NBFCs Lending: पहली बार लोन लेने वालों के बीच एनबीएफसी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत, जानिए रिपोर्ट में और क्या
जून 2026 तक नए ऋण प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं के कुल ऋण का लगभग आधा 47 प्रतिशत हिस्सा है। वित्त उद्योग विकास परिषद (एफआईडीसी) और ट्रांसयूनियन सीआईबीएल की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार 36 प्रतिशत उपभोक्ता एनबीएफसी के माध्यम से ऋण प्राप्त किया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) औपचारिक ऋण हासिल करने का जरिया बन गई हैं। जून 2026 तक नए ऋण प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं के कुल ऋण का लगभग आधा 47 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं का है। वित्त उद्योग विकास परिषद (एफआईडीसी) और ट्रांसयूनियन सीआईबीएल की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार 36 प्रतिशत उपभोक्ता एनबीएफसी के माध्यम से ऋण प्राप्त किया है। जबकि सभी ऋण-सक्रिय उपभोक्ताओं (वे लोग या संस्थाएं मौजूद हैं, जिनके पास कम से कम एक सक्रिय (लाइव) ऋण या क्रेडिट कार्ड खाता होता है,) में से 46 प्रतिशत के पास एनबीएफसी ऋण हैं।
ऋण-सक्रिय उपभोक्ता आधार कितना बढ़ा?
रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में एनबीएफसी का विस्तार पिछले कुछ वर्षों से लगातार हुआ है, वहीं उनके ऋण-सक्रिय उपभोक्ता आधार में लगभग सात गुना विस्तार हुआ है और रिटेल ऋण वितरण में उनकी हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई हैं। साथ ही पहली बार ऋण लेने वाले ग्राहकों की एनबीएफसी द्वारा दिए गए ऋणों में हिस्सेदारी कम हुई है। जो जून 2016 में 28 प्रतिशत थी, वह जून 2026 में 16 प्रतिशत हो गई है। जिससे यह पता चलता है, कि एनबीएफसी उन्ही ग्राहकों को अधिक सेवाएं देर रही है, जिनका पहले से ही ऋण इतिहास है। हालांकि मात्रा के हिसाब से रिटेल ऋण वितरण में एनबीएफसी की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत थी, लेकिन मूल्य के हिसा बसे जून 2026 में यह 30 प्रतिशत रही, जो छोटे ऋणों में उनकी मजबूती उपस्थित और ग्राहकों द्वारा विविध ऋण आवश्यकताओं को दिखाती है।
छोटे लोन और गहरी पहुंच का कितना फायदा?
रिपोर्ट में बताया गया है, छोटे ऋणों में एनबीएफी की स्थिति मजबूत बनी हुई है। 2 लाख रुपये तक के ऋण उद्योग में कुल 82 प्रतिशत है और कैटेगरी में एनबीएफीसी का योगदान 47 प्रतिशत है, जबकि बैंकों का योगदान इस क्षेत्र में 17 प्रतिशत है। अर्ध शहरी और ग्रामीण बाजारों में एनबीएफसी द्वारा दिया गया कुल ऋण की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत है, जिससे वे बैंकों के लगभग बरारब यानी 60 प्रतिशत हो जाती है। यह पहुंच एनबीएफसी के क्रेडिट-एक्टिव उपभोक्ता आधार की बदलती तस्वीर में भी दिखती है।
जून 2016 से जून 2026 के बीच अर्ध-शहरी और ग्रामीण बाजारों के उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई। इसी दौरान महिलाओं की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत से 27 प्रतियात, क्रेडिट का अनुभव रखने वाले उपभोक्ताओं की 35 प्रतिशत से 49 प्रतिशत और युवा उपभोक्ताओं की 44 प्रतिशत से 47 प्रतिशत हो गई। इससे साफ है कि कर्जदारों का दायरा बढ़ रहा है और उसमें विविधता भी आ रही है
उधारकर्ताओं की ऋण संबंधी जरूरतों में क्या बदलाव?
रिपोर्ट ने इस बात पर प्रकाश डाला कि, जिस तरह से एनबीएफसी बैंक अधिक से अधिक उधारतकर्ताओं तक पहुंच बना रहे हैं, वहीं उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले ऋण उत्पाद की जरूरत भी बदल रही हैं। इसमें उपभोग ऋण जून 2016 में एनबीएफसी के ऋण सक्रिय उपभोक्ताओं के कुल ऋण का 51 प्रतिशत था, जो जून 2026 में बढ़कर 62 प्रतिशत हो गया है, जबकि करोबार के लिए लिया गया ऋण 4 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया है।
इसी दौरान एनबीएफसी उपभोक्ताओं के कुल ऋण में ऑटो ऋण का हिस्सा 27 प्रतिशत से घटकर 24 प्रतिशत हो गया है, जबकि गिरवी रखकर ऋण लेने का हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार जून 2024 में समाप्त होने वाले छह महीनों के दौरान औपचारिक ऋण लेने वाले जून 2026 में सक्रिय ऋण रखने वाले उधाकर्ताओं में से 74 प्रतिशत उधारकर्ता एनबीएफसी के साथ बने रहे हैं। जो यह दिखाता है, कि कई पहली बार ऋण लेने वाले समय के साथ इस क्षेत्र के साथ अपना संबंध बनाए रखते हैं।