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Business Updates: कोल इंडिया ने उठाया बढ़ती लागत का बोझ; ग्राहकों को कीमतों में उछाल से बचाने की कोशिश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sun, 12 Apr 2026 03:32 PM IST
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बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स
- फोटो : amarujala.com
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सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने फैसला किया है कि वह बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाएगी और कोयले की कीमतें नहीं बढ़ाएगी। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण विस्फोटकों और औद्योगिक डीजल के दाम काफी बढ़ गए हैं। विस्फोटकों में इस्तेमाल होने वाले अमोनियम नाइट्रेट की कीमत 44 प्रतिशत बढ़कर 72,750 रुपये प्रति टन हो गई है। इससे विस्फोटकों की औसत लागत में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, डीजल की कीमत भी करीब 54 प्रतिशत बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
कोल इंडिया का कहना है कि अगर वह इन बढ़ी हुई कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालती है, तो इससे बिजली और अन्य क्षेत्रों में महंगाई बढ़ सकती है। कंपनी अपनी खदानों में काम करने वाले ठेकेदारों को भी डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का मुआवजा दे रही है। लागत के दबाव के बावजूद, कोल इंडिया ने कोयले की आपूर्ति को सस्ता रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। कंपनी ने ई-नीलामी में कोयले की आरक्षित कीमतों को कम किया है और नीलामी की संख्या बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को किफायती दरों पर ईंधन उपलब्ध कराना और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना है।
पश्चिम एशिया युद्ध ऊर्जा सुधारों का बड़ा अवसर
एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा ने कहा है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करने का एक अच्छा मौका है। उन्होंने कहा कि भारत में घरों और किसानों के लिए बिजली दुनिया में सबसे सस्ती है, लेकिन उद्योगों और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए यह सबसे महंगी है। मिश्रा के अनुसार, भविष्य के विकास के लिए ऊर्जा का सही दाम तय करना और उसका सावधानी से इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है।
उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि उद्योगों को सस्ती बिजली मिलनी चाहिए। इससे देश में रोजगार पैदा होंगे और लोग खुद अपना बिजली बिल भरने में सक्षम बनेंगे, जिससे हर जगह मुफ्त बिजली देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने 1970 के दशक के तेल संकट के बाद जापान के सुधारों का उदाहरण दिया। जापान ने अपनी ऊर्जा दक्षता को इतना बेहतर किया कि वह अब प्रति यूनिट ऊर्जा से भारत के मुकाबले चार गुना अधिक जीडीपी पैदा करता है। मिश्रा ने चेतावनी भी दी कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं और लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 100 के स्तर तक गिर सकता है।
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कोल इंडिया का कहना है कि अगर वह इन बढ़ी हुई कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालती है, तो इससे बिजली और अन्य क्षेत्रों में महंगाई बढ़ सकती है। कंपनी अपनी खदानों में काम करने वाले ठेकेदारों को भी डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का मुआवजा दे रही है। लागत के दबाव के बावजूद, कोल इंडिया ने कोयले की आपूर्ति को सस्ता रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। कंपनी ने ई-नीलामी में कोयले की आरक्षित कीमतों को कम किया है और नीलामी की संख्या बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को किफायती दरों पर ईंधन उपलब्ध कराना और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना है।
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पश्चिम एशिया युद्ध ऊर्जा सुधारों का बड़ा अवसर
एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की सलाहकार परिषद के सदस्य नीलकंठ मिश्रा ने कहा है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करने का एक अच्छा मौका है। उन्होंने कहा कि भारत में घरों और किसानों के लिए बिजली दुनिया में सबसे सस्ती है, लेकिन उद्योगों और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए यह सबसे महंगी है। मिश्रा के अनुसार, भविष्य के विकास के लिए ऊर्जा का सही दाम तय करना और उसका सावधानी से इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है।
उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि उद्योगों को सस्ती बिजली मिलनी चाहिए। इससे देश में रोजगार पैदा होंगे और लोग खुद अपना बिजली बिल भरने में सक्षम बनेंगे, जिससे हर जगह मुफ्त बिजली देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने 1970 के दशक के तेल संकट के बाद जापान के सुधारों का उदाहरण दिया। जापान ने अपनी ऊर्जा दक्षता को इतना बेहतर किया कि वह अब प्रति यूनिट ऊर्जा से भारत के मुकाबले चार गुना अधिक जीडीपी पैदा करता है। मिश्रा ने चेतावनी भी दी कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं और लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 100 के स्तर तक गिर सकता है।
रियल एस्टेट कंपनियों के लिए राहत, दिवालिया प्रक्रिया अब सिर्फ प्रोजेक्ट तक ही सीमित
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अगर घर खरीदार किसी रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) शुरू करते हैं, तो यह केवल उसी खास प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी जिसमें चूक (Default) हुई है। इसे कंपनी के अन्य प्रोजेक्ट्स पर लागू नहीं किया जा सकता। नवीन एम रहेजा की अपील पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि उन प्रोजेक्ट्स को खतरे में डालना ठीक नहीं है जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। यह फैसला अन्य खरीदारों और हितधारकों के हित में है।
यह मामला रहेजा डेवलपर्स के 'कृष्णा हाउसिंग स्कीम' से जुड़ा है। न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े लेनदारों और हितधारकों के दावे भी इसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेंगे। रहेजा ने दलील दी थी कि कोविड-19 महामारी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और लागत 183 करोड़ से बढ़कर 204 करोड़ रुपये हो गई, जिससे समय पर पजेशन देने में देरी हुई। यह प्रोजेक्ट किफायती आवास ढांचे के तहत विकसित किया गया था, जिसमें 1,644 आवासीय इकाइयां शामिल हैं। अब इस कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया को केवल इसी एक प्रोजेक्ट तक सीमित कर दिया गया है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अगर घर खरीदार किसी रियल एस्टेट कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) शुरू करते हैं, तो यह केवल उसी खास प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी जिसमें चूक (Default) हुई है। इसे कंपनी के अन्य प्रोजेक्ट्स पर लागू नहीं किया जा सकता। नवीन एम रहेजा की अपील पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि उन प्रोजेक्ट्स को खतरे में डालना ठीक नहीं है जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। यह फैसला अन्य खरीदारों और हितधारकों के हित में है।
यह मामला रहेजा डेवलपर्स के 'कृष्णा हाउसिंग स्कीम' से जुड़ा है। न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि इस प्रोजेक्ट से जुड़े लेनदारों और हितधारकों के दावे भी इसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेंगे। रहेजा ने दलील दी थी कि कोविड-19 महामारी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और लागत 183 करोड़ से बढ़कर 204 करोड़ रुपये हो गई, जिससे समय पर पजेशन देने में देरी हुई। यह प्रोजेक्ट किफायती आवास ढांचे के तहत विकसित किया गया था, जिसमें 1,644 आवासीय इकाइयां शामिल हैं। अब इस कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया को केवल इसी एक प्रोजेक्ट तक सीमित कर दिया गया है।
भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड समझौता जल्द होगा लागू
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ फ्री ट्रेड समझौता (CETA) मई के दूसरे हफ्ते से लागू हो सकता है। इस समझौते के लागू होने से भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय निर्यात को बहुत बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, भारत में बिकने वाले ब्रिटिश सामान जैसे कार और व्हिस्की पर लगने वाले टैक्स को धीरे-धीरे कम किया जाएगा। उदाहरण के लिए, स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला 150 प्रतिशत टैक्स पहले घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा और फिर साल 2035 तक इसे 40 प्रतिशत तक ले आया जाएगा।
इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार को साल 2030 तक 56 अरब डॉलर तक पहुँचाना है, जो वर्तमान व्यापार से दोगुना होगा। भारत को विशेष रूप से कपड़ा, जूते, गहने, खिलौने और खेल के सामान के निर्यात में बड़ी बढ़त मिलेगी। इसके साथ ही एक अन्य समझौता (DCC) भी लागू होगा। इससे विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा फीस देने से राहत मिलेगी। यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर खोलेगा और विदेशी बाजार में भारत की पकड़ मजबूत करेगा।
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ फ्री ट्रेड समझौता (CETA) मई के दूसरे हफ्ते से लागू हो सकता है। इस समझौते के लागू होने से भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिलेगा। इससे भारतीय निर्यात को बहुत बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, भारत में बिकने वाले ब्रिटिश सामान जैसे कार और व्हिस्की पर लगने वाले टैक्स को धीरे-धीरे कम किया जाएगा। उदाहरण के लिए, स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला 150 प्रतिशत टैक्स पहले घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा और फिर साल 2035 तक इसे 40 प्रतिशत तक ले आया जाएगा।
इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार को साल 2030 तक 56 अरब डॉलर तक पहुँचाना है, जो वर्तमान व्यापार से दोगुना होगा। भारत को विशेष रूप से कपड़ा, जूते, गहने, खिलौने और खेल के सामान के निर्यात में बड़ी बढ़त मिलेगी। इसके साथ ही एक अन्य समझौता (DCC) भी लागू होगा। इससे विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा फीस देने से राहत मिलेगी। यह समझौता भारतीय उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर खोलेगा और विदेशी बाजार में भारत की पकड़ मजबूत करेगा।
टीसीएस ने फ्रेशर्स की भर्ती में की बड़ी कटौती
देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने इस साल फ्रेशर्स की भर्ती में काफी कमी की है। कंपनी ने इस साल केवल 25,000 फ्रेशर्स को नौकरी के ऑफर दिए हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले बहुत कम है, क्योंकि पिछले साल कंपनी ने 44,000 से ज्यादा युवाओं को नियुक्त किया था। कंपनी के सीईओ के कृतिवासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में कितनी भर्तियां होंगी, यह पूरी तरह से बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।
उन्होंने बताया कि नए फ्रेशर्स को काम के लिए तैयार करने और ट्रेनिंग देने में लगभग 9 महीने का समय लगता है। इसके विपरीत, अनुभवी कर्मचारी तुरंत काम शुरू कर सकते हैं, इसलिए कंपनी जरूरत के हिसाब से ही भर्ती कर रही है। पिछले साल कंपनी ने करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी भी की थी। कंपनी का कहना है कि इसका कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नहीं, बल्कि काम करने के तरीके में आया बदलाव है। अब कई प्रोजेक्ट्स में अनुभवी लोगों की जरूरत पहले से कम हो गई है। हालांकि, नए प्रोजेक्ट्स मिलने से स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने इस साल फ्रेशर्स की भर्ती में काफी कमी की है। कंपनी ने इस साल केवल 25,000 फ्रेशर्स को नौकरी के ऑफर दिए हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले बहुत कम है, क्योंकि पिछले साल कंपनी ने 44,000 से ज्यादा युवाओं को नियुक्त किया था। कंपनी के सीईओ के कृतिवासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में कितनी भर्तियां होंगी, यह पूरी तरह से बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।
उन्होंने बताया कि नए फ्रेशर्स को काम के लिए तैयार करने और ट्रेनिंग देने में लगभग 9 महीने का समय लगता है। इसके विपरीत, अनुभवी कर्मचारी तुरंत काम शुरू कर सकते हैं, इसलिए कंपनी जरूरत के हिसाब से ही भर्ती कर रही है। पिछले साल कंपनी ने करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी भी की थी। कंपनी का कहना है कि इसका कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नहीं, बल्कि काम करने के तरीके में आया बदलाव है। अब कई प्रोजेक्ट्स में अनुभवी लोगों की जरूरत पहले से कम हो गई है। हालांकि, नए प्रोजेक्ट्स मिलने से स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
शेल ने भारत को गैस की सप्लाई में की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा कंपनी शेल (Shell plc) ने भारत को गैस की सप्लाई बढ़ा दी है। खाड़ी देशों से आपूर्ति में आई बाधा के बाद शेल ने स्थिति को संभाला और भारत को रिकॉर्ड मात्रा में एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) भेजी। भारत अपनी गैस की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है, जिसमें कतर की बड़ी हिस्सेदारी थी। लेकिन हालिया तनाव की वजह से कतर से होने वाली सप्लाई प्रभावित हो गई।
ऐसी स्थिति में शेल ने ऑस्ट्रेलिया, ओमान और नाइजीरिया जैसे देशों से गैस लाकर भारत की कमी को पूरा किया। इसका सबसे बड़ा लाभ भारत के उर्वरक (फर्टिलाइजर) उद्योग को मिला है, जहां गैस की बहुत ज्यादा खपत होती है। मार्च के महीने में शेल भारत का सबसे बड़ा गैस सप्लायर बनकर उभरा। हालांकि शुरुआत में कुछ उद्योगों को गैस की कमी का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में भी शेल भारत को गैस की आपूर्ति बढ़ाना जारी रखेगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा कंपनी शेल (Shell plc) ने भारत को गैस की सप्लाई बढ़ा दी है। खाड़ी देशों से आपूर्ति में आई बाधा के बाद शेल ने स्थिति को संभाला और भारत को रिकॉर्ड मात्रा में एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) भेजी। भारत अपनी गैस की जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है, जिसमें कतर की बड़ी हिस्सेदारी थी। लेकिन हालिया तनाव की वजह से कतर से होने वाली सप्लाई प्रभावित हो गई।
ऐसी स्थिति में शेल ने ऑस्ट्रेलिया, ओमान और नाइजीरिया जैसे देशों से गैस लाकर भारत की कमी को पूरा किया। इसका सबसे बड़ा लाभ भारत के उर्वरक (फर्टिलाइजर) उद्योग को मिला है, जहां गैस की बहुत ज्यादा खपत होती है। मार्च के महीने में शेल भारत का सबसे बड़ा गैस सप्लायर बनकर उभरा। हालांकि शुरुआत में कुछ उद्योगों को गैस की कमी का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में भी शेल भारत को गैस की आपूर्ति बढ़ाना जारी रखेगा।
शेयर बाजार में भारी उछाल, निवेशकों की संपत्ति बढ़ी
पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। इस बढ़त के कारण देश की शीर्ष कंपनियों के बाजार मूल्य (मार्केट कैप) में करीब 4.13 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इस तेजी का नेतृत्व मुख्य रूप से बैंकिंग क्षेत्र की कंपनियों ने किया। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई। इनके अलावा भारती एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार में आई इस हरियाली का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होना है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। इन सकारात्मक संकेतों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और बाजार में जमकर खरीदारी हुई। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंफोसिस जैसी कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मामूली गिरावट भी देखने को मिली। कुल मिलाकर बाजार का रुख सकारात्मक रहा, जिससे निवेशकों को अच्छा मुनाफा हुआ और आगे भी बाजार से ऐसी ही उम्मीदें हैं।
पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। इस बढ़त के कारण देश की शीर्ष कंपनियों के बाजार मूल्य (मार्केट कैप) में करीब 4.13 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इस तेजी का नेतृत्व मुख्य रूप से बैंकिंग क्षेत्र की कंपनियों ने किया। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई। इनके अलावा भारती एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार में आई इस हरियाली का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होना है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। इन सकारात्मक संकेतों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और बाजार में जमकर खरीदारी हुई। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंफोसिस जैसी कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मामूली गिरावट भी देखने को मिली। कुल मिलाकर बाजार का रुख सकारात्मक रहा, जिससे निवेशकों को अच्छा मुनाफा हुआ और आगे भी बाजार से ऐसी ही उम्मीदें हैं।
सिग्नेचर ग्लोबल ने अपना कर्ज 77 प्रतिशत तक घटाया
रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सिग्नेचर ग्लोबल ने एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान अपना कर्ज 77 प्रतिशत तक कम कर लिया है। अब कंपनी पर केवल 200 करोड़ रुपये का कर्ज बचा है। कंपनी की वित्तीय स्थिति अब काफी मजबूत है और उसके पास करीब 2,770 करोड़ रुपये की नकदी मौजूद है। सिग्नेचर ग्लोबल वर्तमान में गुरुग्राम में एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसमें लगभग 7,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
हालांकि, कंपनी की कुल बिक्री (प्रेसल्स) में इस साल कुछ गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल जहां कंपनी ने 10,290 करोड़ रुपये की बिक्री की थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर 8,220 करोड़ रुपये रह गया। घरों की बिक्री की संख्या और कुल क्षेत्रफल दोनों में कमी आई है। इसके बावजूद कंपनी का मानना है कि उसने कीमतों में बढ़ोतरी और लक्जरी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करके अपनी स्थिति को बेहतर बनाया है। कंपनी अब अपनी मजबूत बैलेंस शीट के सहारे भविष्य में नए और बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने पर ध्यान दे रही है।
रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सिग्नेचर ग्लोबल ने एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान अपना कर्ज 77 प्रतिशत तक कम कर लिया है। अब कंपनी पर केवल 200 करोड़ रुपये का कर्ज बचा है। कंपनी की वित्तीय स्थिति अब काफी मजबूत है और उसके पास करीब 2,770 करोड़ रुपये की नकदी मौजूद है। सिग्नेचर ग्लोबल वर्तमान में गुरुग्राम में एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसमें लगभग 7,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
हालांकि, कंपनी की कुल बिक्री (प्रेसल्स) में इस साल कुछ गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल जहां कंपनी ने 10,290 करोड़ रुपये की बिक्री की थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर 8,220 करोड़ रुपये रह गया। घरों की बिक्री की संख्या और कुल क्षेत्रफल दोनों में कमी आई है। इसके बावजूद कंपनी का मानना है कि उसने कीमतों में बढ़ोतरी और लक्जरी प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करके अपनी स्थिति को बेहतर बनाया है। कंपनी अब अपनी मजबूत बैलेंस शीट के सहारे भविष्य में नए और बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने पर ध्यान दे रही है।
वर्षों से रुके हाउसिंग प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, 2000 से ज्यादा खरीदारों को मिलेगा घर
ग्रेटर नोएडा में काफी समय से रुका हुआ एक बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट अब जल्द पूरा होगा। रियल एस्टेट कंपनी हवेलिया ग्रुप को उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी-रेरा) ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की अनुमति दे दी है। कंपनी इस काम पर लगभग 770 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह प्रोजेक्ट 22 एकड़ जमीन पर बना है। इसमें कुल 2,064 फ्लैट तैयार होने हैं। पहले यह प्रोजेक्ट एसजेपी इंफ्राकॉन का श्री राधा स्काई गार्डन्स था, जो कई वर्षों से अधूरा पड़ा था। इस कारण 2,000 से ज्यादा घर खरीदारों का पैसा फंसा हुआ था। अब इस फैसले ने इन लोगों की उम्मीदें जगा दी हैं।
हवेलिया ग्रुप ने कहा है कि वह अगले 42 से 48 महीनों के भीतर सभी फ्लैट्स का काम पूरा कर देगी। इस प्रोजेक्ट को वाशिंगटन स्टेट इन्वेस्टमेंट बोर्ड से पैसा मिला है। भारत में किसी रुके हुए प्रोजेक्ट में यह उनका पहला निवेश है। ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी इस प्रोजेक्ट को अपनी सहमति दी थी। साल 2024 में डेवलपर्स के साथ समझौता हुआ था। अब सभी जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी हो गई है और प्रोजेक्ट का काम फिर से शुरू हो रहा है। इससे हजारों परिवारों को अपना घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
ग्रेटर नोएडा में काफी समय से रुका हुआ एक बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट अब जल्द पूरा होगा। रियल एस्टेट कंपनी हवेलिया ग्रुप को उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी-रेरा) ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की अनुमति दे दी है। कंपनी इस काम पर लगभग 770 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह प्रोजेक्ट 22 एकड़ जमीन पर बना है। इसमें कुल 2,064 फ्लैट तैयार होने हैं। पहले यह प्रोजेक्ट एसजेपी इंफ्राकॉन का श्री राधा स्काई गार्डन्स था, जो कई वर्षों से अधूरा पड़ा था। इस कारण 2,000 से ज्यादा घर खरीदारों का पैसा फंसा हुआ था। अब इस फैसले ने इन लोगों की उम्मीदें जगा दी हैं।
हवेलिया ग्रुप ने कहा है कि वह अगले 42 से 48 महीनों के भीतर सभी फ्लैट्स का काम पूरा कर देगी। इस प्रोजेक्ट को वाशिंगटन स्टेट इन्वेस्टमेंट बोर्ड से पैसा मिला है। भारत में किसी रुके हुए प्रोजेक्ट में यह उनका पहला निवेश है। ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी इस प्रोजेक्ट को अपनी सहमति दी थी। साल 2024 में डेवलपर्स के साथ समझौता हुआ था। अब सभी जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी हो गई है और प्रोजेक्ट का काम फिर से शुरू हो रहा है। इससे हजारों परिवारों को अपना घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।