इस बार एशिया से शुरू होगी मंदी, चीन व भारत की कंपनियां दे रही हैं संकेतः रिपोर्ट
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इस बार वैश्विक आर्थिक मंदी की शुरुआत एशियाई देशों से हो सकती है। रिसर्च कंपनी मैकेंजी एंड कंपनी के द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार चीन व भारत की कई कंपनियां इस बात का संकेत देने लगी हैं। घाटे की स्थिति के चलते कई कंपनियां अपने कर्ज को चुका नहीं पा रही हैं। वहीं बैंकों की स्थिति भी सही नहीं है, जिसका असर दिखने लगा है।
सरकारों को देना होगा दखल
फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को प्रकाशित किया है, जिसके अनुसार मंदी से उबरने के लिए सरकारों को भी दखल देना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो फिर आने वाले समय में स्थिति काफी विकट हो सकती है। व्यापार युद्ध के चलते भी निवेशक फिलहाल जोखिम उठाने से कतरा रहे हैं।
23 हजार कंपनियों का किया अध्ययन
मैकेंजी ने एशिया के 11 देशों में कार्यरत कुल 23 हजार कंपनियों की बैलेंस शीट का अध्ययन किया है। ज्यातर कंपनियों की हालत सही नहीं है। 2007 के बाद चीन और भारत की कंपनियां फिलहाल अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं। ऐसा ही हाल अमेरिका और ब्रिटेन में कार्यरत कंपनियों का 2007 में आर्थिक मंदी के वक्त देखने को मिला था।
बढ़ गई है कंपनियों की डेट
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों द्वारा लांग टर्म डेट पर देने वाला ब्याज 1.5 गुणा बढ़ गया है। ऐसे में ज्यादातर कंपनियां अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा ब्याज के भुगतान को चुकाने में लगा रही है। 2017 में चीन, भारत और इंडोनेशिया में कार्यरत कंपनियों की लांग टर्म डेट और ब्याज का अनुपात 1.5 गुणा से काफी कम था। वहीं डॉलर के मुकाबले लगातार इन देशों की मुद्रा में गिरावट से भी असर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियों को अगर सरकारों से मदद न मिली, तो फिर घाटे के चलते कई में तालाबंदी और रोजगार संकट आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।