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LPG Crisis: आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 लागू, तेल और गैस कंपनियों को डेटा साझा करने का आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Fri, 20 Mar 2026 08:52 AM IST
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सार
एलपीजी संकट और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते देश में तेल संकट गहराने की आशंका को देखते हुए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है। इस अधिनियम की मदद से सरकार जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकेगी।
एलपीजी संकट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तेल और गैस के वैश्विक संकट के चलते सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा-3 को लागू कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस के उत्पादन, प्रसंस्करण, शोधन, भंडारण, आयात-निर्यात, मार्केटिंग और उपभोग से जुड़ी सभी कंपनियों को सरकार के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) में ताजा डेटा साझा करना अनिवार्य हो गया है।
तेल और गैस कंपनियों को अपना डेटा सरकार के साथ करना होगा साझा
पीपीएसी तेल मंत्रालय का डेटा इकट्ठा करने वाला विभाग है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत सरकार ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार, पीपीएसी को सूचनाओं को इकट्ठा करने, संकलन करने, रखरखाव करने और विश्लेषण करने वाली एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। इससे तेल मंत्रालय को आपात स्थिति में योजना बनाने में मदद मिलेगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी किसी भी आदेश का उल्लंघन अपराध माना जाता है और इसके उल्लंघन पर जेल की सजा भी हो सकती है।
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार को यह शक्ति देता है कि वे नागरिकों को उचित कीमतों पर जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करे। साथ ही जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम तौर पर चीजों की कमी पैदा होने से रोके। एक तरह से यह कानून, देश में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में मददगार है।
इस कानून की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार जरूरी चीजों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। सरकार स्टॉक सीमा लगा सकती है और व्यापार को भी विनयमित कर सकती है। कीमतें तय कर सकती है और जमाखोरी पर रोक लगा सकती है। इस कानून की धारा 5 के तहत केंद्र सरकार धारा 3 के तहत मिलने वाली शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप सकती है, ताकि जमीनी स्तर पर इस कानून को लागू किया जा सके।
ये भी पढ़ें- ईरान युद्ध का असर: बोतलबंद पानी पीना महंगा, 11 फीसदी तक बढ़ी कीमत; प्लास्टिक लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव
भारत विभिन्न स्त्रोतों से कर रहा तेल-गैस का आयात
भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति की कमी को काफी हद तक पश्चिम एशिया से विविध स्रोतों के माध्यम से पूरा कर रहा है। यह वेनेजुएला, रूस और अमेरिका सहित लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा, यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस से प्राकृतिक गैस भी आयात करता है।
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तेल और गैस कंपनियों को अपना डेटा सरकार के साथ करना होगा साझा
पीपीएसी तेल मंत्रालय का डेटा इकट्ठा करने वाला विभाग है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत सरकार ने एक राजपत्र अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार, पीपीएसी को सूचनाओं को इकट्ठा करने, संकलन करने, रखरखाव करने और विश्लेषण करने वाली एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। इससे तेल मंत्रालय को आपात स्थिति में योजना बनाने में मदद मिलेगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 के तहत जारी किसी भी आदेश का उल्लंघन अपराध माना जाता है और इसके उल्लंघन पर जेल की सजा भी हो सकती है।
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क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
आवश्यक वस्तु अधिनियम सरकार को यह शक्ति देता है कि वे नागरिकों को उचित कीमतों पर जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करे। साथ ही जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम तौर पर चीजों की कमी पैदा होने से रोके। एक तरह से यह कानून, देश में खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में मददगार है।
इस कानून की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार जरूरी चीजों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित कर सकती है। सरकार स्टॉक सीमा लगा सकती है और व्यापार को भी विनयमित कर सकती है। कीमतें तय कर सकती है और जमाखोरी पर रोक लगा सकती है। इस कानून की धारा 5 के तहत केंद्र सरकार धारा 3 के तहत मिलने वाली शक्तियों को राज्य सरकारों को सौंप सकती है, ताकि जमीनी स्तर पर इस कानून को लागू किया जा सके।
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भारत विभिन्न स्त्रोतों से कर रहा तेल-गैस का आयात
भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति की कमी को काफी हद तक पश्चिम एशिया से विविध स्रोतों के माध्यम से पूरा कर रहा है। यह वेनेजुएला, रूस और अमेरिका सहित लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है। इसके अलावा, यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और रूस से प्राकृतिक गैस भी आयात करता है।
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