ED Action: PMLA से जुड़े मामले में कार्ति चिदंबरम तलब; सांसद नहीं पहुंचे, बोले- यह सबसे फर्जी मामला
ED Action: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के अनुसार, 2022 का ईडी का मामला वेदांता समूह की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के एक शीर्ष कार्यकारी द्वारा कार्ति और उनके करीबी सहयोगी एस भास्कररमन को रिश्वत के रूप में 50 लाख रुपये देने के आरोपों से संबंधित है।
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कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम 2011 में 263 चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने में कथित अनियमितताओं से जुड़ी धनशोधन की जांच में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश नहीं हुए।तमिलनाडु में शिवगंगा लोकसभा सीट से 52 वर्षीय विधायक को केंद्रीय एजेंसी ने इस हफ्ते अपने कार्यालय में पेश होने और धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच किए जा रहे मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए समन जारी किया था। समझा जाता है कि सांसद ने ईडी को सूचित किया कि वह संसद के मौजूदा सत्र में व्यस्त हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के अनुसार, 2022 का ईडी का मामला वेदांता समूह की कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के एक शीर्ष कार्यकारी द्वारा कार्ति और उनके करीबी सहयोगी एस भास्कररमन को रिश्वत के रूप में 50 लाख रुपये देने के आरोपों से संबंधित है। मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला सीबीआई की शिकायत से उपजा है। उधर कार्ति ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि यह मामला ''सबसे फर्जी'' है और उनकी कानूनी टीम इसे देख रही है।
कार्ति चिदंबरम बोले- यह सबसे फर्जी मामला
उन्होंने कहा, "मुझ पर तीन तरह के मामले थोपे गए हैं: फर्जी, अधिक फर्जी और सबसे फर्जी। यह तीसरी श्रेणी का मामला है। इसे मेरे वकील देखेंगे। सीबीआई ने पिछले साल चिदंबरम के परिवार के परिसरों पर छापा मारा था और भास्कररमन को गिरफ्तार किया था। सीबीआई के आरोपों के अनुसार, बिजली परियोजना स्थापित करने का काम एक चीनी कंपनी द्वारा किया जा रहा था और यह निर्धारित समय से पीछे चल रहा था। सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार टीएसपीएल के एक अधिकारी ने 263 चीनी कामगारों के लिए परियोजना वीजा फिर से जारी करने की मांग की थी, जिसके लिए कथित तौर पर 50 लाख रुपये का आदान-प्रदान किया गया था।
एजेंसी ने आरोप लगाया है कि टीएसपीएल के तत्कालीन एसोसिएट उपाध्यक्ष विकास मखारिया ने मानसा स्थित बिजली संयंत्र में काम करने वाले चीनी श्रमिकों के लिए परियोजना वीजा फिर से जारी करने के लिए भास्कररमन से संपर्क किया था। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि मखारिया ने अपने करीबी सहयोगी भास्कररमन के जरिए कार्ति से संपर्क किया।
इसमें आरोप लगाया गया है, "उन्होंने उक्त चीनी कंपनी के अधिकारियों को आवंटित 263 परियोजना वीजा का पुन: उपयोग करने की अनुमति देकर अधिकतम सीमा (कंपनी के संयंत्र के लिए अनुमत अधिकतम परियोजना वीजा) के उद्देश्य को विफल करने के लिए एक बैक-डोर तरीका तैयार किया।"
क्या है पूरा मामला?
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि परियोजना वीजा एक विशेष सुविधा है जिसे 2010 में बिजली और इस्पात क्षेत्र के लिए शुरू किया गया था जिसके लिए गृह मंत्री के रूप में पी चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए थे, लेकिन परियोजना वीजा को फिर से जारी करने का कोई प्रावधान नहीं था। मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, दुर्लभ और असाधारण मामलों में विचलन पर विचार किया जा सकता है और केवल गृह सचिव की मंजूरी के साथ ही मंजूरी दी जा सकती है। हालांकि, उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए, परियोजना वीजा के पुन: उपयोग के संदर्भ में विचलन को तत्कालीन गृह मंत्री द्वारा अनुमोदित किए जाने की आशंका है।
कार्ति ने पिछले दिनों कहा था कि यह मामला 'उनके खिलाफ उत्पीड़न और बदले की भावना से की गई कार्रवाई' है और उनके जरिए उनके पिता (वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम) को निशाना बनाने का प्रयास है। सांसद ने कहा था कि उन्हें यकीन है कि उन्होंने कभी एक भी चीनी नागरिक को वीजा प्रक्रिया में मदद नहीं की।