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ब्रिक्स 2026: 1 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार व 7.8% ग्रोथ के साथ मंच पर भारत का दबदबा; जानें क्यों खास है सम्मेलन?

Fri, 11 Sep 2026 03:07 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 11 Sep 2026 03:07 PM IST
सार

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 में 1 ट्रिलियन डॉलर के अंतर-समूह व्यापार और भारत की 7.8% जीडीपी वृद्धि पर चर्चा हुई। जानिए एमएसएमई, तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

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BRICS Business Forum 2026: India Asserts Economic Stature with \$1 Trillion Intra-Bloc Trade and 7.8% Growth
ब्रिक्स बिजनेस फोरम - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक स्तर पर बदल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और आर्थिक दबावों के बीच नई दिल्ली में आयोजित हुए 'ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026' में भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और उभरती रणनीतिक क्षमताओं का असर दिखाई दिया।

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले आयोजित इस फोरम में उद्योग जगत के दिग्गजों ने साफ किया कि 1 ट्रिलियन (1 लाख करोड़) डॉलर के अंतर-समूह व्यापार और 7.8% की प्रभावशाली जीडीपी विकास दर के साथ भारत अब वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित हो चुका है। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस आयोजन में घरेलू वृद्धि दर, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और तकनीकी नवाचार को ब्रिक्स देशों और पूरे ग्लोबल साउथ का मार्गदर्शन करने वाला मुख्य आधार बताया गया है।

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ब्रिक्स के विस्तार से भारत और ग्लोबल साउथ को क्या हासिल होगा?

11-सदस्यीय ढांचे और विस्तारित 'ब्रिक्स+' व्यवस्था के तहत यह मंच अब दुनिया की विशाल आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व कर रहा है। एसोसिएशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी प्रोफेशनल्स वेलफेयर (इंडिया) के उपाध्यक्ष अनुपम वोहरा के अनुसार, इस सम्मेलन में लगभग 17 से 18 राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रिक्स+ ढांचा अब लगभग 18 से 20 देशों और ग्लोबल साउथ की करीब 60% आबादी व प्रतिनिधित्व को समेटे हुए है। दुनिया भर में जारी वित्तीय दबावों और वैश्विक संघर्षों के बावजूद भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। यह नया ढांचा पारंपरिक व्यवस्था के समानांतर एक मजबूत वैकल्पिक आर्थिक मॉडल पेश कर रहा है।

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BRICS Business Forum 2026: India Asserts Economic Stature with \$1 Trillion Intra-Bloc Trade and 7.8% Growth
Brics Business Forum - फोटो : amarujala.com

व्यापार संतुलन और तकनीकी मोर्चे पर उद्योग जगत की क्या राय है?

समूह के विस्तार के साथ ही सहयोग का दायरा भी व्यापक हुआ है। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने बताया कि 11-सदस्यीय विस्तार से सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल समाधान जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने संतुलित व्यापार पर जोर देते हुए कहा, "हर देश ट्रेड सरप्लस (व्यापार अधिशेष) चाहता है, लेकिन व्यापार तटस्थता का प्रबंधन करना अधिक बेहतर होगा, जिसके बाद व्यापार अधिशेष प्रत्येक राष्ट्र की क्षमता पर निर्भर करता है"। मिंडा ने यह भी याद दिलाया कि ब्रिक्स की शुरुआत केवल व्यापार के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन अब यह भू-राजनीति, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और कृषि जैसे बहुआयामी क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुका है।

एमएसएमई और ऊर्जा क्षेत्र के लिए क्या हैं प्रमुख प्राथमिकताएं?

भारतीय निर्माताओं और औद्योगिक हितधारकों का ध्यान केवल वार्ताओं तक सीमित न होकर ठोस वाणिज्यिक परिणामों, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर केंद्रित है। क्षेत्र-वार प्रमुख बिंदुओं पर नजर डालें तो:

  • एमएसएमई और विनिर्माण: डावर फुटवियर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन व एसोचैम नेशनल एमएसएमई काउंसिल के सह-अध्यक्ष पूरन डावर ने भारत की विकास यात्रा पर बात की। उन्होंने कहा, "हम इस 7.8% की वृद्धि दर को दोहरे अंकों में देखना चाहते हैं; हम देश को वित्तीय रूप से स्वतंत्र और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं"।
  • ऊर्जा और नेट-जीरो लक्ष्य: रिवील एनर्जी के प्रबंध निदेशक व संस्थापक (पूर्व कर्नल) रोहित देव ने कहा कि भारत का ऊर्जा विस्तार विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, बायोफ्यूल्स (जैव ईंधन) को बढ़ावा देने और वित्तीय निवेश जुटाने पर टिका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का नेट-जीरो लक्ष्य ग्रामीण विकास और बायोफ्यूल्स के विकास से सीधे जुड़ा हुआ है।

18वें ब्रिक्स सम्मेलन का क्या संदेश है?

भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को आयोजित हो रहा 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा। ब्रिक्स बिजनेस फोरम निजी क्षेत्र के प्रमुख मंच के रूप में व्यापार, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था, एमएसएमई, मानक सहयोग और वैल्यू चेन एकीकरण पर सुझाव तैयार करता है। इन सिफारिशों को सीधे शिखर सम्मेलन के घोषणापत्रों और कार्ययोजनाओं में शामिल किया जाता है, जो आने वाले समय में अंतर-समूह निवेश और वैश्विक आर्थिक स्थिरता का नया रोडमैप तैयार करेंगी।

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