क्या फिर से आने वाली है 2008 जैसी मंदी, इन देशों की अर्थव्यवस्था दे रही है संकेत
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एक बार फिर से वैश्विक मंदी की आहट मिलने लगी है। भारत के अलावा भी एशिया और यूरोप के कई देशों की अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि विश्व की 60 फीसदी से अधिक जीडीपी केवल एशियाई देशों से आती है।
इन देशों में छाई मंदी
समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसके अनुसार एशिया के तमाम देशों में इस वक्त अर्थव्यवस्था की रफ्तार अच्छी नहीं है। सिंगापुर, चीन, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में विकास दर काफी नीचे चली गई है।
अमेरिका से व्यापार युद्ध का असर
भारत और चीन जैसे देशों का फिलहाल अमेरिका से व्यापार युद्ध चल रहा है। इससे उद्योगों पर काफी असर देखने को मिल रहा है। पिछले तीन महीनों में सिंगापुर की विकास दर केवल 3.4 फीसदी रह गई, जो कि 2012 के बाद के सबसे निचले स्तर पर है। वहीं चीन का आयात भी पिछले साल के मुकाबले 1.3 फीसदी घट गया है। निर्यात डाटा में भी 7.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
वहीं दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था भी इस साल के पहली तिमाही में काफी घट गई थी। चीन सोमवार को अपने जीडीपी के आंकड़ों को जारी करेगा, जिसमें पता चलेगा कि अर्थव्यवस्था कितनी कमजोर हो गई है।
फैक्ट्रियों में ठप हुआ उत्पादन
मांग न होने की वजह से कई देशों ने अपनी फैक्ट्रियों में उत्पादन को बिलकुल बंद कर दिया है। कंपनियों के पास पुराना स्टॉक ही इतना ज्यादा पड़ा हुआ है कि उसको निकालने में अभी काफी समय लगने की उम्मीद है।
ऑटो सेक्टर का बुरा हाल
चीन और भारत में ऑटो सेक्टर का बुरा हाल देखने को मिला है। भारत में लगातार तीसरा महीना है, जब गाड़ियों की बिक्री में कमी देखने को मिली है। ऐसा ही हाल चीन का भी है। जून के आंकड़ों के मुताबिक चीन में वाहनों की बिक्री में 9.6 फीसदी की गिरावट आई है। चीन में पिछले 12 महीने से गाड़ियों की बिक्री में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
20.6 लाख वाहन तक गिरी बिक्री
चाइना एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (CAAM) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक गाड़ियों की बिक्री गिर कर 20.6 लाख वाहन तक पहुंच गई है। इस साल अप्रैल में 16.4 फीसदी और मई में 14.6 फीसदी की गिरावट आई थी। माना जा रहा है धीमी आर्थिक विकास दर और अमेरिका से चल रही ट्रेड वार के चलते यह गिरावट आ रही है।
भारत में ऑटो कंपनियों के संगठन सियाम की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक जून में यात्री वाहनों की बिक्री 17.54 प्रतिशत घटकर 2,25,732 यूनिट्स की रही। जबकि साल जून, 2018 यह आंकड़ा 2,73,748 यूनिट था।
सिंगापुर का घट गया निर्यात
सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में निर्यात का काफी महत्वपूर्ण स्थान है। यह कुल जीडीपी का 176 फीसदी है। पिछले कुछ महीनों से यह काफी कम हो गया है और 2013 के स्तर पर पहुंच गया है। सिंगापुर के वित्त मंत्री हेंग स्वी कीट ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि सरकार ने इस बार जीडीपी के 1.5 फीसदी से 2.5 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद जताई है। सरकार पूरे मामले पर गंभीरता से नजर रखे हुए है।
सिंगापुर का डॉलर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.1 फीसदी गिर गया है।
वैश्विक जीडीपी में 20 बीपीएस की कटौती
मॉर्गन स्टेनली ने मंदी की आहट को देखते हुए वैश्विक जीडीपी में 20 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। एजेंसी ने 2019 के लिए तीन फीसदी और 2020 के लिए विकास दर को 3.2 फीसदी रखा है।
चलता रहा ट्रेड वार तो खराब होगी स्थिति
अगर अमेरिका का चीन और भारत से ऐसे ही ट्रेड वार चलता रहा, तो आने वाले समय में इसके भयंकर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल इसके सुलझने के भी किसी तरह की कोई आशा की किरण भी देखने को नहीं मिल रही है।
मंदी से पड़ सकता है भारत पर असर
अगर मंदी आती है तो फिर भारत सरकार के पांच लाख ट्रिलियन इकोनॉमी बनने के सपने पर भी असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने इस बार के बजट में इसकी घोषणा भी की थी।
2008 में ऐसे आई थी मंदी
2008 की मंदी के समय भी कंपनियों में उत्पादन ठप हो गया था और बेरोजगारी का आंकड़ा भी बढ़ गया था। तब लेमेन ब्रदर्स और बैंक ऑफ अमेरिका के दिवालिया होने के बाद अमेरिका से मंदी का जो दौर शुरू हुआ, उसके बाद से पूरा विश्व इसकी गिरफ्त में आ गया था। मंदी से उबरने में कम से कम तीन साल लग गए थे।