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भारतीय श्रम बाजार में बड़ा बदलाव: औपचारिक क्षेत्र में बढ़ रहे अनियमित मजदूर और स्व-रोजगार, जानें आंकड़े
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kumar Vivek
Updated Mon, 16 Mar 2026 10:00 PM IST
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सार
भारत में रोजगार के मोर्चे पर बड़ा बदलाव हो रहा है। कैजुअल वर्कर्स तेजी से फॉर्मल सेक्टर का हिस्सा बन रहे हैं और स्व-रोजगार में भी वृद्धि हुई है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के बयान और पीएलएफएस (पीएलएफएस) डेटा पर आधारित यह विस्तृत बिजनेस रिपोर्ट पढ़ें।
श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का सकारात्मक असर अब देश के श्रम बाजार पर साफ दिख रहा है। अनियमित मजदूर तेजी से औपचारिक कार्यबल में शामिल हो रहे हैं, जिससे नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि हुई है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को संसद में यह जानकारी दी।
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मंत्री मांडविया ने संसद के प्रश्नकाल के दौरान रोजगार के मोर्चे पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश में रोजगार लगातार बढ़ रहा है और बेरोजगारी कम हो रही है। अर्थव्यवस्था के विकास से रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं। बढ़ती आर्थिक मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति बढ़ाना आवश्यक है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का विस्तार हो रहा है, जिससे बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा हो रही हैं।
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श्रम मंत्री ने पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के नवीनतम आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने श्रम बाजार में आए नीतिगत और ढांचागत बदलावों को रेखांकित किया।
अनियमित मजदूरों की स्थिति में सुधार
पीएलएफएस आंकड़ों के अनुसार, अनियमित मजदूरों की संख्या में गिरावट आई है। वर्ष 2017-18 में इनकी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 19 प्रतिशत पर आ गई है। मंडाविया के अनुसार, इसका अर्थ है कि अनियमित कामगार अब औपचारिक रोजगार से जुड़ रहे हैं। कैजुअल वर्कर्स की औसत आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2017-18 में यह आय 255 रुपये थी, जो वर्तमान में बढ़कर 418 रुपये हो गई है। यह आय वृद्धि कामगारों की क्रय शक्ति बढ़ाएगी।
स्व-रोजगार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
देश में स्व-रोजगार अपनाने वालों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ा है। यह वर्ष 2017-18 के 52 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 58 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। रोजगार बाजार के इन रुझानों को मंत्री मंडाविया ने उच्च आर्थिक विकास का परिणाम बताया है। भारतीय श्रम बाजार में यह बदलाव एक मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत है। यह बदलाव कामगारों की सामाजिक सुरक्षा और क्रय शक्ति को बढ़ाएगा। दीर्घकालिक स्तर पर यह अर्थव्यवस्था की उत्पादकता और खपत को भी गति प्रदान करेगा।
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