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एक्स पर सरकार का रुख सख्त: अधिकारी बोले- भारतीय कानून का करना होगा पालन, जानिए क्या है यह पूरा विवाद

Tue, 18 Aug 2026 08:49 PM IST
कुमार विवेक पीटीआई, अमर उजाला, नई दिल्ली
पीटीआई, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 18 Aug 2026 08:49 PM IST
सार

एक्स द्वारा सरकारी सामग्री हटाने के अनुरोधों को अधिक पारदर्शी बनाने की घोषणा के बाद, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया मंच को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। जानें इस मुद्दे पर सरकार का रुख और अतीत के विवाद। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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India Firm on Law Compliance as X Pushes Takedown Transparency
एक्स पर सरकार की दो टूक - फोटो : amarujala.com

विस्तार

एलन मस्क ने हाल ही में कहा है कि एक्स पर सरकारी सामग्री हटाने के अनुरोधों को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। इस पर भारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को साफ किया कि मंच को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। यह बयान एक्स की ओर से पारदर्शिता से जुड़ी नई पहल के जवाब में आया है।

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एक्स की यह पहल सरकारी निर्देशों पर सामग्री प्रतिबंधों को यूजर्स के लिए अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि किस सरकार ने अनुरोध किया और सामग्री को क्यों हटाया गया? मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि सामग्री हटाने के आदेशों के लिए एक प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि धारा 69(ए) के तहत जारी आदेशों को गोपनीय रखा जाता है।

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एक्स की पारदर्शिता से जुड़ी पहल क्या है?

एक्स की नई पहल का लक्ष्य सरकारी सामग्री हटाने के अनुरोधों में अधिक स्पष्टता लाना है। एलोन मस्क ने हाल ही में एक पोस्ट में कहा था कि सरकारों द्वारा आवश्यक कोई भी सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। एक्स चाहता है कि उपयोगकर्ताओं को पता चले कि कौन सी सरकार सामग्री हटाने के पीछे थी। यह भी बताया जाएगा कि सामग्री को क्यों हटाया गया।

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भारत सरकार का रुख क्या है?

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि एक्स को भारतीय कानून का पालन करना होगा। अधिकारी ने बताया कि सामग्री हटाने के लिए दो तरह की प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने कहा कि धारा 69(ए) के तहत जारी आदेशों को गोपनीय रखा जाता है। भारत सरकार का मानना है कि मंच को देश के कानूनी ढांचे के भीतर काम करना चाहिए।

अतीत में क्या विवाद हुए हैं?

एक्स और भारत सरकार के बीच सामग्री हटाने के आदेशों को लेकर पहले भी विवाद हुए हैं। 2024 में, एक्स ने भारत में किसान आंदोलन से जुड़े कुछ खातों और पोस्ट को रोकने के सरकारी निर्देशों का पालन किया था। हालांकि, एक्स ने सार्वजनिक रूप से इन आदेशों से असहमति जताई थी। मंच ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताया था। एक्स ने अपने वैश्विक सरकारी मामलों के हैंडल पर तर्क दिया था कि खुलासे की कमी से जवाबदेही की कमी और मनमाना निर्णय हो सकता है। केंद्र के सहयोग पोर्टल को लेकर भी टकराव हुआ था। एक्स ने इसे गैर-कानूनी सेंसरशिप का एक रूप बताया था, जबकि सरकार ने इसे विनियमन का एक कुशल तंत्र बताया।

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