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ईरान-अमेरिका शांति वार्ता विफल: सोमवार को शेयर बाजार में आ सकता है भूचाल, सावधान रहें निवेशक!
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 12 Apr 2026 03:15 PM IST
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सार
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। इसका नकारात्मक असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार भारी गिरावट के साथ खुल सकता है। इस हफ्ते निवेशकों की नजर युद्ध के हालातों के साथ-साथ महंगाई के आंकड़ों और बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी।
शेयर बाजार (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
अगर आप शेयर बाजार के निवेशक हैं, तो सोमवार की सुबह आपके लिए उथल-पुथल भरी हो सकती है। पश्चिम एशिया से आ रही खबरों ने भारतीय बाजार में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। अब विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सीधा असर सोमवार को बाजार खुलते ही देखने को मिल सकता है।
क्यों टूटी शांति की उम्मीद?
रविवार को ईरान की ओर से आए बयान ने साफ कर दिया कि कूटनीति की राह इतनी आसान नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने बताया कि अमेरिकी पक्ष की अत्यधिक मांगों के कारण बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का रुख कड़ा रहा। उन्होंने कहा कि शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा ईरान का अपना परमाणु कार्यक्रम न छोड़ना है। अमेरिका ने इसे अपना अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव बताया था, जिसे ईरान ने स्वीकार नहीं किया।
बाजार पर 'गैप डाउन' ओपनिंग का खतरा
पिछले हफ्ते भारतीय बाजार में जबरदस्त रौनक देखी गई थी। सेंसेक्स 4,230 अंक और निफ्टी करीब 1,337 अंक चढ़कर बंद हुए थे। यह तेजी इस उम्मीद में थी कि युद्ध टल जाएगा और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के नीचे बनी रहेंगी। लेकिन वार्ता विफल होने से अब यह पूरी बढ़त दांव पर है।
शेयर बाजार विशेषज्ञ हरिप्रसाद के अनुसार, निफ्टी इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सोमवार को बाजार एक बड़ी गिरावट के साथ खुल सकता है। जो निवेशक पिछले हफ्ते की तेजी का फायदा उठा रहे थे, उन्हें अब भारी उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
यह भी पढ़ें: Business Updates: कोल इंडिया ने उठाया बढ़ती लागत का बोझ; ग्राहकों को कीमतों में उछाल से बचाने की कोशिश
इन फैक्टर्स पर भी रहेगी नजर
इस हफ्ते केवल युद्ध का तनाव ही नहीं, बल्कि कई अन्य मोर्चे भी बाजार की दिशा तय करेंगे। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। सोमवार, 13 अप्रैल को खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) और मंगलवार को थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े आएंगे। इसके अलावा, विप्रो, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे भी इसी हफ्ते आने हैं। इतना ही नहीं, ध्यान रहे कि मंगलवार को बाबा साहेब अंबेडकर जयंती के कारण शेयर बाजार में कारोबार बंद रहेगा।
विदेशी निवेशकों की बेरुखी
बाजार के लिए एक और चिंता की बात विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 48,213 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। ऐसे में घरेलू निवेशकों के लिए सावधानी बरतना ही समझदारी होगी।
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क्यों टूटी शांति की उम्मीद?
रविवार को ईरान की ओर से आए बयान ने साफ कर दिया कि कूटनीति की राह इतनी आसान नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने बताया कि अमेरिकी पक्ष की अत्यधिक मांगों के कारण बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का रुख कड़ा रहा। उन्होंने कहा कि शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा ईरान का अपना परमाणु कार्यक्रम न छोड़ना है। अमेरिका ने इसे अपना अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव बताया था, जिसे ईरान ने स्वीकार नहीं किया।
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बाजार पर 'गैप डाउन' ओपनिंग का खतरा
पिछले हफ्ते भारतीय बाजार में जबरदस्त रौनक देखी गई थी। सेंसेक्स 4,230 अंक और निफ्टी करीब 1,337 अंक चढ़कर बंद हुए थे। यह तेजी इस उम्मीद में थी कि युद्ध टल जाएगा और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के नीचे बनी रहेंगी। लेकिन वार्ता विफल होने से अब यह पूरी बढ़त दांव पर है।
शेयर बाजार विशेषज्ञ हरिप्रसाद के अनुसार, निफ्टी इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सोमवार को बाजार एक बड़ी गिरावट के साथ खुल सकता है। जो निवेशक पिछले हफ्ते की तेजी का फायदा उठा रहे थे, उन्हें अब भारी उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
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इन फैक्टर्स पर भी रहेगी नजर
इस हफ्ते केवल युद्ध का तनाव ही नहीं, बल्कि कई अन्य मोर्चे भी बाजार की दिशा तय करेंगे। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। सोमवार, 13 अप्रैल को खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) और मंगलवार को थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े आएंगे। इसके अलावा, विप्रो, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे भी इसी हफ्ते आने हैं। इतना ही नहीं, ध्यान रहे कि मंगलवार को बाबा साहेब अंबेडकर जयंती के कारण शेयर बाजार में कारोबार बंद रहेगा।
विदेशी निवेशकों की बेरुखी
बाजार के लिए एक और चिंता की बात विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 48,213 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। ऐसे में घरेलू निवेशकों के लिए सावधानी बरतना ही समझदारी होगी।