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Employment: भारत में नौकरियों के पदनाम व वेतन बेमेल, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा; जानें कर्मी क्या सोच रहे

Tue, 18 Aug 2026 02:14 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 18 Aug 2026 02:14 PM IST
सार

इंडीड की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 60 फीसदी पेशेवर अपने पदनाम और वेतन में अंतर महसूस करते हैं। 80 फीसदी का मानना है कि पदनाम बढ़ा-चढ़ाकर दिए जा रहे हैं, जबकि वेतन वृद्धि कम है। नियोक्ता प्रतिभा आकर्षित करने के लिए पदनामों का उपयोग कर रहे हैं।

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Mismatch Between Job Titles and Pay in India: Report Reveals Shocking Disconnect
जॉब रिपोर्ट - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारत में पेशेवरों को अक्सर अपने नौकरी के पदनाम और वेतन में बड़ा अंतर महसूस होता है। एक नई रिपोर्ट ने कार्यस्थलों पर पहचान और पुरस्कार के बीच बढ़ते अलगाव को उजागर किया है। इंडीड की तिमाही भर्ती ट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार, करीब 60 फीसदी पेशेवरों का मानना है कि उनका पदनाम उनके वेतन से मेल नहीं खाता है। यह रिपोर्ट 1,211 नियोक्ताओं और 2,533 कर्मचारियों से मिले इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है। 

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रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 80 फीसदी कर्मचारियों का मानना है कि बढ़ा-चढ़ाकर पदनाम देना अब आम बात हो गई है। उन्होंने देखा है कि सहकर्मियों को वेतन में वृद्धि के बिना ही अधिक वरिष्ठ-लगने वाले पदनाम मिल जाते हैं। इंडीड इंडिया के प्रबंध निदेशक शशि कुमार ने कहा कि पदनाम हमेशा पेशेवर पहचान का प्रतीक रहा है। उन्होंने जोर दिया कि पदनाम तभी प्रभावी होते हैं जब वे वास्तविक करिअर वृद्धि को दर्शाते हैं। यह रिपोर्ट वेलुवॉक्स द्वारा इंडीड की ओर से मई और जून 2026 में किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। पिछले दो वर्षों में पदनाम बदलने वाले करीब एक तिहाई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें या तो कोई वेतन वृद्धि नहीं मिली या 5 फीसदी से कम की वृद्धि हुई।

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क्या वेतन पदनाम से अधिक महत्वपूर्ण है?

रिपोर्ट के अनुसार, 52 फीसदी पेशेवरों ने कहा कि वे एक नए अवसर पर विचार करते समय बेहतर पदनाम की बजाय उच्च वेतन चुनेंगे। यह दर्शाता है कि पदनाम भले ही नए दरवाजे खोलें, लेकिन वेतन ही करिअर के मूल्य को परिभाषित करता है। हालांकि, पेशेवर पदनामों को पूरी तरह से खारिज नहीं करते हैं। 70 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि उनका पदनाम भविष्य के करिअर अवसरों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। करीब 73 फीसदी को लगता है कि एक मजबूत पदनाम संभावित नियोक्ताओं की नजर में उनकी छवि सुधारता है।

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पदनाम नौकरी की संतुष्टि को कैसे प्रभावित करते हैं?

लगभग 57 फीसदी पेशेवरों ने बताया कि उनके पदनाम का उनकी समग्र नौकरी संतुष्टि पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। कर्मचारी अभी भी पदनामों को महत्व देते हैं, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि उनके साथ सार्थक वेतन और वास्तविक करिअर वृद्धि भी जुड़ी हो। यह दर्शाता है कि केवल पदनाम देना पर्याप्त नहीं है। कर्मचारियों को लगता है कि पदनाम उनकी मेहनत और अनुभव का सही प्रतिनिधित्व करें। वे चाहते हैं कि उनके पदनाम वास्तविक प्रगति और पहचान को दर्शाएं।

नियोक्ता पदनामों का उपयोग क्यों करते हैं?

57 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि उनकी संस्था प्रतिभा को आकर्षित करने या बनाए रखने के लिए वरिष्ठ-लगने वाले या उन्नत पदनामों का उपयोग करती है। यह एक संकेत है कि पदनामों का उपयोग वेतन के साथ-साथ एक रणनीतिक प्रतिभा लीवर के रूप में किया जा रहा है। कई संस्थाओं के लिए, पदनाम उम्मीदवारों को आकर्षित करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गए हैं। यह उच्च प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बनाए रखने और उनकी वृद्धि को पहचानने में भी मदद करता है। खासकर तब जब वेतन बजट सीमित रहता है।

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