Air India Crash: 260 मौतों वाले अहमदाबाद विमान हादसे की ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट अक्तूबर में, जानिए क्या अपडेट
अहमदाबाद में जून 2025 में हुए एअर इंडिया विमान हादसे की ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट अक्तूबर 2026 में आएगी। एएआईबी ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और एयरबोर्न इमेज रिकॉर्डिंग नियमों के चलते सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। पूरा मामला जानिए आसान भाषा में।
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विस्तार
देश के सबसे दर्दनाक विमान हादसों में शुमार एअर इंडिया फ्लाइट एआई-171 की जांच एक अहम मोड़ पर आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अहमदाबाद क्रैश की ड्राफ्ट फाइनल रिपोर्ट इसी साल अक्तूबर 2026 तक तैयार हो जाएगी, लेकिन जांच का सबसे अहम सबूत- कॉकपिट की बातचीत और अंदर की तस्वीरें- जनता या किसी बाहरी कमेटी को नहीं दिखाई जाएंगी। इस फैसले ने एक तरफ जहां पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ एविएशन सेक्टर से जुड़े कारोबार और बीमा दावों की राह भी तय कर दी है। आइए पूरे मामले को सवाल-जवाब के रूप में सरल भाषा में समझते हैं।
एएआईबी ने सुप्रीम कोर्ट से क्या कहा?
एएआईबी ने एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करते हुए बताया कि ड्राफ्ट फाइनल जांच रिपोर्ट अक्तूबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है।साथ ही, जाँच एजेंसी ने कोर्ट को यह भी बता दिया कि वह कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (पायलटों की आपसी बातचीत) और एयरबोर्न इमेज रिकॉर्डिंग (कॉकपिट के अंदर की वीडियो) किसी बाहरी समिति या जनता को नहीं दे सकती। एएआईबी के अनुसार, ऐसा करने पर विमान दुर्घटना जाँच नियमों का सीधा उल्लंघन होगा।
कॉकपिट रिकॉर्डिंग शेयर करने पर रोक क्यों है?
इस रोक के पीछे कानूनी बाध्यता है। एएआईबी ने एयरक्राफ्ट (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2025 के नियम 17(1) और 17(5) और शेड्यूल C का हवाला दिया है। इन नियमों के तहत कॉकपिट वॉयस और एयरबोर्न इमेज रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करने पर पूर्ण कानूनी रोक है। इसका उद्देश्य पायलटों की गोपनीयता की रक्षा करना और भविष्य की जाँचों में सच्चाई बयाँ करने के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है, ताकि दुर्घटना के कारणों का सही-सही पता लगाया जा सके, न कि सनसनी फैलाने पर ज़ोर दिया जाए।
यह विमान हादसा क्या था और इसका इंडस्ट्री पर क्या असर हुआ?
12 जून 2025 को एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई। इस हादसे ने न सिर्फ एअर इंडिया की साख पर गहरी चोट पहुँचाई, बल्कि भारतीय एविएशन सेक्टर में बीमा दावों, सुरक्षा मानकों और निवेशकों के भरोसे पर भी सीधा असर डाला। विमानन कंपनियों के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था और यात्रियों के बीमा क्लेम का आँकड़ा सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है।
ड्राफ्ट रिपोर्ट अक्तूबर में आने का क्या मतलब है?
जांच रिपोर्ट अक्तूबर में तैयार होने का मतलब है कि हादसे के असली कारणों पर जल्द ही मुहर लग सकती है- चाहे वह तकनीकी खराबी हो, मौसम की मार, मानवीय चूक या रखरखाव में लापरवाही। इस रिपोर्ट के आधार पर ही:
- एअर इंडिया और बीमा कंपनियों के बीच दावों का अंतिम निपटारा होगा।
- नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) नए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी करेगा।
- विमान निर्माता कंपनी के खिलाफ क्षतिपूर्ति के मुकदमों की राह खुल सकती है।
- एविएशन इंडस्ट्री में फिर से यात्री भरोसा जीतने की कोशिशें तेज होंगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल जाँच एजेंसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील डेटा सुरक्षित रखते हुए रिपोर्ट का मसौदा तैयार करना है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई आने वाले हफ्तों में हो सकती है, जहां पीड़ित परिवारों की तरफ से कॉकपिट रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की माँग उठ सकती है। अगर अक्टूबर में रिपोर्ट आती है, तो नए नियमों के साथ भारतीय आसमान एक बार फिर सुरक्षित उड़ान भरने की कोशिशों में जुट जाएगा, लेकिन इस हादसे के आर्थिक और कानूनी सदमे एविएशन बिज़नेस पर लंबे समय तक दिखाई देंगे।