Recession: डीईपीआर के वार्षिक सम्मेलन में RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, भारत में मंदी की आशंका नहीं
आरबीआई के डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च (डीईपीआर) के सालाना सम्मलेन में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि विकसित अर्थव्यस्थाओं में महंगाई अस्थायी होने की बजाय बनी रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि से डॉलर में मजबूती आई।
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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई घटाने के लिए दुनिया के केंद्रीय बैकों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इससे आर्थिक गतिविधियों में कमी या कर्ज देने के लिए राशि की कम उपलब्धता ने मंदी के खतरे को बढ़ा दिया है। हालांकि, भारत की स्थिति काफी अलग है और यहां मंदी की आशंका नहीं है।
आरबीआई के डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च (डीईपीआर) के सालाना सम्मलेन में दास ने कहा कि विकसित अर्थव्यस्थाओं में महंगाई अस्थायी होने की बजाय बनी रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि से डॉलर में मजबूती आई। उन्होंने कहा कि जून, 2016 से फरवरी, 2020 तक औसत महंगाई 3.9 फीसदी रही है। यह उस समय रिसर्च का मुद्दा था कि किन वजहों से उस वक्त महंगाई काबू में रही। इससे पहले गवर्नर ने कहा था कि महंगाई को काबू करने के लिए सरकार के साथ मिलकर आरबीआई काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने रेपो दर को बढ़ाकर महंगाई घटाने की कोशिश की है, जबकि सरकार आपूर्ति बढ़ा रही है।
2023-24 में सात फीसदी तक रहेगी वृद्धि दर : राजीव कुमार
दुनिया के मंदी में जाने की बढ़ती आशंकाओं के बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि भारत इससे अछूता रहेगा। हालांकि, अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित जरूर हो सकती है, लेकिन 2023-24 में घरेलू जीडीपी छह से सात फीसदी की दर से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोप, जापान और चीन की अर्थव्यवस्थाएं नीचे आ रही हैं। ऐसे में यह स्थिति आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर ले जा सकती है। अच्छी बात यह है कि भारत में मंदी की ऐसी कोई आशंका नहीं है। उच्च महंगाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि खुदरा महंगाई संभवत: कुछ और समय के लिए 6-7 फीसदी के दायरे में रहेगी। उसके बाद यह चरम पर जाने के बाद नीचे आनी शुरू होगी।
- कमजोर होते रुपये के आम आदमी पर पड़ने वाले प्रभाव पर उन्होंने कहा कि आम भारतीय बहुत अधिक संख्या में आयातित वस्तुओं और सेवाओं का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
- भारत के बढ़ते व्यापार घाटे पर कहा कि अक्तूबर में निर्यात वृद्धि नकारात्मक रही है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि देश को इस क्षेत्र में नीतिगत रूप से ध्यान देने की जरूरत है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं दोनों का निर्यात बढ़ाया जा सके।
रेपो दर में वृद्धि के साथ बैंकों ने 1.9 फीसदी बढ़ाई ईबीएलआर
रेपो दर में इस साल मई से अब तक की गई वृद्धि के साथ ही सभी प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों ने अपनी बाहरी बेंचमार्क आधारित ऋण दरों (ईबीएलआर) को क्रमिक रूप से 1.9 फीसदी बढ़ाया है। हालांकि, जमा दरों को बढ़ाने में बैंकों की रफ्तार धीमी रही है। केंद्रीय बैंक के लेख के अनुसार, बैंकों ने मई से अक्तूबर, 2022 अंत तक ईबीएलआर में 1.9 फीसदी वृद्धि की है। इस दौरान कोष की सीमांत लागत आधारित कर्ज दर (एमसीएलआर) में 0.85 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह वृद्धि एक साल की एमसीएलआर के लिए हुई है। इसके मुकाबले सावधि जमा पर ब्याज दरों में काफी कम 0.48 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बैंकों ने खुदरा जमा दरों के मुकाबले अपनी थोक जमा दरों में अधिक वृद्धि की है।