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ED: अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर ईडी की छापेमारी, FEMA उल्लंघन के मामले में चलाया तलाशी अभियान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 02 Jun 2026 10:16 AM IST
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सार
देश के बड़े कारोबारी और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से छापेमारी की जा रही है। समाचार एजेंसी की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, ईडी की ओर से यह तलाशी अभियान फेमा के नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले में चलाया जा रहा है।
वेदांता समूह के खिलाफ ईडी की कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को वेदांता समूह के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान ईडी ने कई जगहों पर छापेमारी की। कारोबारी अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर ईडी ने फेमा उल्लंघन मामले में यह कार्रवाई की है। अधिकारियों ने बताया किये तलाशी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन की जांच का हिस्सा हैं।
ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के सिलसिले में मंगलवार को दिल्ली और मुंबई में वेदांता समूह से जुड़े दो ठिकानों पर तलाशी ली। अधिकारियों के अनुसार, ये तलाशी अभियान, जो अब संपन्न हो चुके हैं, समूह की कंपनियों द्वारा अपनी मूल कंपनी को कथित तौर पर किए गए ब्रांड शुल्क भुगतान से संबंधित हैं।
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दिल्ली और मुंबई में छापेमारी
जांच एजेंसी ने फेमा प्रावधानों के तहत जांचे जा रहे इन कथित लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए हैं। एक अधिकारी ने बताया, "ईडी की टीमों ने दिल्ली और मुंबई में एक-एक स्थान पर तलाशी ली। यह अभियान सोमवार को शुरू हुआ था और अब संपन्न हो गया है।"
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अधिकारी इन भुगतानों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और समझौतों की समीक्षा कर रहे हैं। जांचकर्ता कथित तौर पर ब्रांड उपयोग के लिए किए गए भुगतानों की जांच कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि क्या ये लेन-देन विदेशी मुद्रा नियमों के अनुरूप थे। वेदांता के एक प्रवक्ता के अनुसार, "हम अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और मांगी गई सभी जानकारी प्रदान कर रहे हैं। कंपनी सभी लागू कानूनों और विनियमों का अनुपालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
खत्म हुआ तलाशी अभियान
सूत्रों के अनुसार, यह अभियान अब समाप्त हो चुका है और अधिकारी मामले में अगले कदम तय करने से पहले तलाशी के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विश्लेषण करेंगे। एकत्र की गई सामग्री की जांच पूरी होने के बाद आगे के विवरण की प्रतीक्षा है। ईडी ने अभी तक तलाशी पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
इस बीच, वेदांता लिमिटेड ने पिछले महीने शेयर बाजारों को सूचित किया था कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी सहायक कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) के खिलाफ बिजली उपलब्धता की कथित गलत घोषणा से संबंधित एक मामले में फैसला सुनाया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 127 करोड़ रुपये का जुर्माना और लागू विलंबित भुगतान अधिभार देना पड़ा था।
एक नियामक फाइलिंग में, वेदांता ने बताया था कि उसे TSPL से 20 मई को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) और पंजाब स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (PSLDC) द्वारा दायर अपीलों में सुनाए गए एक फैसले के संबंध में एक प्रकटीकरण प्राप्त हुआ था।
फेमा के तहत कब होती है कार्रवाई?
ईडी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत तब कार्रवाई करता है जब उसे किसी व्यक्ति या कंपनी द्वारा विदेशी मुद्रा से जुड़े लेन-देन में उल्लंघन का संदेह होता है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से ऐसे मामलों में की जाती है जहां अवैध रूप से विदेश में धन हस्तांतरण, विदेश में अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करना, या विदेशी निवेश से संबंधित नियमों का पालन न करना शामिल होता है।
भारत की अग्रणी बहुराष्ट्रीय कंपनी है वेदांता समूह
वेदांता समूह भारत का एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन और खनन समूह है। इसकी स्थापना वर्ष 1976 में हुई थी और यह धातु, खनिज, ऊर्जा तथा तेल-गैस क्षेत्रों में कारोबार करता है। समूह का मुख्य व्यवसाय खनन और प्राकृतिक संसाधनों का उत्पादन है। वेदांता जस्ता, एल्युमीनियम, तांबा, लौह अयस्क, इस्पात, तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समूह की प्रमुख कंपनियों में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, केयर्न इंडिया और वेदांता एल्युमिनियम शामिल हैं। भारत के साथ-साथ अफ्रीका और अन्य देशों में भी इसका कारोबार फैला हुआ है। भारत में एल्युमीनियम और जस्ता उत्पादन के क्षेत्र में वेदांता अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है।