Biz Updates:: इंडियाबुल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश, सीबीआई करेगी सभी छह संदिग्ध लेनदेन की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े संदिग्ध लेनदेन के सभी छह आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। पहले दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पांच आरोपों में क्लीन चिट दी थी, लेकिन अब सीबीआई स्वतंत्र रूप से जांच करेगी। पढ़ें कारोबार जगत से जुड़ी कुछ अहम खबरें।
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सुप्रीम कोर्ट ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (आईएचएफएल) और संबंधित संस्थाओं से जुड़े कथित संदिग्ध लेनदेन के सभी छह आरोपों की जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा है। ये आरोप प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उजागर किए थे। अदालत ने 28 जुलाई को सीबीआई और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के आचरण को चौंकाने वाला और अदला-बदली का मामला बताते हुए फटकार लगाई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण निर्देश दिया।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जांच एजेंसियों की ओर से पेश होते हुए बताया कि ईडी ने छह आरोप लगाए थे। इनमें से पांच पहलुओं की जांच ईओडब्ल्यू कर रहा था। ईओडब्ल्यू ने अपनी जांच में इन पांचों आरोपों में क्लीन चिट दे दी थी। उसने आगे की जांच को उचित नहीं माना था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ईओडब्ल्यू के निष्कर्षों या रिपोर्ट की परवाह किए बिना इन पांच आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करने का निर्देश दिया है। सीबीआई को इस संबंध में एक व्यापक रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।
क्या हैं मुख्य आरोप और उनकी प्रकृति?
छठा आरोप 1,575 करोड़ रुपये के कथित मार्ग से संबंधित है। सीबीआई ने मुंबई की विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में इसकी जांच के लिए अनुमति मांगी है। अदालत ने मुंबई के विशेष न्यायाधीश को 24 अगस्त को सुनवाई के बाद दो सप्ताह के भीतर सीबीआई के आवेदन पर निर्णय लेने को कहा है। सीबीआई को इसके बाद सुप्रीम कोर्ट को एक प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी। सिटीजन व्हिसल ब्लोअर फोरम द्वारा दायर एक याचिका पर ये निर्देश दिए गए हैं। याचिका में ईडी के निष्कर्षों पर भरोसा किया गया था।
धन के हेरफेर और ऋणों का एवरग्रीनिंग कैसे हुआ?
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि ईडी की शिकायत में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और धन के डायवर्जन के आरोप सामने आए हैं। इसमें सार्वजनिक धन से वित्तपोषित ऋणों के एवरग्रीनिंग का भी जिक्र है। भारतीय रिजर्व बैंक के परिपत्र के अनुसार, 50 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक धोखाधड़ी की जांच सीबीआई द्वारा अनिवार्य है। आरोपों में अमेरिकॉर्प समूह की संस्थाओं को दिए गए लगभग 1,693 करोड़ रुपये के ऋण शामिल हैं। भूषण ने कहा कि कथित तौर पर इन ऋण निधियों को इंडियाबुल्स संस्थाओं के शेयरों में वापस भेज दिया गया था। इस हेरफेर से शेयरों की कीमतों उतार में उतार-चढ़ाव कर लाभ हासिल किया गया।