की जांच करना अहम है। इसके अलावा सस्ती नहीं सही पॉलिसी चुनने पर ध्यान दें।
विस्तार
पिछले साल राहुल अपने परिवार के साथ शिमला गए थे। अचानक उनके पिता को सीने में तेज दर्द उठा। अनजान शहर और अचानक अस्पताल का खर्च। सारी यात्रा का मजा खराब हो गया। कई लोगों को लगता है कि ट्रैवल इंश्योरेंस केवल विदेश जाने वालों के लिए होता है या फिर वीजा की औपचारिकता भर है।
सच यह है कि यात्रा के दौरान होने वाली अनिश्चितता पासपोर्ट देखकर नहीं आती। फ्लाइट छूटना, सामान देर से मिलना, अचानक बीमारी, दुर्घटना या आपात स्थिति घरेलू सफर में भी उतनी ही परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए अब यात्रा बीमा को अतिरिक्त खर्च नहीं, बल्कि बजट का एक अनिवार्य हिस्सा समझना चाहिए।
यात्रा में जोखिम केवल दुर्घटना का नहीं
यात्रा के दौरान कई ऐसे छिपे हुए जोखिम होते हैं, जिनकी हम कल्पना भी नहीं करते। होटल और फ्लाइट की एडवांस बुकिंग का पैसा फंस जाना, चेक-इन बैगेज का देर से मिलना, पासपोर्ट खो जाना या प्राकृतिक आपदा के कारण ट्रिप बीच में रोकना, इन सभी परिस्थितियों में खर्च तेजी से बढ़ सकता है। उपयुक्त यात्रा बीमा पॉलिसी की शर्तों और सीमाओं के तहत ऐसी आपात स्थितियों में आर्थिक और सहायता सुरक्षा प्रदान करती है।
यात्रा बीमा खरीदते वक्त किन बातों का रखें ध्यान?
- सिर्फ सबसे सस्ती पॉलिसी चुनने की भूल न करें।
- सबसे पहले आपात चिकित्सा खर्च और अस्पताल में भर्ती होने का कवर देखें।
- जरूरत पड़ने पर बेहतर अस्पताल तक पहुंचाने और गंभीर स्थिति में शहर वापसी जैसे कवर को जांचें
- ट्रिप कैंसिलेशन, ट्रिप कर्टेलमेंट, फ्लाइट में देरी, मिस्ड कनेक्शन और होटल में अतिरिक्त ठहराव के कवर को देखें
- बैगेज खोने या देर से मिलने पर मिलने वाली राशि वास्तविक नुकसान की पूरी भरपाई करे
- व्यक्तिगत दुर्घटना कवर और थर्ड-पार्टी देनदारी।
- यदि आप ट्रैकिंग, स्कीइंग या स्कूबा डाइविंग जैसी साहसिक गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं, तो सामान्य पॉलिसी शायद इसे कवर न करे। पहले से मौजूद बीमारियां और अन्य अपवादों को ध्यान से पढ़ें।
क्लेम के समय छोटी सावधानियां
मुश्किल वक्त में सबसे पहले इलाज व सुरक्षा को प्राथमिकता दें। इसके साथ ही बीमा कंपनी को तय समय के भीतर सूचना दें। पॉलिसी नंबर और हेल्पलाइन नंबर हमेशा अपने और परिवार के पास रखें। फ्लाइट में देरी या सामान खोने पर एयरलाइन से लिखित प्रमाण लें। डॉक्टर के पर्चे, अस्पताल के बिल, बोर्डिंग पास और सभी रसीदें संभालकर रखें।
घरेलू यात्रा में भी क्यों जरूरी है बीमा?
भारत में लोग रेल, बस, कार और विमान से लगातार सफर करते हैं। तीर्थयात्रा हो, फैमिली वेकेशन हो या बिजनेस ट्रिप, हम अक्सर यह मान लेते हैं कि अपने ही देश में हैं, तो सब संभाल लेंगे। यही गलतफहमी बीमा को नजरअंदाज करवाती है।
दूरदराज के किसी इलाके में स्वास्थ्य आपातकाल या सामान चोरी जैसी घटनाएं वास्तविक नुकसान पहुंचाती हैं। कुछ घरेलू पॉलिसियां भी दुर्घटना, मेडिकल खर्च और ट्रिप कैंसिलेशन को कवर करती हैं। इसलिए अपने सफर के तरीके के अनुसार सही कवर चुनना बुद्धिमानी है।
जानना जरूरी है: सफर से पहले पांच मिनट की जांच
यात्रा पर निकलने से पहले केवल पांच मिनट निकालकर अपनी पॉलिसी के दस्तावेज, नाम, गंतव्य, बीमा राशि और अपवादों की जांच अवश्य कर लें। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर अपने फोन में सेव करें और परिवार के सदस्यों के साथ साझा करें। ये पांच मिनट मुश्किल समय में बड़ा खर्च बचा सकते हैं।
सस्ती नहीं, सही पॉलिसी चुनें
यात्रा बीमा खरीदते समय केवल सबसे कम प्रीमियम की तुलना करना नासमझी है। पॉलिसी चुनते समय कुछ अहम बातों का ध्यान रखें:
- गंतव्य, यात्रा की अवधि, यात्रियों की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखें। वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिकल कवर, को-पेमेंट और पहले से मौजूद बीमारियों की शर्तों को विशेष रूप से पढ़ें।
- ट्रेकिंग, स्कीइंग या स्कूबा डाइविंग जैसी एडवेंचर एक्टिविटीज सामान्य पॉलिसी में कवर नहीं होतीं। नशे में हुई घटना, कानून का उल्लंघन या छुपाई गई जानकारी आपका क्लेम खारिज करवा सकती है।
- यदि आप साल में एक बार जाते हैं, तो सिंगल-ट्रिप पॉलिसी लें; बार-बार यात्रा करने वाले मल्टी-ट्रिप विकल्प चुन सकते हैं। पॉलिसी से जुड़े नियम जांच लें।