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शब्दों के पीछे का चेहरा
मार्च 2026 से अमर उजाला डिजिटल में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर कार्यरत। पत्रकारिता के अपने करियर में लगातार यही कोशिश कि सुर्खियों से आगे जाकर उन सवालों के जवाब तलाशे जाएं, जो अक्सर खबरों की भीड़ में छूट जाते हैं। पत्रकार का काम सिर्फ यह बताना नहीं कि क्या हुआ, बल्कि यह समझाना भी है कि क्यों हुआ, किसके लिए मायने रखता है और आगे क्या बदल सकता है। इसलिए हर रिपोर्ट में तथ्यों की गहराई, संदर्भों की स्पष्टता और भाषा की सादगी को बराबर महत्व।
मेरी कहानी, म ... ...और पढ़ें
शब्दों के पीछे का चेहरा
मार्च 2026 से अमर उजाला डिजिटल में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर कार्यरत। पत्रकारिता के अपने करियर में लगातार यही कोशिश कि सुर्खियों से आगे जाकर उन सवालों के जवाब तलाशे जाएं, जो अक्सर खबरों की भीड़ में छूट जाते हैं। पत्रकार का काम सिर्फ यह बताना नहीं कि क्या हुआ, बल्कि यह समझाना भी है कि क्यों हुआ, किसके लिए मायने रखता है और आगे क्या बदल सकता है। इसलिए हर रिपोर्ट में तथ्यों की गहराई, संदर्भों की स्पष्टता और भाषा की सादगी को बराबर महत्व।
मेरी कहानी, मेरी बुनियाद
बिहार के दरभंगा से सफर की शुरुआत। मारवाड़ी कॉलेज, दरभंगा से वाणिज्य में स्नातक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई। इससे पत्रकारिता की बुनियाद मजबूत हुई, लेकिन असली शिक्षा न्यूजरूम और मैदान ने दी। नई तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ लगातार काम करना पसंद है। बदलती पत्रकारिता के दौर में तकनीक को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि बेहतर पत्रकारिता का साथी मानता हूं। किताबें, क्रिकेट और अच्छी फिल्में आज भी जीवन की सबसे पसंदीदा चीजों में शामिल।
शब्दों की लय
सिर्फ खबरें नहीं लिखता, खबरों का संदर्भ लिखता हूं। सिर्फ घटनाएं नहीं बताता, उनके मायने समझाता हूं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, कानून, जुर्म, कारोबार और समसामयिक विषयों पर शोध आधारित लेखन। घटनास्थल से लेकर न्यूजरूम की डेस्क तक, खबर के लगभग हर पड़ाव को समझने और जीने का अवसर मिला है। रिसर्च, फैक्ट-चेक और निष्पक्षता से समझौता किए बिना ऐसी स्टोरी तैयार करना पसंद, जिसे पढ़ने के बाद पाठक के मन में नए सवाल नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब हों।
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