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Budget 2026: ट्रंप की चुनौती की काट होगा इस बार का बजट, विनिर्माण को रणनीतिक ढाल बनाएगी सरकार
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सार
व्यापार को अपराधमुक्त करने और आपूर्ति पक्ष को दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने वाला हो सकता है बजट। सरकार बजट में लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत पर लाने के लिए बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड निवेश का ऐलान कर सकती है।
इस साल केंद्रीय बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था को टैरिफ के असर से बचाने के लिए होंगे प्रावधान।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रविवार को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट 2026 पेश करेंगी, तो वह केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं होगा। यह वैश्विक आर्थिक युद्ध के बीच भारत की 'रणनीतिक ढाल' होगी। एक तरफ अमेरिका में 'ट्रंप 2.0' के साथ संरक्षणवादी टैरिफ की सुनामी उठ रही है। दूसरी तरफ भारत के पास खुद को एक अभेद्य आर्थिक किले में तब्दील करने की चुनौती है।
आपूर्ति पक्ष को दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने वाला बजट होने की उम्मीद
इस बार का 'सरप्राइज' मध्य वर्ग की राहतों से आगे निकलकर व्यापार को 'अपराधमुक्त' करने और 'आपूर्ति पक्ष' को दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने वाला हो सकता है। पिछले बजटों का पूरा जोर बाजार में 'मांग' पैदा करने पर था। लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के पन्ने गवाही दे रहे हैं कि अब बाजी पलट चुकी है। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि वह मांग भारतीय कारखानों से पूरी हो, न कि आयातित माल से।
इंस्पेक्शन राज खत्म होने की उम्मीद
स्वायत्तता का नया गणित
बजट के साथ ही 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट भी पटल पर होगी। वर्तमान में राज्यों को केंद्रीय करों का 41 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। ध्यान रहे कि 15वें वित्त आयोग ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के चलते इसे 42 से घटाकर 41 किया था। हालांकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों ने अपनी मांग 50 प्रतिशत तक रखी है, लेकिन खबर है कि अरविंद पनगढ़िया कमेटी इसे 42 से 44 प्रतिशत के बीच ले जाने की सिफारिश कर सकती है। यह 'सहकारी संघवाद' को हकीकत बनाने की दिशा में राज्यों को दी जाने वाली सबसे बड़ी 'वित्तीय ऑक्सीजन' होगी।
राजस्व बंटवारे में बड़ा बदलाव
आर्थिक मोर्चे पर इस बार राजकोषीय घाटे को पिछले वर्ष के 4.9 प्रतिशत से घटाकर 4.4 या 4.5 प्रतिशत के दायरे में लाने की तैयारी है। विनिर्माण विकास दर को पिछले साल के 5.9 प्रतिशत से उठाकर 7 प्रतिशत के पार ले जाने का रोडमैप पेश किया जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव राजस्व के बंटवारे में दिख सकता है, जहां राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से बढ़कर 44% तक पहुँचने की संभावना है। व्यापार सुगमता के लिए 100 से अधिक कानूनों का गैर-अपराधीकरण करना इस बजट को पिछले तमाम बजटों से अलग व अधिक सुधारात्मक बनाएगा।
नीतिगत तालमेल की चुनौतियां
नीतिगत तालमेल को लेकर बहस भी तेज है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया है कि सरकार के भीतर रणनीतिक समन्वय की कमी दिख रही है। उन्होंने आगाह किया है कि जीडीपी और मुद्रास्फीति की नई सीरीज आने से आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
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आपूर्ति पक्ष को दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने वाला बजट होने की उम्मीद
इस बार का 'सरप्राइज' मध्य वर्ग की राहतों से आगे निकलकर व्यापार को 'अपराधमुक्त' करने और 'आपूर्ति पक्ष' को दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंजन बनाने वाला हो सकता है। पिछले बजटों का पूरा जोर बाजार में 'मांग' पैदा करने पर था। लेकिन आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के पन्ने गवाही दे रहे हैं कि अब बाजी पलट चुकी है। अब सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि वह मांग भारतीय कारखानों से पूरी हो, न कि आयातित माल से।
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इंस्पेक्शन राज खत्म होने की उम्मीद
- इस बजट का सबसे क्रांतिकारी पहलू उद्योगों को नियम-कायदों के बोझिल जाल से मुक्त करना है। सरकार का मानना है कि मामूली तकनीकी चूकों पर जेल का प्रावधान निवेश के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा है। बजट में 'जन विश्वास अधिनियम 2.0' के जरिये 100 से अधिक कानूनों में संशोधन संभव है। अब छोटी गलतियों को 'अपराध' की श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा। इसमें जेल के बजाय केवल आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होगा।
- पीएम मोदी ने भी हाल ही में कहा था कि हमें धन सृजन करने वालों पर भरोसा करना होगा। यह बजट उसी दिशा में 'इंस्पेक्शन राज' को खत्म कर 'स्व-प्रमाणन' की नई संस्कृति शुरू कर सकता है।
- भारतीय जीडीपी में विनिर्माण का हिस्सा फिलहाल लगभग 17.3 प्रतिशत है। सरकार इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है। चालू वित्त वर्ष में इस क्षेत्र में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो एक शुभ संकेत है। भारतीय स्टील और टेक्सटाइल पर संभावित ट्रंप टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत अब अपनी आंतरिक क्रय शक्ति को ही आधार बना रहा है।˘
- सरकार लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत पर लाने के लिए बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड निवेश का ऐलान कर सकती है। लक्ष्य साफ है कि 'मेड इन इंडिया' उत्पादों की कीमत वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धियों के पसीने छुड़ा दे।
स्वायत्तता का नया गणित
बजट के साथ ही 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट भी पटल पर होगी। वर्तमान में राज्यों को केंद्रीय करों का 41 प्रतिशत हिस्सा मिलता है। ध्यान रहे कि 15वें वित्त आयोग ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के चलते इसे 42 से घटाकर 41 किया था। हालांकि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों ने अपनी मांग 50 प्रतिशत तक रखी है, लेकिन खबर है कि अरविंद पनगढ़िया कमेटी इसे 42 से 44 प्रतिशत के बीच ले जाने की सिफारिश कर सकती है। यह 'सहकारी संघवाद' को हकीकत बनाने की दिशा में राज्यों को दी जाने वाली सबसे बड़ी 'वित्तीय ऑक्सीजन' होगी।
राजस्व बंटवारे में बड़ा बदलाव
आर्थिक मोर्चे पर इस बार राजकोषीय घाटे को पिछले वर्ष के 4.9 प्रतिशत से घटाकर 4.4 या 4.5 प्रतिशत के दायरे में लाने की तैयारी है। विनिर्माण विकास दर को पिछले साल के 5.9 प्रतिशत से उठाकर 7 प्रतिशत के पार ले जाने का रोडमैप पेश किया जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव राजस्व के बंटवारे में दिख सकता है, जहां राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से बढ़कर 44% तक पहुँचने की संभावना है। व्यापार सुगमता के लिए 100 से अधिक कानूनों का गैर-अपराधीकरण करना इस बजट को पिछले तमाम बजटों से अलग व अधिक सुधारात्मक बनाएगा।
नीतिगत तालमेल की चुनौतियां
नीतिगत तालमेल को लेकर बहस भी तेज है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया है कि सरकार के भीतर रणनीतिक समन्वय की कमी दिख रही है। उन्होंने आगाह किया है कि जीडीपी और मुद्रास्फीति की नई सीरीज आने से आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।
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