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एलपीजी संकट से निपटने का मास्टरप्लान: सरकार क्यों कर रही है पीएनजी पर फोकस? 10 सवालों में समझें पूरी कहानी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kumar Vivek
Updated Mon, 16 Mar 2026 03:40 PM IST
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सार
भारत में एलपीजी आपूर्ति संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद और सरकार की ओर से पाइप की जरिए सप्लाई होने वाली पीएनजी पर जोर दिए जाने के कारणों को समझने के लिए यह विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।
एलपीजी गैस की बुकिंग में आई तेजी
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक मार्ग बाधित होने के कारण भारत में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। इस अभूतपूर्व संकट से निपटने और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के उपयोग को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के पीछे की सोच क्या है, ऐसी परिस्थिति क्यों बनी? सवाल-जवाब के जरिए पूरी कहानी समझें।
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1. भारत में अचानक एलपीजी का संकट क्यों पैदा हो गया?
जवाब: भारत में इन दिनों एलपीजी संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों पर उत्पन्न हुए गंभीर व्यवधानों का परिणाम है। भारत अपनी घरेलू एलपीजी खपत का लगभग 60 से 62 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। इस आयातित एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ओमान और ईरान के बीच स्थित संकरे समुद्री मार्ग, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के माध्यम से आता है। मार्च 2026 की शुरुआत से, ईरानी बलों की चेतावनी के बाद इस मार्ग से टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, इससे कतर और सऊदी अरब से भारत में एलपीजी की आवक में अनुमानित 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
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2. क्या भारत के पास इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त गैस भंडार मौजूद नहीं है?
कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास एलपीजी के लिए पर्याप्त रणनीतिक भंडारण की सुविधा नहीं है। वर्तमान में, देश के पास एलपीजी भंडारण के लिए केवल मंगलुरु और विशाखापत्तनम में दो भूमिगत गुफाएं हैं। इन दोनों सुविधाओं की कुल क्षमता मात्र 1.4 लाख टन है, जो राष्ट्रीय स्तर पर दो दिन की खपत से भी कम है। अगर सभी स्थानीय भंडारों को भी मिला लिया जाए, तो कुल राष्ट्रीय बफर मुश्किल से 12 लाख टन तक पहुंचता है, जो पूरे देश की मांग को केवल 15 दिनों तक ही पूरा कर सकता है।3. पेट्रोलियम मंत्रालय ने शहरी उपभोक्ताओं के लिए क्या नया आदेश जारी किया है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सख्त अधिसूचना जारी कर उन सभी परिवारों को तुरंत अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने का आदेश दिया है जिनके पास पहले से ही पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) कनेक्शन है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति को पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे भविष्य में किसी भी पीएनजी उपयोगकर्ता को एलपीजी सिलेंडर की रिफिल न दें।4. सरकार शहरी उपभोक्ताओं को पीएनजी पर शिफ्ट करके एलपीजी किसके लिए बचा रही है?
इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (पीएमयूवाई) के तहत ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है। 2025 तक देश भर में 10.33 करोड़ से अधिक पीएमयूवाई कनेक्शन हो चुके हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के कारण देश में एलपीजी की कमी होती है, तो इसका सबसे भयानक प्रभाव ग्रामीण गरीबों पर पड़ेगा, जो वापस लकड़ी या गोबर जैसे पारंपरिक प्रदूषक ईंधनों की ओर लौट सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में पीएनजी को अनिवार्य बनाकर सरकार आयातित और भारी सब्सिडी वाली एलपीजी को केवल गरीब वर्गों के लिए संरक्षित कर रही है।5. एलपीजी और पीएनजी के बीच बुनियादी और तकनीकी अंतर क्या है?
एलपीजी पृथ्वी से सीधे नहीं निकाली जाती, बल्कि यह प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण और कच्चे तेल के शोधन का उप-उत्पाद है। एलपीजी मुख्य रूप से भारी हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है, जिसमें प्रोपेन और ब्यूटेन की प्रमुखता होती है। इसके विपरीत, पीएनजी गैस कुओं से निकाली जाने वाली प्राकृतिक गैस है, जो लगभग शुद्ध मीथेन (85-95%) होती है। एलपीजी का ऊष्मांक मान (कैलोरिफिक वैल्यू) लगभग 93 MJ/m3 होता है, जबकि पीएनजी का लगभग 38 MJ/m3 होता है, इसलिए पीएनजी स्थिर और निरंतर गर्मी प्रदान करती है। भारत में घरेलू एलपीजी सिलिंडर आमतौर पर 14.2 किलोग्राम का होता है, जिसकी कीमत शहर और वितरण के आधार पर लगभग 800 से 1100 रुपये तक हो सकती है। वहीं, पीएनजी (पाइपलाइन गैस) में मीटर लगाया जाता है और बिल गैस के वास्तविक उपयोग के आधार पर आता है। अधिकांश शहरों में पीएनजी की कीमत लगभग 40 से 60 रुपये प्रति यूनिट के आसपास होती है। इसका मतलब है कि पीएनजी में उपयोग के अनुसार बिल आता है, जबकि एलपीजी में पूरे सिलिंडर की कीमत अग्रिम चुकानी होती है। यदि घर में गैस की खपत अधिक है, तो पीएनजी कनेक्शन मासिक खर्च को नियंत्रित करने में अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।6. एलपीजी और पीएनजी- दोनों तरह के गैस हम कहां से और कितना आयात करते हैं?
एलपीजी और पीएनजी (प्राकृतिक गैस) दोनों ही मामलों में भारत अपनी जरूरतों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) और अन्य व्यापारिक डेटाबेस के आंकड़े इस निर्भरता और आपूर्ति शृंखला की असलियत बताते हैं।-
एलपीजी
वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के पीपीएसी डेटा के अनुसार, भारत ने कुल 6,219 टीएमटी एलपीजी का उत्पादन किया, जबकि इसी अवधि में खपत 16,200 टीएमटी दर्ज की गई । इस बड़े अंतर को पाटने के लिए भारत को 10,731 टीएमटी एलपीजी का आयात करना पड़ा, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत अपनी कुल एलपीजी मांग का 62 प्रतिशत विदेशों से आयात करता है । वर्ष 2024 में, भारत पेट्रोलियम गैस के आयात पर लगभग 30.7 बिलियन डॉलर खर्च करके दुनिया का 5वां सबसे बड़ा आयातक देश बन गया था । भारत की एलपीजी आयात आपूर्ति शृंखला पूरी तरह से पश्चिम एशिया पर केंद्रित है। नीचे दी गई तालिका भारत के शीर्ष पेट्रोलियम गैस आपूर्तिकर्ताओं को दर्शाती है।
एलपीजी के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता
| सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश | आयात अरब डॉलर में | स्थिति |
| कतर | $9.96 बिलियन | सबसे बड़ा प्राथमिक आपूर्तिकर्ता |
| संयुक्त अरब अमीरात | $7.51 बिलियन | सबसे तेजी से बढ़ता स्रोत (2023 से $1.76B की वृद्धि) |
| सऊदी अरब | $2.40 बिलियन | स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | $2.35 बिलियन | उभरता हुआ आपूर्तिकर्ता (2023 से $846M की वृद्धि) |
| कुवैत | $2.33 बिलियन | स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता |
स्रोत: OEC World 2024 / PPAC सांख्यिकी
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प्राकृतिक गैस
एलएनजी के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता
| सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश | आयात अरब डॉलर में | स्थिति |
| कतर | $9.96 बिलियन | सबसे बड़ा प्राथमिक आपूर्तिकर्ता |
| संयुक्त अरब अमीरात | $7.51 बिलियन | सबसे तेजी से बढ़ता स्रोत (2023 से $1.76B की वृद्धि) |
| सऊदी अरब | $2.40 बिलियन | स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | $2.35 बिलियन | उभरता हुआ आपूर्तिकर्ता (2023 से $846M की वृद्धि) |
| कुवैत | $2.33 बिलियन | स्थिर और प्रमुख आपूर्तिकर्ता |
स्रोत: WITS विश्व बैंक व्यापार प्रवाह 2024
7. सुरक्षा के दृष्टिकोण से दोनों ईंधनों में से कौन सा अधिक सुरक्षित है?
सुरक्षा के लिहाज से पीएनजी निर्विवाद रूप से एलपीजी से अधिक सुरक्षित विकल्प है। एलपीजी हवा से भारी होती है; रिसाव होने पर यह फर्श के पास जमा हो जाती है जिससे विस्फोट का अत्यधिक जोखिम रहता है। वहीं, पीएनजी का मुख्य घटक मीथेन हवा से हल्का होता है, जो रिसाव की स्थिति में तेजी से ऊपर उठकर वातावरण में वाष्पित हो जाता है। इसके अलावा, एलपीजी को सिलेंडर में आठ बार के अत्यधिक उच्च दबाव पर रखा जाता है, जबकि पीएनजी घरेलू पाइपलाइनों में केवल 21 मिलीबार के बहुत ही कम दबाव पर वितरित की जाती है।8. क्या पीएनजी का इस्तेमाल करना एलपीजी से सस्ता है?
हां, उपभोक्ता के नजरिए से पीएनजी को अपनाना आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, समान मात्रा में खाना पकाने के लिए पीएनजी उपभोक्ता एलपीजी उपभोक्ताओं की तुलना में प्रति माह लगभग 300 से 400 रुपये कम भुगतान करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि पीएनजी में बॉटलिंग, गैस एजेंसियों के कमीशन और ट्रकों द्वारा भारी सिलेंडरों के परिवहन का खर्च शामिल नहीं होता। साथ ही, पीएनजी मीटर-आधारित है, जहां उपभोक्ता केवल उपयोग की गई गैस का ही भुगतान करता है।9. पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से रसद और पर्यावरण को क्या फायदे होंगे?
पारंपरिक एलपीजी वितरण में लाखों भारी सिलेंडरों को ट्रकों के माध्यम से घुमाना पड़ता है, जो रसद के दृष्टिकोण से एक दुःस्वप्न है। पीएनजी इस पूरी लॉजिस्टिक (रसद) बाधा को खत्म कर देती है क्योंकि इसमें ईंधन भूमिगत पाइपलाइनों से 24/7 सीधे रसोई तक पहुंचता है। पर्यावरणीय मोर्चे पर भी, पीएनजी के दहन से प्रति मिलियन Btu केवल 53.06 किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड गैस (CO2) निकलती है। इसके अलावा, पाइपलाइन ट्रांसमिशन नेटवर्क की ऊर्जा दक्षता उच्च होने के कारण इसका 'वेल-टू-बर्नर' कार्बन फुटप्रिंट एलपीजी के समुद्री और सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम होता है।10. भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पीएनजीआरबी की क्या योजना है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के अनुसार, सरकार का लक्ष्य भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 2022 के 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक 15 प्रतिशत करना है। 2030 तक शहरी गैस वितरण (सीजीडी) की खपत 2.5 से 3.5 गुना तक बढ़ने का अनुमान है। इसके लिए पूरे देश को जोड़ने हेतु लगभग 33,500 किलोमीटर के प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (एनजीपीएल) नेटवर्क को अधिकृत किया गया है, जिसमें से लगभग 25,000 किलोमीटर का संचालन शुरू हो चुका है। चूंकि प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका जैसे विविध देशों से होता है, इसलिए यह भारत को एलपीजी की तरह किसी एक भौगोलिक बिंदु पर भू-राजनीतिक बंधक नहीं बनने देगा।
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